Onion Mandi Rate: महाराष्ट्र के नासिक जिला स्थित देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव एपीएमसी में प्याज के थोक दाम अब स्थिर हो गए हैं. मंडी अधिकारियों के अनुसार, अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज का थोक भाव फिलहाल 2,700 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य गुणवत्ता वाले प्याज का भाव 2,200 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है. अप्रैल महीने में स्थिति इसके बिल्कुल उलट थी. उस समय अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज का थोक भाव करीब 1,500 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि सामान्य गुणवत्ता वाले प्याज की कीमत 1,000 रुपये प्रति क्विंटल से भी नीचे चली गई थी. कम कीमत मिलने के कारण प्याज किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था. अब कीमतों में सुधार और स्थिरता आने से किसानों को कुछ राहत मिली है.
लासलगांव एपीएमसी के अधिकारियों के अनुसार, देशभर में नासिक के प्याज की मांग बढ़ने से किसानों को पहले के मुकाबले बेहतर थोक भाव मिल रहे हैं. वहीं, प्याज के निर्यात में भी धीरे-धीरे सुधार हो रहा है. फिलहाल मंडी में रोजाना करीब 12,000 क्विंटल प्याज की आवक हो रही है और मौजूदा कीमतें किसानों के लिए संतोषजनक मानी जा रही हैं. लासलगांव एपीएमसी के निदेशक प्रवीण कदम ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा कि अगर आने वाले समय में प्याज के निर्यात में तेजी आती है, तो थोक कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है. उन्होंने कहा कि अभी नासिक का प्याज विदेशों में भेजा जा रहा है, लेकिन निर्यात की रफ्तार धीमी है. जैसे-जैसे निर्यात बढ़ेगा, किसानों को और अच्छे दाम मिलने की उम्मीद है.
2,125 रुपये प्रति क्विंटल प्याज की सरकारी खरीद
इस बीच, केंद्र सरकार ने भी किसानों को राहत देते हुए प्याज के न्यूनतम सुनिश्चित खरीद मूल्य (MAPP) को 1,875 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है. इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर न्यूनतम मूल्य मिलने में मदद मिलेगी. केंद्र सरकार ने प्याज किसानों को अपनी उपज सरकारी एजेंसियों को बेचने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से न्यूनतम सुनिश्चित खरीद मूल्य (MAPP) को 1,875 रुपये से बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है. यह पहले के मुकाबले करीब 13 प्रतिशत अधिक है.
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2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ
अधिकारियों के अनुसार, बढ़ा हुआ खरीद मूल्य किसानों को बेहतर दाम दिलाने के साथ-साथ बाजार में प्याज की कीमतों को स्थिर रखने में भी मदद करेगा. सरकार चाहती है कि किसान अपनी उपज नेफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) जैसी केंद्रीय एजेंसियों को बेचें. हालांकि, नासिक की मंडियों में इस समय किसानों को सरकारी खरीद मूल्य से भी ज्यादा भाव मिल रहे हैं. यही वजह है कि किसान अपनी फसल सरकारी एजेंसियों को बेचने के बजाय खुले बाजार में बेच रहे हैं. इससे नेफेड और एनसीसीएफ अब तक नासिक के किसानों से 2 लाख मीट्रिक टन प्याज खरीदने का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाए हैं.
क्या बोले भारत दिघोले
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भारत दिघोले का कहना है कि नेफेड और एनसीसीएफ के लिए नासिक के किसानों से 2 लाख मीट्रिक टन प्याज खरीदने का लक्ष्य पूरा करना मुश्किल होगा. उन्होंने कहा कि जब किसानों को मंडियों में सरकारी खरीद मूल्य से ज्यादा दाम मिल रहे हैं, तो वे अपनी उपज सरकारी एजेंसियों को क्यों बेचेंगे? यही वजह है कि नेफेड और एनसीसीएफ को कम कीमत पर प्याज खरीदने में काफी परेशानी हो रही है. दिघोले के अनुसार, जब तक खुले बाजार में किसानों को बेहतर भाव मिलता रहेगा, तब तक सरकारी एजेंसियों के लिए तय लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं होगा.