Monsoon 2026 Update: देश में मॉनसून का आगमन भले ही समय पर हो गया हो, लेकिन इसकी रफ्तार अब धीमी पड़ती दिखाई दे रही है. मौसम विशेषज्ञों (IMD) और कृषि विभाग की रिपोर्टों के अनुसार, जून के पहले पखवाड़े (पहले 15 दिन) में देश के कई हिस्सों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है. इसका असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ने लगा है और किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है. विशेष रूप से महाराष्ट्र, मध्य भारत और पूर्वी राज्यों में बारिश की कमी ने कृषि कार्यों को प्रभावित किया है.
मॉनसून की शुरुआत के बाद थमी रफ्तार
IMD के अनुसार, इस साल मॉनसून ने 4 जून को केरल में दस्तक दी थी. इसके बाद उम्मीद थी कि दक्षिण और मध्य भारत के कई हिस्सों में अच्छी बारिश होगी, लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं हो पाया है. कई राज्यों में बारिश सामान्य से काफी कम हुई है. देश के बड़े कृषि राज्यों में शामिल महाराष्ट्र में 1 जून से 16 जून के बीच सिर्फ 21.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 75 फीसदी कम है. वहीं, पूरे देश में इस अवधि के दौरान औसतन 35 फीसदी कम बारिश हुई है. कम बारिश की वजह से किसानों और कृषि विशेषज्ञों की चिंता बढ़ने लगी है.
महाराष्ट्र में किसानों को दी गई विशेष सलाह
महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को जल्दबाजी में बुवाई नहीं करने की सलाह दी है. राज्य सरकार की फसल समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि जब तक अच्छी और लगातार बारिश न हो जाए, तब तक बीज नहीं बोना चाहिए. शुरुआती हल्की बारिश देखकर बुवाई करने पर बाद में नुकसान हो सकता है. अगर बारिश रुक जाए और लंबे समय तक सूखा बना रहे, तो अंकुर निकलने के बाद फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. इसीलिए किसानों को मौसम की स्थिति देखकर और पर्याप्त बारिश होने के बाद ही बुवाई करने की सलाह दी गई है.

जून के पहले पहले 15 दिन में देश के कई हिस्सों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है
विदर्भ और मराठवाड़ा में सबसे ज्यादा चिंता
महाराष्ट्र के विदर्भ, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र में मॉनसून की रफ्तार फिलहाल धीमी बनी हुई है. कुछ जगहों पर हल्की बारिश हुई है, लेकिन खेतों में इतनी नमी नहीं बनी है कि बड़े पैमाने पर बुवाई शुरू की जा सके.
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 16 जून के बीच विदर्भ में सामान्य से 72 फीसदी और मध्य महाराष्ट्र में 78 फीसदी कम बारिश हुई है. वहीं कई जिलों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है, जिससे लोगों को गर्मी और उमस का सामना करना पड़ रहा है.
खरीफ फसलों की बुवाई पर असर
बारिश की कमी का सबसे ज्यादा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है. धान, सोयाबीन, कपास और दालों जैसी फसलें समय पर होने वाली बारिश पर काफी हद तक निर्भर रहती हैं. अगर जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई, तो इन फसलों की बुवाई में देरी हो सकती है.
मौसम विभाग के ताजा अनुमान भी चिंता बढ़ा रहे हैं. विभाग का कहना है कि जून के दूसरे हिस्से में मध्य और उत्तर भारत के कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है. ऐसे में किसानों की नजर अब मॉनसून की अगली गतिविधियों पर टिकी हुई है.
मध्य भारत में सबसे ज्यादा बारिश की कमी
देशभर में बारिश की स्थिति एक जैसी नहीं है. कुछ इलाकों में सामान्य बारिश हुई है, जबकि कई क्षेत्रों में बारिश की बड़ी कमी देखने को मिली है. 1 जून से 16 जून के बीच मध्य भारत में सामान्य से 61 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई. वहीं सौराष्ट्र और कच्छ में 91 फीसदी, कोंकण और गोवा में 79 फीसदी तथा छत्तीसगढ़ में 60 फीसदी कम बारिश हुई है. इसके अलावा पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी सामान्य से 43 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे कई राज्यों में खेती और जल उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है.
आगे क्या है चुनौती?
आने वाले कुछ हफ्ते खेती-किसानी के लिए बहुत अहम रहेंगे. अगर जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई, तो खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है. ऐसे में किसानों को मौसम की स्थिति पर ध्यान रखते हुए कृषि विभाग की सलाह के अनुसार ही बुवाई का फैसला लेना चाहिए. फिलहाल मॉनसून की धीमी रफ्तार किसानों और कृषि अर्थव्यवस्था दोनों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है.