MSP से कम कीमत पर कपास बेचने को मजबूर हुए किसान, 3000 रुपये क्विंटल हुआ रेट

इस बार सीसीआई द्वारा ज्यादा खरीद न होने की वजह से ज्यादातर कपास की खरीदी निजी व्यापारियों ने की. पंजाब में इस साल 1.19 लाख हेक्टेयर में कपास बोया गया था, लेकिन कुछ इलाकों में बाढ़ से फसल को नुकसान  पहुंचा. पिछले साल 99,700 हेक्टेयर में कपास का रकबा था.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 3 Dec, 2025 | 03:28 PM

Cotton Mandi Rate: पंजाब के कपास किसानों को इस बार मंडियों में उचित रेट नहीं मिल रहा है. वे न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP से कम कीमत पर उपज बेचने को मजबूर हो गए हैं. उससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. कहा जा रहा है कि पंजाब की अनाज मंडियों में इस साल करीब 61 फीसदी कपास की एमएसपी से कम दाम पर बिक्री हुई. कई किसानों को तो सिर्फ 3,000 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव मिला. जबकि पंजाब में उगाई जाने वाली कपास का एमएसपी 8,010 रुपये प्रति क्विंटल है.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल 1 अक्टूबर से कपास खरीद सीजन  शुरू होता है. इस बार राज्य में कपास की आवक भी घट गई. पिछले साल के 5.4 लाख क्विंटल से गिरकर सिर्फ 2.3 लाख क्विंटल रह गई. इसमें से 35,348 क्विंटल सीसीआई ने खरीदी की और 1.95 लाख क्विंटल निजी व्यापारियों ने. कुल मिलाकर 1.4 लाख क्विंटल कपास एमएसपी से कम दाम पर बिका. इस बार कपास का अधिकतम भाव 7,860 रुपये प्रति क्विंटल और न्यूनतम सिर्फ 3,000 रुपये प्रति क्विंटल रहा.

99,700 हेक्टेयर में कपास उगाई गई

इस बार सीसीआई द्वारा ज्यादा खरीद न होने की वजह से ज्यादातर कपास की खरीदी निजी व्यापारियों ने की. पंजाब में इस साल 1.19 लाख हेक्टेयर में कपास बोया गया था, लेकिन कुछ इलाकों में बाढ़ से फसल को नुकसान  पहुंचा. पिछले साल 99,700 हेक्टेयर में कपास उगाया गया था. करीब दस साल पहले तक, खासकर दक्षिणी मालवा में कपास को पानी-बहुल धान का बेहतर विकल्प माना जाता था और इसे ‘सफेद सोना’ भी कहा जाता था.

कपास की खेती से किसानों ने बनाई दूरी

2015 में कपास पर आए बड़े सफेद मक्खी (whitefly) हमले के बाद पंजाब में कपास की खेती  का आकर्षण कम होने लगा और रकबा घटकर लगभग 1 लाख हेक्टेयर तक रह गया. 2025-26 सीजन से सीसीआई ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ‘कपास किसान ऐप’ शुरू किया और इसे कपास खरीद के लिए अनिवार्य बना दिया. शुरुआत में कई किसान आधार-आधारित इस ऐप पर रजिस्ट्रेशन नहीं कर पाए, जिसके कारण सीजन के शुरुआती दिनों में सीसीआई ने खरीद से दूरी बनाए रखी.

मोबाइल से खुद करें रजिस्ट्रेशन

दरअसल, किसानों को अपनी जमीन के कागज और कपास बोए गए क्षेत्र के प्रमाणित रिकॉर्ड ऐप पर अपलोड करने होते हैं. वे अपने मोबाइल से खुद भी रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. सीसीआई ने सभी एपीएमसीज को इस नई डिजिटल प्रक्रिया के बारे में पहले ही सूचना दे दी थी. सीसीआई के अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि वे उन्हीं किसानों से कपास खरीद रहे हैं जिनका ऐप पर रजिस्ट्रेशन पूरा है, जिनकी जानकारी राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा जांची और सही पाई गई है और जिनकी कपास का नमी स्तर तय सीमा के भीतर है.

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Published: 3 Dec, 2025 | 03:22 PM

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