Haryana News: हरियाणा के भिवानी जिले के करीब 30 गांवों में किसानों की जमीनें अभी भी बाढ़ के पानी में डूबी हुई हैं. ऐसे में किसान पानी निचोड़ने के लिए प्रशासन के कदम उठाने का इंतजार कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि बाढ़ के लगभग पांच महीने बीत गए हैं, जिससे दो फसलें खरीफ और चल रही रबी बर्बाद हो गईं. लेकिन अभी तक उन्हें सरकार से राहत या मुआवजा नहीं मिला. ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) ने बार-बार जिला प्रशासन के सामने यह मुद्दा उठाया है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. किसान नेताओं के अनुसार, कई जगहों पर सिर्फ फसलें ही नहीं बल्कि खेतों में बने घर भी क्षतिग्रस्त हुए हैं. उन्होंने कहा कि फसल और घर के नुकसान के मुआवजे, बकाया फसल बीमा राशि की मांग और बकाया राहत राशि के लिए विरोध प्रदर्शन किए गए, लेकिन उनकी आवाज नहीं सुनी गई.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, AIKS जिला अध्यक्ष रामफल देसवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को समर्पित एक ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से जमा किया गया, जिसे उप-आयुक्त के प्रतिनिधि महेश कुमार ने प्राप्त किया. AIKS के राज्य महासचिव सुमित दलाल और जिला उपाध्यक्ष कॉमरेड ओम प्रकाश ने कहा कि हरियाणा सरकार के मुआवजा पोर्टल के अनुसार 6,397 गांवों के 5,30,287 किसानों ने 31,15,914 एकड़ में खरीफ फसलों के नुकसान की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बड़ी संख्या में प्रभावित किसानों को मुआवजा नहीं दिया.
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हरियाणा के किसानों को एक भी पैसा नहीं मिला
कॉमरेड ओम प्रकाश ने कहा कि केंद्र ने पंजाब को 1,600 करोड़ रुपये, हिमाचल प्रदेश को 1,500 करोड़ और उत्तराखंड को 1,200 करोड़ रुपये की विशेष राहत दी, लेकिन हरियाणा के किसानों को एक भी पैसा नहीं मिला. उन्होंने आगे कहा कि अब तक राज्य सरकार ने जलभराव और बाढ़ के लिए सिर्फ 116 करोड़ रुपये वितरित किए हैं, जबकि केवल सगवान गांव का नुकसान इससे ज्यादा था. लगभग 80 फीसदी सगवान गांव के लोग सुरक्षित स्थानों पर पलायन करने को मजबूर हुए क्योंकि खेतों में पानी जमा है.
अभी तक किसी को भुगतान नहीं मिला
किसानों ने कहा कि सरकार ने फसल नुकसान के लिए पोर्टल खोला था और उन्होंने नुकसान दर्ज कराया, लेकिन अभी तक किसी को भुगतान नहीं मिला. जिन किसानों ने फसल बीमा कराया था, उन्होंने भी कहा कि बीमा कंपनियों ने उनके दावे निपटाए नहीं. कॉमरेड ओम प्रकाश ने कहा कि पांच महीने बीत जाने के बाद भी किसानों को न तो मुआवजा मिला है और न ही बीमा क्लेम का भुगतान. उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे हालात में किसान अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करेंगे. AIKS ने पानी का सही निकास और फसल नुकसान का सही आंकलन (गिरदावरी) कराने की भी मांग की, ताकि मुआवजा तुरंत दिया जा सके.