पहाड़ों में अब अंधेरे से नहीं लगेगा डर..जानवरों के खौफ को मिटाएंगी ये सोलर लाइटें, वन विभाग की बड़ी पहल

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में जंगली जानवरों के हमलों और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग ने कमर कस ली है. संवेदनशील ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर लाइटें लगाई जा रही हैं, ताकि रात के अंधेरे में गुलदार जैसे जानवरों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके. इस रोशनी से ग्रामीणों का आवागमन अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हो गया है.

नोएडा | Updated On: 15 Jan, 2026 | 08:55 PM

Uttarakhand News : उत्तराखंड के पहाड़ों में जब सूरज ढलता है, तो साथ ही एक अनजाना डर भी घर करने लगता है. चीड़ के जंगलों से आती सरसराहट और गलियों में पसरा सन्नाटा अक्सर किसी गुलदार की मौजूदगी का अहसास कराता है. लेकिन अब अल्मोड़ा के कई गांवों की रातें इतनी डरावनी नहीं होंगी. वन विभाग ने ठान लिया है कि वह इंसानों और जंगली जानवरों के बीच बढ़ते इस खूनी संघर्ष को रोशनी के जरिए मात देगा. अंधेरे का फायदा उठाकर बस्तियों की ओर कदम बढ़ाने वाले वन्यजीवों को रोकने के लिए अब गांव-गांव सोलर लाइटें जगमगा रही हैं. यह सिर्फ बिजली का खंभा नहीं, बल्कि उन बुजुर्गों और बच्चों के लिए सुरक्षा का एक कवच है, जो शाम होते ही घरों में कैद होने को मजबूर थे.

रोशनी की नई किरण

अल्मोड़ा सिविल सोयम वन प्रभाग ने मानव-वन्यजीव संघर्ष  को कम करने के लिए एक बड़ी मुहिम शुरू की है. इस सोलर लाइट परियोजना के तहत जागेश्वर, लमगड़ा, कनालीछीना और विन्सर रेंज के संवेदनशील इलाकों को चुना गया है. ये वो इलाके हैं जहां अक्सर गुलदार की दस्तक से ग्रामीणों की नींद  उड़ जाती थी. वन विभाग का लक्ष्य इन चारों रेंजों में कुल 150 सोलर लाइटें लगाने का है. राहत की बात यह है कि पहले चरण का काम तेजी से पूरा हो रहा है और अब तक 60 से ज्यादा लाइटें उन रास्तों पर लगा दी गई हैं, जहाँ सबसे ज्यादा खतरा महसूस किया जाता था.

गुलदार की दस्तक पर अब रहेगी तीसरी आंख की नजर

अंधेरा हमेशा से जंगली जानवरों का सबसे बड़ा हथियार रहा है. झाड़ियों में छिपा गुलदार कब और कहां से हमला कर दे, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होता था. लेकिन अब दुधिया रोशनी होने से न केवल ग्रामीणों को दूर से ही खतरा दिख जाएगा, बल्कि वन विभाग के लिए भी वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा. विभागीय अधिकारियों  का मानना है कि उजाला होने पर जंगली जानवर इंसानी बस्तियों की ओर आने से कतराते हैं. यह छोटी सी पहल न केवल लोगों की जान बचाएगी, बल्कि उन बेजुबान जानवरों को भी बस्तियों में आने से रोकेगी, जो अक्सर गलती से इंसानी इलाकों में घुस आते हैं.

अब रात की राहें नहीं होंगी मुश्किल

पहाड़ों में रात के समय आवाजाही करना किसी चुनौती से कम नहीं होता. मोड़ पर अचानक किसी जानवर का आ जाना या अंधेरे के कारण रास्ता न दिखना, बड़ी दुर्घटनाओं का सबब बनता है. सोलर लाइट लगने से अब गांव की पगडंडियों और सड़कों पर आवाजाही सुलभ हो गई है. स्थानीय लोग अब देर शाम को भी जरूरी काम से बाहर निकल पा रहे हैं. प्रकाश की यह व्यवस्था उन स्कूली बच्चों और कामकाजी लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर आई है, जिन्हें अंधेरा होने के डर से अपने काम बीच में ही छोड़कर घर भागना पड़ता था.

शासन के निर्देश पर बड़ा एक्शन

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार,  प्रभागीय वनाधिकारी प्रदीप धौलाखंडी ने कहा कि  यह पूरी कवायद शासन से प्राप्त उन सख्त निर्देशों का हिस्सा है, जिसमें मानवीय सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही गई है. उन्होंने बताया कि अंधेरे के कारण होने वाले संघर्षों को रोकने के लिए सोलर लाइट  एक प्रभावी और सस्ता समाधान है. जैसे-जैसे अन्य रेंजों में भी 150 लाइटों का कोटा पूरा होगा, ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा का स्तर और भी मजबूत हो जाएगा. वन विभाग की इस कोशिश ने ग्रामीणों के मन में प्रशासन के प्रति विश्वास जगाया है कि उनकी जान की कीमत सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है.

Published: 15 Jan, 2026 | 09:22 PM

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