मोटे अनाज के उत्पाद बनाकर बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है. झारखंड के बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के ये नवाचार न केवल फूड प्रॉसेसिंग को नई दिशा दे रहे हैं, बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए लाभकारी साबित हो रहे हैं. विश्वविद्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है मोटे अनाजों से बिस्किट, पास्ता और कुकीज जैसे उत्पादन बनाए जा रहा हैं. जबकि, सब्जियों और मसालों को लंबे समय तक चलाने के लिए चूर्ण बनाकर पैकेजिंग की जा रही है. मिलेट बिस्किट बनाकर संस्थान ने 19 लाख रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है.
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में बनाए जा रहे फूड प्रोडक्ट
झारखंड के रांची में स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में कृषि क्षेत्र में नित नए नवाचार हो रहे हैं. कृषि वैज्ञानिकों के निर्देशन में यहां के विद्यार्थी विभिन्न तरह के खाद्यान्नों एवं मशीनों का निर्माण कर रहे हैं. विश्वविद्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि कृषि विकास को लेकर नित नए प्रयोग किए जा रहे हैं. इसके तहत यहां मोटे अनाजों मड़ुआ, कोदो, गुंदली, बाजरा समेत कई फसलों से खाद्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं.
मटर साफ करने वाली मशीन को पेटेंट मिला
कम्यूनिटी साइंस की विशेषज्ञ बिंदू शर्मा ने मीडिया से कहा कि मोटे अनाजों से सेवई, पास्ता, बिस्किट, कुकीज बनाए जा रहे हैं. बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में कई तरह की मशीनों का भी निर्माण किया गया है. इनमें से एक मटर के प्रॉसेसिंग के लिए उपयोग में लाया जा रहा है, जिसे पेटेंट भी मिल चुका है. मशीन की मदद से मटर के छिलके को अलग किया जा सकता है.
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बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की कम्युनिटी साइंस विशेषज्ञ बिन्दु शर्मा ने खाद्य उत्पादों की जानकारी दी.
सब्जियों और मसालों का पाउडर बनाकर सेल्फ लाइफ बढ़ाई जा रही
मसालों और सब्जियों का लंबे समय तक उपयोग हो सके, इसके लिए प्रिजर्वेशन तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. खासकर इनके चूर्ण बनाकर इन्हें प्रयोग में लाया जा रहा है और सेल्फ लाइफ बढ़ाने में मदद मिल रही है. दाल, साग, सब्जियों को सूखाकर उनका पाउडर बनाकर इस्तेमाल किया जा सकता है. इसे छह माह से एक साल तक संरक्षित कर प्रयोग किया जा सकता है.
मिलेट बिस्किट बनाकर 19 लाख रुपये का नेट प्रॉफिट
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के अनुसार मिलेट उत्पादों से बनाए जा रहे बिस्किट की कीमत 280 रुपये प्रति किलो है. प्रॉसेसिंग यूनिट से सालाना उत्पादन खर्च 59.49 लाख रुपये है. सालाना कुल कमाई 84 लाख रुपये है और नेट प्रॉफिट 19.98 लाख रुपये है. विश्वविद्यालय ने किसानों को भी फूल प्रोडक्ट बनाने की ट्रेनिंग देने की योजना बनाई है, ताकि मिलेट उत्पादों से फूड प्रोडक्ट बनाकर उनकी कमाई को लाखों में पहुंचाया जा सके.