अगर खेत की मिट्टी स्वस्थ तो ही उपज हो सकेगी और जिनके खेत की मिट्टी ठीक है उन्हें अपनी जमीन का सटीक प्रबंधन करना होगा. तभी वे खेती से कमाई हासिल कर सकेंगे जो किसान और खेती के भविष्य के लिए जरूरी है. बिहार के कृषि मंत्री ने वाटरशेड महोत्सव 2026 के मौके पर कहा कि जल संरक्षण सबसे जरूरी है. उन्होंने कहा कि राज्य के 18 जिलों में पानी संरक्षण के लिए वॉटरशेड परियोजनाओं की शुरुआत की गई है, जिसके लिए 440 करोड़ रुपये को मंजूरी दी गई है. इससे धरती का जलस्तर बेहतर और होगा फसलों की सिंचाई के लिए पानी का संकट दूर होगा.
बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने वाटरशेड महोत्सव 2026 के मौके पर पानी बचाने का संदेश किसानों को दिया. उन्होंने कहा कि मृदा संरक्षण और भूमि प्रबंधन खेती के भविष्य के लिए अनिवार्य कदम हैं. किसानों को बारिश के पानी का संचय करना होगा और खेत की मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बचाए रखने के लिए केमिकल इस्तेमाल बंद करना होगा. इस दौरान कृषि मंत्री ने 42 विकास कार्यों का शिलान्यास और 61 कार्यों का लोकार्पण किया.
कृषि मंत्ररी राम कृपाल यादव ने कहा कि योजनाओं के लाभार्थी महिलाओं को जल संरक्षण पर काम करना होगा. इस दौरान महिलाओं ने जल कलश यात्रा भी निकाली. वाटरशेड योजना के अंतर्गत 42 विकास कार्यों का शिलान्यास और 61 कार्यों का लोकार्पण किया गया. साथ ही योजना की उपलब्धियों और प्रेरणादायी अनुभवों को समाहित करती ‘सफलता की कहानियां’ पुस्तक का विमोचन किया गया. कृषि विभाग की भूमि संरक्षण से संबंधित विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित प्रगतिशील किसानों ने इस कार्यक्रम के दौरान मंच से अपने अनुभव साझा किए तथा योजनाओं के सकारात्मक प्रभावों और उनसे हुए लाभों की जानकारी उपस्थित जनसमूह के साथ साझा की.
माननीय कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने राज्यस्तरीय वाटरशेड महोत्सव-2026 को संबोधित करते हुए जल संरक्षण को जीवन और विकास का मूल आधार बताया. अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने रहीमदास जी के प्रसिद्ध दोहे “रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून…..” से करते हुए कहा कि पानी ही जीवन है। इसके बिना मानव, प्रकृति और सभ्यता का अस्तित्व संभव नहीं है.
नदी, तालाब, कुआं, पेड़ और धरती का सरंक्षण जरूरी
कृषि मंत्री ने कहा कि भारत नदियों का देश है और बिहार नदियों का राज्य. हमारी सांस्कृतिक परंपरा में नदी, तालाब, कुआं, पेड़ और धरती को पूजनीय माना गया है. इनके संरक्षण के लिए हमें अपनी जिम्मेदारी पूरी करनी होगी. पंचतत्व-पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश पर आधारित यह दर्शन बताता है कि प्रकृति की रक्षा ही हमारी सांस्कृतिक विरासत है. जल संचयन, जल संरक्षण और भूमि संरक्षण सदियों से हमारी जीवनशैली का हिस्सा रहे हैं.
जल संरक्षण के लिए 62 खेत तालाब और 344 कुएं बनाए
कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि विभाग के भूमि संरक्षण निदेशालय द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना वाटरशेड डेवलपमेंट कंपोनेंट 2.0 के तहत दक्षिण बिहार के 17 जिलों एवं उत्तर बिहार के बेगूसराय को मिलाकार कुल 18 वर्षा पर निर्भर जिलों में 35 परियोजनाओं को लागू किया जा रहा है. इस पंचवर्षीय योजना के लिए भारत सरकार की ओर से 440 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है. इसके अंतर्गत 496 हेक्टेयर में पौधारोपण, 282 पक्के चेक डैम, 62 खेत तालाब, 361 जल संचयन तालाब, 756 आहर पईन का जीर्णोद्धार तथा 344 कुओं का निर्माण किया गया है.
9 लाख हेक्टेयर जमीन की ताकतवर मिट्टी बाढ़ में बह जा रही
कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार में लगभग 9 लाख हेक्टेयर भूमि भूक्षरण से प्रभावित है. खेत की मिट्टी के क्षरण होने से उर्वरक हिस्सा बह जाता है. इससे खेत की ताकत और उर्वरा शक्ति खत्म हो जाती है. इसे रोकने के लिए जल-जीवन-हरियाली मिशन के माध्यम से तालाबों, आहर-पईन की उड़ाही, सौंदर्यीकरण, पौधारोपण और जलस्रोतों को अतिक्रमण मुक्त किया गया है. गंगा जल को पाइपलाइन से नालंदा, राजगीर, गया और नवादा तक पहुचाना जल प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण है.
विश्व का 4 फीसदी शुद्ध पानी भारत में
उन्होंने बताया कि भारत में विश्व का लगभग 4 फीसदी शुद्ध जल उपलब्ध है, जिसमें से 80 प्रतिशत जल का उपयोग कृषि में होता है. इसलिए कृषि के लिए जल का वैज्ञानिक प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है. “फोर-आर” रिड्यूस, रीयूज, रिचार्ज और रिसाइकल और “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” अभियान से जल संरक्षण को नई दिशा मिली है. उन्होंने युवाओं और जीविका दीदियों से आह्वान किया कि वे जनभागीदारी के माध्यम से जल संचयन और संरक्षण को जनांदोलन बनाएं. कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि मानव जीवन में भूमि की भूमिका जन्म से लेकर मृत्यु तक अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने मृदा की ऊपरी परत को हमारी अमूल्य पूंजी बताते हुए इसके संरक्षण पर जोर दिया.