अब बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में होगी मखाने की खेती, किसानों को दो किस्तों में मिलेगी सब्सिडी राशि

पूर्वी चंपारण में मखाना खेती के लिए 10 हेक्टेयर जलाशय चयनित किया गया है. किसानों को प्रति हेक्टेयर 75 फीसदी सब्सिडी मिलेगी. जिले में मत्स्य पालन, मखाना और सिंघाड़ा की क्षमता का सही उपयोग नहीं हो पाया है. सरकार मिश्रित मछली पालन और बेहतर मार्केटिंग व्यवस्था अपनाने पर विचार कर रही है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 10 Jan, 2026 | 01:58 PM

Bihar Agriculture News: मखाना (फॉक्सनट) की खेती को बढ़ावा देने की योजना के तहत कृषि विभाग ने पूर्वी चंपारण जिले को मखाना उत्पादन के लिए चुना है. जिले में बड़े पैमाने पर जलस्रोत उपलब्ध होने के कारण यह फैसला लिया गया है. यहां के किसान पहली बार मखाना की खेती करेंगे और अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो अगले साल जिले में बड़े स्तर पर मखाना उत्पादन शुरू किया जाएगा. अब तक अनाज और सीमित मछली पालन करने वाले किसानों के लिए यह नई फसल आय बढ़ाने का जरिया बन सकती है.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जिला उद्यान पदाधिकारी विकास कुमार का कहना है कि विभाग ने जलाशयों के 10 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना की खेती का लक्ष्य तय किया है. साथ ही जिले में मखाना बीज उत्पादन को भी बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है. उन्होंने कहा कि मखाना उगाने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर कुल लागत का 75 फीसदी अनुदान दिया जाएगा. कुल लागत 97,000 रुपये प्रति हेक्टेयर है, जिसमें से किसानों को 72,750 रुपये की सब्सिडी मिलेगी.

किसानों को दो किस्तों में मिलेगी सब्सिडी

अधिकारियों ने कहा कि मखाना खेती पर मिलने वाली सब्सिडी  दो किस्तों में दी जाएगी. पहली किस्त में 50,150 रुपये जारी किए जाएंगे, जबकि बाकी राशि दूसरी और अंतिम किस्त में दी जाएगी. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जिले में 823 सरकारी तालाब, 200 निजी तालाब और नौ अन्य जलस्रोत हैं, जो करीब 1,950 एकड़ क्षेत्र में फैले हुए हैं. इसके अलावा 28 झीलें भी हैं, जिनका जल क्षेत्र लगभग 7,486 एकड़ है.

कोई संगठित मार्केटिंग व्यवस्था मौजूद नहीं है

इतने बड़े जल संसाधन होने के बावजूद, जिले में मत्स्य पालन, मखाना और सिंघाड़ा की खेती की पूरी क्षमता का अब तक सही उपयोग नहीं हो पाया है. सरकार अब इस संभावना को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने और मिश्रित मछली पालन जैसी तकनीकों को अपनाने पर विचार कर रही है. फिलहाल जिले में सालाना मछली उत्पादन करीब 2,600 टन है, जिसकी कीमत लगभग 26 करोड़ रुपये है, लेकिन इसके लिए कोई संगठित मार्केटिंग व्यवस्था मौजूद नहीं है.

बिहार में कितने हेक्टेयर में होती है मखाने की खेती

बिहार देश के कुल मखाना उत्पादन में करीब 85 से 90 फीसदी का योगदान देता है. पिछले कुछ वर्षों में मखाना की खेती का रकबा तेजी से बढ़ा है. जहां 2012-13 में इसका क्षेत्रफल करीब 13,000 हेक्टेयर था, वहीं 2025 तक यह बढ़कर लगभग 45,000 हेक्टेयर हो गया है. इसी तरह मखाना का उत्पादन भी 2019-20 में 9,360 टन से काफी बढ़ गया है. दरभंगा, मधुबनी, सहरसा और कटिहार मखाना उत्पादन के प्रमुख जिले हैं, जबकि अब राज्य के 16 जिलों में इसकी खेती की जा रही है. वहीं, केंद्र सरकार ने मखाना की खेती को बढ़ावा देने के लिए मखाना बोर्ड का गठन किया है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 10 Jan, 2026 | 01:54 PM

कीवी उत्पादन के मामले में देश का सबसे प्रमुख राज्य कौन सा है