कमजोर मॉनसून के बीच कपास की कीमतों में उछाल, 1100 रुपये प्रति कैंडी बढ़ा रेट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी और मॉनसून की देरी के बीच भारत में कपास की कीमतों में उछाल आया है. CCI के अनुसार दाम 1,100 रुपये प्रति कैंडी तक बढ़े हैं. वहीं कपास की बुवाई 25 प्रतिशत घट गई है. सीमित आवक, मजबूत मांग और वैश्विक संकेत बाजार को समर्थन दे रहे हैं.

Kisan India
नोएडा | Published: 23 Jun, 2026 | 08:22 AM

Cotton Price Hike: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास की बढ़ती कीमतों और मध्य भारत में मॉनसून की देरी का असर घरेलू बाजार पर भी दिखने लगा है. पिछले कुछ दिनों में कपास के दामों में अच्छी तेजी दर्ज की गई है. भारतीय कपास निगम (CCI) के मुताबिक, कपास की कीमतें करीब 1,100 रुपये प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) तक बढ़ी हैं, जिससे किसानों और व्यापारियों के बीच बाजार को लेकर सकारात्मक माहौल बना हुआ है.

कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 19 जून तक कपास की बुवाई में लगभग 25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. इस बार कपास 17.13 लाख हेक्टेयर में बोया गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 22.82 लाख हेक्टेयर था. मॉनसून की धीमी प्रगति के कारण बुवाई में देरी हुई है. CAI की फसल समिति के अध्यक्ष अतुल गनात्रा ने बिजनेसलाइन को कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय फ्यूचर्स बाजार में तेजी है. उनके अनुसार, ICE दिसंबर फ्यूचर्स 75 सेंट प्रति पाउंड से बढ़कर 80 सेंट प्रति पाउंड तक पहुंच गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर कपास के दाम  मजबूत हुए हैं. यानी कुल मिलाकर, मॉनसून की अनिश्चितता से बुवाई प्रभावित हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार की मजबूती ने कपास की कीमतों को सहारा दिया है.

विदर्भ क्षेत्र में नहीं शुरू हुई कपास की बुवाई

महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में इस बार कपास की बुवाई अभी शुरू ही नहीं हो पाई है. कुछ किसान जिनके पास ड्रिप सिंचाई की सुविधा है, उन्होंने सीमित स्तर पर बुवाई शुरू की है, लेकिन अधिकांश इलाकों में अभी खेत खाली हैं. विदर्भ में कपास की बुवाई  आमतौर पर जुलाई मध्य तक की जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षेत्र में 15 जुलाई तक बुवाई संभव रहती है और इस साल यहां कपास का रकबा लगभग 10 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कपास के फ्यूचर्स स्थिर से ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं. जुलाई ICE फ्यूचर्स करीब 76.05 सेंट प्रति पाउंड और दिसंबर फ्यूचर्स लगभग 79.67 सेंट प्रति पाउंड के आसपास कारोबार कर रहे हैं. हालांकि, पिछले कुछ दिनों में कपास के बाजार में मांग बढ़ी है और सरकारी खरीद एजेंसी CCI के कपास की अच्छी बिक्री दर्ज की गई है. व्यापारियों के अनुसार, पिछले हफ्ते लगभग 7 लाख बेल (bales) कपास की बिक्री हुई है.

कपास की ताजा बिक्री कीमत

बाजार में कीमतों की बात करें तो मल्टीनेशनल कंपनियां CCI के मुकाबले लगभग 1,000 रुपये प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) अधिक दाम पर कपास बेच रही हैं, जबकि रीसेलर (पुनर्विक्रेता) CCI के दाम से 300 रुपये से 500 रुपये अधिक कीमत मांग रहे हैं. वर्तमान में CCI के दाम लगभग 62,500 रुपये से 63,200 रुपये  प्रति कैंडी के आसपास बने हुए हैं.

देश में कितना उपलब्ध है कपास

देश में इस समय कुल कपास का स्टॉक करीब 182.50 लाख बेल (प्रति बेल 170 किलोग्राम) है. इसमें से लगभग 94 लाख बेल कपास स्पिनिंग मिलों के पास मौजूद है, जबकि भारतीय कपास निगम (CCI) के पास 25.50 लाख बेल बिना बिके स्टॉक के रूप में रखा हुआ है. इसके अलावा MCX, जिनिंग मिलों और व्यापारियों के पास मिलाकर करीब 63 लाख बेल कपास का भंडार उपलब्ध है. इससे बाजार में कपास की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है, हालांकि अच्छी गुणवत्ता वाले कपास की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है. हालांकि, जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय फ्यूचर्स बाजार में तेजी के चलते भारत में भी कपास की भौतिक कीमतें मजबूत हो रही हैं.

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