Cold Wave: पूरे देश में कड़ाके की ठंड और शीतलहर का असर महसूस किया जा रहा है. इससे न केवल इंसान बल्कि पशु-पक्षी भी परेशान हैं. आमतौर पर लोग सोचते हैं कि बहुत ठंड पड़ने पर ही शीतलहर आती है, लेकिन अचानक तापमान में तेज गिरावट भी उतनी ही खतरनाक हो सकती है जितनी हीटवेव. भारत में ठंड की लहर यानी कोल्ड वेव असामान्य रूप से कम तापमान का दौर होती है, जो लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है.
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दरअसल, सर्दी के मौसम में ये ठंडी हवाएं मध्य एशिया और मेडिटरेनियन क्षेत्र से आती हैं और उत्तर-पश्चिम भारत के रास्ते पाकिस्तान और हिमालय के ऊपर से देश में प्रवेश करती हैं. इन्हें ‘वेस्टर्न डिस्टरबेंस’ कहा जाता है. जब ये कड़कती हवाएं मैदानों में चलती हैं, तो यह लोगों में तेज कांप, हाइपोथर्मिया और कमजोर या संवेदनशील लोगों में मौत तक का कारण बन सकती हैं.
अब तक 26,000 से ज्यादा लोगों की मौत
1972 से 2019 के बीच भारत में ठंड की लहरों (कोल्ड वेव) के कारण 26,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. ठंड की लहरें हीटवेव से भी अधिक खतरनाक होती हैं और कई जान ले लेती हैं. लोगों की सुरक्षा के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी प्रणाली बनाई है. क्या आप जानते हैं कि इसके चार अलग-अलग स्तर के अलर्ट होते हैं?
कोल्ड वेव का असर
दरअसल, कोल्ड वेव यानी ठंड की लहर अचानक और तेजी से हवा का तापमान गिरना होती है, जो इंसानों, जानवरों और फसलों के लिए खतरनाक हो सकती है. भारत में ये ठंडी लहरें मुख्य रूप से नवंबर से मार्च के बीच आती हैं. ये हवाओं को जमाती हैं और उत्तर और मध्य भारत में घना कोहरा भी लाती हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, कोल्ड वेव सिर्फ ठंड लगने का नाम नहीं है, बल्कि यह खास तापमान गिरावट के आधार पर मापी जाती है.
कैसे तय होता है शीतलहर है या नहीं
- भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) दो तरीकों से तय करता है कि कोल्ड वेव आई है या नहीं
- सामान्य तापमान के आधार पर: अगर न्यूनतम तापमान उस दिन के सामान्य तापमान से 4.5°C से 6.4°C तक कम हो.
- वास्तविक तापमान के आधार पर: मैदानों में, अगर न्यूनतम तापमान 4°C या उससे कम हो, तो चाहे सामान्य तापमान कुछ भी हो, कोल्ड वेव घोषित कर दी जाती है.
अलर्ट के क्या होते हैं मायने
ग्रीन अलर्ट (कोई चेतावनी नहीं): ग्रीन अलर्ट का मतलब है कि मौसम सामान्य है. कोई ठंडी लहर नहीं है और तापमान इस समय के लिए ठीक है. स्वास्थ्य या फसलों के लिए कोई खतरा नहीं है. आप अपनी रोजमर्रा की गतिविधियां सामान्य रूप से कर सकते हैं.
येलो अलर्ट (सावधान रहें): येलो अलर्ट आने का मतलब है कि मौसम बदल रहा है और जल्द ही ठंडी लहर आ सकती है. इस दौरान दिनचर्या में थोड़ी मुश्किलें आ सकती हैं. मौसम की जानकारी नियमित रूप से चेक करें और अपडेट रहें.
ऑरेंज अलर्ट (तैयार रहें): ऑरेंज अलर्ट का मतलब है कि मौसम बहुत खराब होने वाला है. इस स्तर पर ठंड से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है, जैसे फ्लू या फ्रोस्टबाइट. यात्रा में देरी या बिजली की कटौती हो सकती है. गरम कपड़े और हीटिंग की व्यवस्था तैयार रखें.
रेड अलर्ट (फौरन कदम उठाएं): रेड अलर्ट का मतलब है कि ठंड खतरनाक और जानलेवा है. इस दौरान परिवहन और ऊर्जा सेवाओं में गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. कमजोर लोग, जानवर और संवेदनशील फसलें फ्रीजिंग से बचाने के लिए तुरंत सुरक्षा उपाय अपनाना जरूरी है.