आपके खेत में भी आएंगे सरकारी कर्मचारी, डरे नहीं तुरंंत दें ये जानकारी.. वरना नहीं मिलेगा योजनाओं का फायदा
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में कृषि विभाग ने डिजिटल गिरदावरी शुरू की है. मोबाइल ऐप से फसलों का सर्वे किया जा रहा है, जिससे किसानों को फसल बीमा, आपदा राहत, एमएसपी और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा. यह प्रक्रिया समय बचाने वाली और अधिक सटीक बताई जा रही है.
Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में कृषि विभाग ने फसलों की ‘गिरदावरी’ अब डिजिटल माध्यम से शुरू कर दी है. गिरदावरी एक भूमि रिकॉर्ड होता है, जिसमें जमीन पर उगाई जा रही फसलों और कब्जे की स्थिति का ब्यौरा दर्ज किया जाता है और इसे हर छह महीने में अपडेट किया जाता है. विभाग ने किसानों से अपील की है कि जब सर्वे कर्मचारी उनके खेतों पर आएं, तो वे सहयोग करें. आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह डिजिटल सर्वे जिले के सभी 15 कृषि ब्लॉकों में किया जा रहा है और इसे इस महीने के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है.
कृषि विभाग के उप निदेशक, पालमपुर कुलदीप धीमान ने कहा कि जिले में उगाई जा रही फसलों का सर्वे डिजिटल तरीके से किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सर्वे कर्मचारी घर-घर जाकर मोबाइल ऐप के जरिए फसल का प्रकार, बोया गया रकबा और फसल की स्थिति जैसी जानकारी दर्ज कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस ऐप आधारित फील्ड सर्वे को कृषि विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और तकनीकी सहयोगी मिलकर अंजाम देंगे. धीमान ने किसानों से अपील की कि वे सर्वे टीम को अपने खेतों तक ले जाकर पूरा सहयोग करें.
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किसानों के हित में इस्तेमाल होगा डेटा
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि फसल सर्वे से जुड़ा यह डेटा भविष्य में किसानों के हित में इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे उन्हें फसल बीमा, आपदा राहत, न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में मदद मिलेगी. धीमान के अनुसार, डिजिटल गिरदावरी से पारंपरिक तरीके में होने वाली गलतियां कम होंगी और यह समय बचाने वाली प्रक्रिया है. उन्होंने कहा कि इससे कृषि विभाग को फसलों पर मौसम के प्रतिकूल असर का आकलन करने में भी मदद मिलेगी और किसानों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए खेती की बेहतर रणनीति बनाने में सुविधा होगी.
औसत से काफी कम बारिश हुई
वहीं, पीछले महीने खबर सामने आई थी कि हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के निचले इलाकों में पिछले दो महीनों से औसत से काफी कम बारिश हुई है, जिससे सूखे जैसी स्थिति बन गई है. खेतों की नमी खत्म हो चुकी है और मिट्टी सख्त हो गई है, जिससे रबी फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है. किसानों का कहना है कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो पैदावार घट सकती है और उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा. बारिश की कमी के कारण पीने के पानी की समस्या भी गहराती जा रही है.