पंजाब-हरियाणा समेत 5 राज्यों में बढ़ेगा तापमान, मार्च की गर्मी से घट सकती है गेहूं-सरसों की उपज

मार्च का महीना गेहूं और सरसों की फसल के लिए बेहद अहम होता है. इसी समय दाने भरने और पकने की प्रक्रिया चलती है. इन फसलों को इस चरण में हल्की ठंड और संतुलित तापमान की जरूरत होती है. अगर अचानक तापमान बढ़ जाए, तो दाने ठीक से विकसित नहीं हो पाते और पैदावार घट सकती है.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 27 Feb, 2026 | 10:24 AM

Heatwave March 2026: फरवरी खत्म होते-होते ही देश के कई हिस्सों में गर्मी महसूस होने लगी है. सुबह हल्की ठंड जरूर रहती है, लेकिन दोपहर की धूप अब तेज होने लगी है. मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाला मार्च सामान्य से ज्यादा गर्म रह सकता है. कुछ इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार भी जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा असर गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों पर पड़ सकता है.

क्यों चिंता बढ़ा रही है मार्च की गर्मी

मार्च का महीना गेहूं और सरसों की फसल के लिए बेहद अहम होता है. इसी समय दाने भरने और पकने की प्रक्रिया चलती है. इन फसलों को इस चरण में हल्की ठंड और संतुलित तापमान की जरूरत होती है. अगर अचानक तापमान बढ़ जाए, तो दाने ठीक से विकसित नहीं हो पाते और पैदावार घट सकती है.

IMD की रिपोर्ट के अनुसार, इस बार उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी ऊपर रह सकता है. मार्च के आखिरी दिनों तक कई राज्यों में पारा 40 डिग्री के करीब पहुंचने की संभावना जताई जा रही है.

किन राज्यों पर ज्यादा असर

पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश देश के प्रमुख गेहूं और सरसों उत्पादक राज्य हैं. देश के करीब 80 प्रतिशत गेहूं और सरसों का उत्पादन इन्हीं इलाकों में होता है. अगर इन राज्यों में तापमान सामान्य से 5 से 7 डिग्री ज्यादा रहता है, तो फसल पर गर्मी का दबाव बढ़ सकता है.

एक्सपर्ट निर्मल यादव का मानना है कि लगातार गर्म दिन और गर्म रातें फसल के लिए नुकसानदेह हो सकती हैं. इससे दाने छोटे रह सकते हैं और उत्पादन घट सकता है. किसानों के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि इस साल रिकॉर्ड क्षेत्रफल में गेहूं और सरसों की बुवाई की गई है. उम्मीद थी कि अच्छी पैदावार से किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और देश का अनाज भंडार भी मजबूत होगा.

पिछले अनुभव से सबक

साल 2022 में भी फरवरी-मार्च में असामान्य गर्मी पड़ी थी. उस समय गेहूं की पैदावार पर असर पड़ा और सरकार को निर्यात पर रोक लगानी पड़ी थी. उस अनुभव के बाद मौसम की हर छोटी-बड़ी जानकारी पर नजर रखी जा रही है.

इस बार भी अगर तापमान अचानक बढ़ता है, तो वही स्थिति दोबारा बन सकती है. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है. अगर उत्पादन घटता है, तो घरेलू बाजार में कीमतों पर असर पड़ सकता है और निर्यात की योजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं.

खाद्य तेल आयात पर भी असर

सरसों की फसल भी इस समय महत्वपूर्ण चरण में है. भारत पहले से ही पाम, सोया और सूरजमुखी तेल का बड़ा आयातक है. अगर सरसों की पैदावार घटती है, तो खाद्य तेल की घरेलू आपूर्ति कम हो सकती है और आयात बढ़ाना पड़ सकता है. इससे देश पर विदेशी मुद्रा का बोझ भी बढ़ सकता है.

किसानों के लिए क्या विकल्प

विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे फसल की नियमित निगरानी करें और जरूरत पड़ने पर हल्की सिंचाई करें, ताकि खेतों में नमी बनी रहे. हालांकि अत्यधिक गर्मी को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन समय पर देखभाल से कुछ हद तक नुकसान कम किया जा सकता है.

मौसम विभाग जल्द ही मार्च के तापमान को लेकर विस्तृत पूर्वानुमान जारी कर सकता है. फिलहाल संकेत यही हैं कि गर्मी सामान्य से ज्यादा रहेगी. अगर अगले कुछ दिनों में तापमान तेजी से बढ़ता है, तो यह रबी फसलों के लिए चुनौती बन सकता है.

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Published: 27 Feb, 2026 | 10:22 AM

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