धान की जगह इस फसल की खेती करने पर मिलेंगे प्रति एकड़ 1000 रुपये, यहां करें रजिस्ट्रेशन

हरियाणा सरकार भूजल संरक्षण के लिए फसल विविधीकरण को बढ़ावा दे रही है. धान की जगह मूंग और ढैंचा की खेती प्रोत्साहित की जा रही है. इसके लिए किसानों को आर्थिक मदद दी जाएगी.

वेंकटेश कुमार
नोएडा | Updated On: 19 May, 2025 | 09:42 PM

हरियाणा सरकार गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए प्रदेश में फसल विविधीकर को बढ़ावा दे रही है. खास कर किसानों को धान की जगह ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती करने की सलाह दी जा रही है. सरकार का मानना है कि धान की खेती में पानी की काफी खपत होती है. अगर किसान धान की जगह मूंग की खेती करते हैं, तो भूजल का दोहन कम होगा. क्योंकि मूंग की फसल को धान के मुकाबले बहुत कम पानी की जरूरत होती है. इसके अलावा प्रदेश में हरी खाद के रूप में ढैंचा की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है.

दरअसल, ढैंचा वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करके और कार्बनिक पदार्थों से मिट्टी को समृद्ध करके इसके स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है. यही वजह है कि ढैंचा उगाने वाले किसानों को 1,000 रुपये प्रति एकड़ के प्रोत्साहन राशि दी जा रही है. लेकिन प्रोत्साहन राशि का लाभ उठाने के लिए किसानों को ‘मेरी फसल, मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा. साथ ही किसानों को अपने बोए गए खेत की तस्वीर अपलोड करनी होगी. यह पहल खरीफ 2025 सीजन का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य 4 लाख एकड़ जमीन पर ढैंचा की खेती करनी है.

फसल विविधीकरण का लाभ

राज्य सरकार ने अगेती धान की किस्मों पर प्रतिबंध लगा दिया है, ताकि भूजल के दोहन को कम किया जा सके. वहीं, फसल विविधीकरण से मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और हेल्थ में सुधार आएगा. इससे फसल की पैदावार में भी बढ़ोतरी होगी. खास बात यह है कि हरियाणा सरकार पानी की बचत करने के लिए DSR तकनी को बढ़ावा दे रही है. यानी किसानों को नर्सरी तैयार करने के बजाए सीधे धान के बीजों की बुवाई करनी होगी. DSR तकनीक से खेती करने वाले किसानों को सरकार प्रोत्साहन के रूप में प्रति एकड़ 4,000 रुपये दे रही है. क्योंकि DSR तकनीक में पानी की खपत बहुत कम होती है.

पंजाब में भी DSR तकनीक को बढ़ावा

अभी प्रदेश में DSR को 12 प्रमुख धान उगाने वाले जिलों में लागू किया जा रहा है. सरकार प्रोत्साहन के रूप में प्रति एकड़ 4,500 रुपये दे रही है. क्योंकि पारंपरिक तरीकों के विपरीत, DSR के लिए पानी भरे खेतों की आवश्यकता नहीं होती है. वहीं, पंजाब में DSR तकनीक को अपनाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 1,500 रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी. इस नई पहल से राज्य के करीब 15 से 20 फीसदी तक भूजल की बचत होने की उम्मीद है. साथ ही किसानों का खर्च भी कम होगा.

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Published: 19 May, 2025 | 07:41 PM
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