कृषि मंत्री का बड़ा ऐलान- अब 3 लाख रुपये तक के लोन पर कम लगेगा ब्याज, जारी किए गए 500 करोड़
बिहार सरकार और नाबार्ड के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते के तहत अब किसानों को खेती के कर्ज पर 1 प्रतिशत की अतिरिक्त ब्याज छूट मिलेगी. 3 लाख रुपये तक के ऋण पर मिलने वाली इस राहत से किसानों पर वित्तीय बोझ कम होगा और वे आधुनिक कृषि तकनीकों में निवेश कर सकेंगे. यह पहल ग्रामीण समृद्धि की दिशा में बड़ा कदम है.
Agriculture Loan Subsidy : खेती-किसानी के काम में जब पैसों की जरूरत होती है, तो अक्सर किसान भाई साहूकारों के भारी ब्याज के जाल में फंस जाते हैं. लेकिन अब बिहार के किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है. बिहार सरकार ने नया साल 2026 शुरू होते ही किसानों को एक शानदार तोहफा दिया है. राज्य के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव की मौजूदगी में सरकार और नाबार्ड (NABARD) के बीच एक ऐसा समझौता हुआ है, जिससे अब खेती के लिए कर्ज लेना पहले से कहीं ज्यादा आसान और सस्ता हो जाएगा. सरकार ने फैसला किया है कि वह किसानों को ब्याज पर 1 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट देगी. यह कदम किसानों की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करने और उन्हें आधुनिक खेती की ओर प्रोत्साहित करने के लिए उठाया गया है.
नाबार्ड और सरकार के बीच ऐतिहासिक हाथ मिलाना
बिहार की राजधानी पटना में कृषि विभाग और नाबार्ड के अफसरों ने एक खास कागज (MoU) पर दस्तखत किए. इस मौके पर कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि यह सिर्फ एक सरकारी समझौता नहीं है, बल्कि किसानों की खुशहाली का नया रास्ता है. इस समझौते के तहत अब राज्य सरकार खुद आगे बढ़कर किसानों के ब्याज का हिस्सा भरेगी. नाबार्ड इस पूरी योजना को जमीन पर उतारने का काम करेगा ताकि हर असली किसान तक यह फायदा बिना किसी देरी के पहुंच सके.
अब कितना सस्ता होगा आपका कर्ज?
भारत सरकार की ओर से कृषि ऋण पर 3 प्रतिशत की छूट मिलती थी. लेकिन अब बिहार सरकार ने अपनी तरफ से 1 प्रतिशत का अतिरिक्त ब्याज अनुदान देने का ऐलान किया है. इसका मतलब है कि अगर आप समय पर अपना कर्ज चुकाते हैं, तो आपको बहुत ही मामूली ब्याज देना होगा. यह सुविधा 3 लाख रुपये तक के फसल ऋण (Crop Loan), किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और खेती से जुड़े छोटे समय वाले कर्जों पर मिलेगी. सरकार का मकसद साफ है-किसान को साहूकारों के पास न जाना पड़े और वह सम्मान के साथ बैंक से पैसा लेकर अपनी खेती कर सके.
किसे मिलेगा फायदा और क्या है शर्त?
यह स्कीम उन सभी किसानों के लिए है जो वाणिज्यिक बैंकों, ग्रामीण बैंकों या सहकारी बैंकों से कर्ज लेते हैं. लेकिन सरकार ने एक छोटी और जरूरी शर्त रखी है–योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जो तय समय के भीतर अपना कर्ज बैंक को वापस लौटा देंगे. यह एक तरह का इनाम है उन किसानों के लिए जो अपनी लेन-देन को साफ-सुथरा रखते हैं. समय पर कर्ज भरने से न केवल ब्याज कम लगेगा, बल्कि अगली बार बैंक से और ज्यादा पैसा मिलने का रास्ता भी साफ हो जाएगा.
खेती में निवेश और उत्पादन को मिलेगी नई रफ्तार
जब ब्याज का बोझ कम होगा, तो किसान भाई खुलकर खेती में निवेश कर सकेंगे. मंत्री जी ने भरोसा दिलाया कि इस पैसे से किसान अब बढ़िया क्वालिटी के उन्नत बीज, अच्छी खाद, कीटनाशक और सिंचाई के नए साधन खरीद पाएंगे. इतना ही नहीं, जो किसान नई मशीनें या आधुनिक तकनीक अपनाना चाहते हैं, उनके लिए यह कम ब्याज वाला पैसा संजीवनी का काम करेगा. जब निवेश बढ़ेगा, तो फसल अच्छी होगी और जब फसल अच्छी होगी, तो किसान की आमदनी में अपने आप बढ़ोतरी होगी.
500 करोड़ का बजट और आत्मनिर्भर बिहार का सपना
इस योजना को चालू वित्तीय वर्ष (2025-26) में लागू करने के लिए बिहार सरकार ने 500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है. सरकार का मानना है कि इस पहल से बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी. कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि बिहार का किसान अब आत्मनिर्भर बनेगा. अब उसे बीज-खाद के लिए किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना होगा, बल्कि बैंक उसे एक पार्टनर की तरह सहयोग करेंगे. यह समझौता बिहार की कृषि को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा.