Mandi Bhav: आलू के भाव में भारी गिरावट, 2180 से गिरकर 500 रुपये क्विंटल हुआ रेट.. किसानों को नुकसान

इस साल कुरुक्षेत्र में ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ (एमएफएमबी) पोर्टल पर 38,000 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में आलू की खेती दर्ज की गई है. जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 26,275 एकड़ था, यानी इस बार खेती का रकबा  काफी बढ़ा है.

Kisan India
नोएडा | Published: 18 Dec, 2025 | 01:46 PM

Potato Market Rate: हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में दिसंबर की शुरुआत में नए आलू के अच्छे रेट मिल रहे थे. लेकिन अब भाव में गिरावट शुरू हो गई है. इससे किसानों को नुकसान हो रहा है. हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि मंडियों में आवक बढ़ने और मांग स्थिर रहने के कारण कीमतों में गिरावट आ रही है. इस हफ्ते आलू के भाव 500 से 900 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहे. हालांकि, कुछ समय पहले तक किसानों को 1,300 से 2,180 रुपये प्रति क्विंटल तक दाम मिल रहे थे. लेकिन अब कीमतों में आई गिरावट से आलू किसान काफी निराश हैं.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल कुरुक्षेत्र में ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ (एमएफएमबी) पोर्टल पर 38,000 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में आलू की खेती दर्ज की गई है. जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 26,275 एकड़ था, यानी इस बार खेती का रकबा  काफी बढ़ा है. शाहाबाद अनाज मंडी में आलू बेचने के बाद किसान गौरव कुमार ने कहा कि इस बार का सीजन अब तक निराशाजनक रहा है. उन्होंने कहा कि लाल छिलके वाला आलू उन्हें 805 रुपये प्रति क्विंटल मिला, जबकि पिछले साल यही किस्म 1,800 से 1,900 रुपये प्रति क्विंटल बिकी थी. वहीं सफेद छिलके वाला आलू सिर्फ 615 रुपये प्रति क्विंटल में बिका. इसके अलावा इस साल पैदावार भी कम रही है.

क्या कहते हैं किसान नेता

आलू किसान और भारतीय किसान यूनियन (चरुनी) के प्रवक्ता राकेश बैन्स ने कहा कि हर साल लागत बढ़ने और आलू के दाम स्थिर न होने की वजह से किसानों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने सरकार से मांग की है कि भावांतर भरपाई योजना  के तहत सुरक्षित मूल्य को प्रति क्विंटल 600 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 900 रुपये किया जाए, ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके.

सोमवार को क्या था आलू का रेट

पिपली अनाज मंडी के आलू व्यापारी धर्मपाल माथाना ने कहा कि पिपली मंडी आलू उत्पाद  का प्रमुख बाजार है. सोमवार को लाल छिलके वाला आलू 700 से 900 रुपये प्रति क्विंटल और सफेद छिलके वाला आलू 500 से 625 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा था, जो गुणवत्ता पर निर्भर करता है. बढ़ी हुई आवक के कारण कीमतें धीरे-धीरे गिर रही हैं. उन्होंने कहा कि मांग स्थिर और स्टॉक पर्याप्त होने के कारण दाम जल्द नहीं बढ़ेंगे और जनवरी में कीमतों में और गिरावट की संभावना है.

मंडी में आलू की आवक

पिपली मंडी के सचिव गुरमीत सिंह ने कहा कि अब तक मंडी में 4.80 लाख क्विंटल आलू का स्टॉक  आया है, जबकि पिछले साल इसी समय 2.21 लाख क्विंटल ही आया था. जिन किसानों ने गेहूं और अन्य फसलें उगाई थीं, उन्होंने अब अपनी फसल काट ली है. उन्होंने कहा कि ताजा आवक में पिछले कुछ दिनों में गिरावट देखी गई है, लेकिन जनवरी 15 के आसपास परिपक्व किस्म का आलू फिर से आने लगेगा. पिछले साल इसी समय मंडी में लगभग 11.85 लाख क्विंटल आलू आया था.

आलू का रकबा बढ़ गया

कुरुक्षेत्र जिले के जिला बागवानी अधिकारी डॉ. शिवेंदु प्रताप सिंह ने कहा कि जिले में आलू की खेती बढ़ी है, क्योंकि कई किसानों ने इसे अतिरिक्त फसल के रूप में अपनाया है. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे अपनी फसल को ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर दर्ज करवाएं, ताकि भावांतर भरपाई योजना का लाभ मिल सके.

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