221 किसानों का दूध नाले में फेंकने पर जागी सरकार.. नई तकनीकी सुविधा लाई, अब खराब नहीं होगा दूध

221 किसानों को कई सौ लीटर दूध सहकारी समिति के सचिव ने बिना इजाजत नाले में गिरा दिया, जिस पर उसे नोटिस दिया गया है. वहीं, मुख्यमंत्री ने किसानों को बल्क मिल्क कूल चलाने का काम देने का फैसला किया है.

नोएडा | Updated On: 29 Aug, 2025 | 03:57 PM

हिमाचल प्रदेश में दूध खराब होने पर नाले में फेंकने के मामले में सरकार ने सहकारी समित के सचिव को नोटिस जारी किया है. यह मामला विधानसभा तक में गूंजा है. इसके साथ ही भविष्य में डेयरी किसानों का दूध खराब न हो इसके लिए उन्हें नई तकनीक से लैस बल्क मिल्क कूलर की सुविधा देने की घोषणा की है. इसका लाभ स्थानीय दूध किसानों को मिलेगा, वह खुद मिल्क कूलर को चलाएंगे और इसके लिए उन्हें सरकार की ओर से कमीशन राशि भी मिलेगी.

सहकारी समिति के सचिव ने नाले में फेंक दिया था दूध

हिमाचल प्रदेश में बीते दिनों 221 किसानों का दूध खराब हो गया था. इसके बाद सहकारी सचिव ने उस दूध को नाले में फेंक दिया. इस मामले ने तूल पकड़ लिया और किसानों ने जमकर सरकार के खिलाफ गुस्सा दिखाया था और नुकसान की भरपाई की मांग की थी. इतना ही नहीं यह मुद्दा विधानसभा तक में गूंजा था. अब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश में अब स्थानीय दूध उत्पादकों को बल्क मिल्क कूलर की सुविधा मिलेगी, ताकि उनका दूध नुकसान न होगा.

दूध किसानों को बल्क मिल्क कूलर चलाने का काम मिलेगा

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि प्रदेश में स्थानीय दूध उत्पादकों को बल्क मिल्क कूलर चलाने का काम सौंपा जाएगा. वह खुद इनकी देखरेख करें ताकि दूध खराब न हो, जिसके लिए सरकार उन्हें कमीशन देगी. वह विधानसभा में आनी के विधायक लोकेंद्र कुमार द्वारा नियम 62 के तहत उठाए गए मामले के जवाब में हस्तक्षेप करते हुए बोल रहे थे.

चिलिंग प्लांट में तकनीकी खराबी से बर्बाद हुआ था दूध

विधायक लोकेंद्र कुमार ने सदन में नियम 62 के तहत अपने निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित ”दुग्ध चिलिंग प्लांट की तकनीकी खराबी के कारण हजारों लीटर दूध बर्बाद होने से उत्पन्न स्थिति” पर सदन का ध्यान आकर्षित किया था. इसके मूल जवाब में कृषि मंत्री चन्द्र कुमार ने कहा कि मिल्क कूलर की अचानक तकनीकी खराबी की जानकारी मिली, जिस मशीन को ठीक नहीं किया जा सका था. बाद में पता चला कि बल्क मिल्क कूलर में खराबी नहीं थी, लेकिन बिजली बोर्ड की सिंगल लाइन की वजह से वोल्टेज नहीं थी. उस वजह से वह काम नहीं कर पा रहा था. इस दौरान दूध खराब हो गया था तथा दूध की गुणवत्ता खराब थी.

सहकारी समितियों को सख्त निर्देश जारी

उन्होंने कहा कि सहकारी समिति के सचिव ने बिना इजाजत दूध को नाले में गिरा दिया, जिस पर उसे नोटिस दिया गया है. उन्होंने बताया कि सहकारी समितियों के पदाधिकारियों को कहा गया है कि कूलर आदि का रखरखाव सही तरह से करें ताकि भविष्य में ऐसी घटना न हो. सभी प्लांट प्रमुखों को निर्देश दिए गए हैं कि वो सही तरह से काम करें. उन्होंने बताया कि नाले में दूध फेंके जाने से 221 उत्पादकों को 77 हजार रुपए का नुकसान हुआ है.

अधिक स्टॉक होने पर नहीं लिया जाता है किसानों का दूध

विधायक लोकेंद्र कुमार ने कहा कि आनी के आउटर सराज क्षेत्र में सबसे अधिक दूध का उत्पादन किया जाता है. महिलाएं इस काम में सबसे आगे हैं. उन्होंने कहा कि कराणा में एक चिलिंग प्लांट बनाया गया है जहां पर नाले में हजारों लीटर दूध फेंक दिया गया. उन्होंने कहा कि वहां अधिक दूध आने पर उसे वापस भेजा जाता है, जिससे लोग परेशान हैं. उन्होंने कहा कि निरमंड के तहत बल्क मिल्क कूलर की कैपेसिटी 5 हजार लीटर की है. आनी में 15 हजार लीटर का मिल्क कूलर प्लांट चाहिए. बल्क मिल्क कूलरों की केपेसिटी को बढ़ाया जाए ताकि किसानों को लाभ हो.

Published: 29 Aug, 2025 | 03:55 PM