Monsoon Forecast: मौसम के मिजाज को समझना किसानों से लेकर नीति बनाने वालों तक के लिए हमेशा चुनौती भरा रहा है. इसी बीच जलवायु को लेकर एक अहम खबर सामने आई है. एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर नजर रखने वाली जलवायु संस्था APEC क्लाइमेट सेंटर का कहना है कि इस साल जुलाई के अंत तक अल नीनो की स्थिति उभर सकती है. हालांकि राहत की बात यह है कि अल नीनो के असर के पूरी तरह सक्रिय होने से पहले भारत में सामान्य से ज्यादा बारिश होने की संभावना जताई गई है.
क्या होता है अल नीनो और क्यों है चिंता
अल नीनो एक समुद्री और वायुमंडलीय घटना है, जिसका सीधा असर दुनियाभर के मौसम पर पड़ता है. जब अल नीनो सक्रिय होता है, तो हिंद महासागर से भारत की ओर आने वाली नमी भरी हवाओं का प्रवाह कमजोर पड़ जाता है. इसका असर दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ता है और कई बार देश को कम बारिश या सूखे जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है. भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण होती है.
जुलाई तक राहत, फिर बढ़ सकती है मुश्किल
APCC की रिपोर्ट के मुताबिक 2026 की शुरुआत में अल नीनो-दक्षिणी दोलन यानी ENSO की स्थिति तटस्थ रहने की संभावना है. इसका मतलब है कि साल के शुरुआती महीनों में मौसम अपेक्षाकृत संतुलित रह सकता है. मई से जुलाई के बीच भारत में सामान्य से अधिक बारिश होने के संकेत मिल रहे हैं. इससे खरीफ फसलों की बुवाई के लिए हालात अनुकूल रह सकते हैं. लेकिन जैसे-जैसे जुलाई का अंत आएगा, अल नीनो के उभरने की आशंका बढ़ेगी और इसके साथ ही सूखे जैसी स्थितियां बनने का खतरा भी रहेगा.
पिछला अनुभव अभी भी ताजा
भारत ने अल नीनो का असर हाल के वर्षों में झेला है. 2023 में जून के महीने में अल नीनो सक्रिय हुआ था और यह करीब 11 महीनों तक बना रहा. इसका असर यह हुआ कि मानसून कमजोर पड़ा और कई इलाकों में लंबे समय तक सूखा छाया रहा. यही नहीं, 2024 को अब तक का सबसे गर्म साल भी माना गया, क्योंकि अल नीनो अप्रैल 2024 तक जारी रहा. इस दौरान धान और दलहन जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार पर असर पड़ा, जिससे खाद्य कीमतें भी बढ़ीं.
दुनिया के मौसम पर भी असर
एपीसीसी के अनुसार 2026 में दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है. हालांकि पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत और उत्तरी उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों में इससे अलग स्थिति देखी जा सकती है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उत्तरी प्रशांत, मध्य अफ्रीका, आर्कटिक क्षेत्र और दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है, जबकि कुछ अन्य इलाकों में बारिश सामान्य के आसपास रहने की उम्मीद है.
भारत के लिए क्या हैं संकेत
भारत के संदर्भ में यह पूर्वानुमान दो तरह के संकेत देता है. एक तरफ मानसून की शुरुआत में अच्छी बारिश से राहत मिलने की उम्मीद है, जिससे जलाशयों और खेतों में पानी की स्थिति बेहतर हो सकती है. वहीं दूसरी तरफ अल नीनो के सक्रिय होने पर मानसून कमजोर पड़ने का खतरा भी बना रहेगा. विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे में सरकार और किसान दोनों को पहले से तैयारी करनी होगी, ताकि अगर मौसम पलटे तो नुकसान को कम किया जा सके.
सतर्कता और तैयारी ही समाधान
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो का असर अचानक नहीं बल्कि धीरे-धीरे दिखता है. इसलिए आने वाले महीनों में मानसून की चाल पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा. अगर समय रहते रणनीति बनाई जाए, तो अल नीनो के संभावित असर के बावजूद खेती, जल प्रबंधन और खाद्य सुरक्षा को संभाला जा सकता है. कुल मिलाकर, जुलाई तक राहत की उम्मीद है, लेकिन उसके बाद मौसम की चुनौती बढ़ सकती है.