Onion Latest Price: तमिलनाडु के पेरंबलूर जिले में इस बार अच्छी पैदावार होने के बावजूद छोटे प्याज (शलॉट) किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. बाजार में आपूर्ति ज्यादा होने से दाम गिरकर 10 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जबकि पिछले साल इसी समय किसानों को 30 से 40 रुपये प्रति किलो तक भाव मिला था. किसानों का कहना है कि वे या तो फसल को दाम बढ़ने की उम्मीद में भंडारण करें या फिर बेहद कम कीमत पर बेचने को मजबूर हों. किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि उनकी फसल की सीधे खरीद की व्यवस्था की जाए. उन्होंने कहा कि इस शलॉट को पिछले साल ही भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिला है.
आमतौर पर जिले में साल में तीन बार छोटे प्याज की खेती होती है. सितंबर से शुरू हुए मौजूदा सीजन में करीब 5,000 हेक्टेयर में खेती की गई है और इस समय कटाई अपने चरम पर है. किसानों के अनुसार, इस बार प्रति एकड़ करीब 100 बोरी (प्रत्येक 50 किलो) उपज मिल रही है. हालांकि यह पैदावार पिछले साल के मुकाबले ज्यादा है, लेकिन इसी वजह से बाजार में आवक बढ़ गई है. गुणवत्ता के अनुसार इस समय बाजार में छोटे प्याज का भाव 10 से 28 रुपये प्रति किलो के बीच चल रहा है, जबकि पिछले साल किसानों को 30 से 40 रुपये प्रति किलो तक कीमत मिली थी.
किसानों को हो रहा भारी नुकसान
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, किसान पी. अजित ने कहा कि हर सीजन में शलॉट (छोटे प्याज) के दाम बदल जाते हैं और जिले में कोई मजबूत मार्केटिंग व्यवस्था नहीं है. अडैक्कमपट्टी के इस किसान ने कहा कि कई सालों से हमें लागत भी नहीं निकल पाती. इस साल मेरी दो एकड़ जमीन में पैदावार अच्छी हुई, लेकिन दाम बहुत कम मिल रहे हैं. व्यापारी हमसे बेहद सस्ते में प्याज खरीदते हैं और बाजार में 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक बेचते हैं. हमें उम्मीद थी कि GI टैग और सरकारी मदद से हालात सुधरेंगे, लेकिन हमारी उम्मीदें टूट गई हैं.
क्या है किसानों की मांग
गौरतलब है कि पिछले साल की शुरुआत में अलाथूर और पेरंबलूर ब्लॉक के गांवों में उगाए जाने वाले चेट्टीकुलम छोटे प्याज को उसके स्वाद और गुणवत्ता के लिए GI टैग दिया गया था. किसानों को उम्मीद थी कि इससे फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय होगा या बेहतर मार्केटिंग व्यवस्था बनेगी. नट्टारमंगलम के किसान एस. नेहरू ने कहा कि मैंने प्रति एकड़ 60 से 70 हजार रुपये खर्च किए हैं. मौजूदा दाम पर अगर अभी बिक्री करूं तो नुकसान तय है, क्योंकि लागत भी नहीं निकल पाएगी. इसलिए मुझे छोटे प्याज को दो से तीन महीने तक स्टोर करना पड़ रहा है. अगर तुरंत मदद नहीं मिली तो कई किसान इसकी खेती छोड़ सकते हैं.