Iran India Trade Impact: अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई की मौत हो गई है. इससे पहले ईरान की जवाबी कार्रवाई से खाड़ी देशों में अफरातफरी मची हुई है. अब वैश्विक स्तर पर व्यापारिक फैसले नाजुक मोड़ पर हैं. भारत ईरान को बासमती चावल, चाय, रेशम समेत कई तरह के उत्पाद बेचता है. जबकि, सूखे मेवे, कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद करता है. मौजूदा बिगड़े हालातों ने भारत-ईरान के व्यापारिक गठजोड़ को हिला दिया है. एक्सपर्ट ने चिंता जताई है कि ईरान से भारत आने वाली वस्तुओं में देरी की वजह से कीमतों में उछाल आ सकता है. क्योंकि, ईरान से समुद्री व्यापारिक रास्ते होरमुज को बंद कर दिया है. वहीं, ईरान-इजराइल के बीच लंबे समय से चल रही लड़ाई की वजह से जनवरी से लगभग 2 हजार करोड़ की बासमती चावल खेप ईरान के बंदरगाह पर अटकी हुई है.
भारतीय दलहन और अनाज संघ (IPGA) के सेक्रेटरी सतीश उपाध्याय ने कहा कि ईरानी सुप्रीम लीडर की अमेरिकी हमले में मौत के बाद भारत समेत दुनियाभर के लिए व्यापारिक गतिविधियों पर संकट के बादल गहरा गए हैं. सतीश उपाध्याय ने ‘किसान इंडिया’ को बताया कि ईरान ने सबसे बड़ा समुद्री व्यापारिक रास्ते होरमुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है. इससे भारत समेत अन्य देशों को जाने वाले उत्पादों से भरे शिप बंदरगाह पर अटक गए हैं. इससे शिपमेंट डिले होंगे और उनका फ्रेट रेट बढ़ेगा जो ट्रेडर्स के लिए मुसीबत बनेगा और कीमतों में उछाल का कारण भी.
रेवेन्यू कम होने और पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढ़ने की चिंता
IPGA सेक्रेटरी ने कहा कि खाद्यान्न वस्तुओं में सूखे मेवे समेत क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम पदार्थ भारत ईरान से मंगाता है. उन्होंने सूत्रों के हवाले से कहा कि भारत के पास क्रूड ऑयल का लगभग 70 दिन स्टॉक मौजूद है. ऐसे में अगर समुद्री व्यापारिक रास्ता जल्दी नहीं खुलता है तो क्रूड प्राइसेस बढ़ जाएंगे. क्योंकि, अन्य खाड़ी देशों जैसे कतर व अन्य पर ईरान ने मिसाइल हमले किए हैं, जिसकी वजह से गतिविधियां थम गई हैं. वहीं, खाड़ी देशों को भारत की ओर से निर्यात किए जाने वाले खाद्य उत्पादों की गति धीमी होगी. इसका सबसे बड़ा असर देश के एक्सपोर्ट रेवेन्यू पर पड़ेगा और जितना रेमिटेंस बाहर से आना चाहिए वो घट जाएगा.
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बीपीएन फिनकैप के डायरेक्टर एके निगम ने बताया कि ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों से ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में एक बड़ा रिस्क ऑफ रिएक्शन शुरू हो गया है. जब हमलों की पुष्टि हुई तो US और यूरोप में स्टॉक एक्सचेंज वीकेंड के लिए बंद थे, लेकिन कमोडिटीज, 24/7 ट्रेडिंग एसेट्स और सोमवार को मार्केट खुलने की तैयारी के माहौल में तुरंत असर देखा गया.
उन्होंने कहा कि क्रूड ऑयल में उछाल के संकेत मिल रहे हैं. हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें $2.00 से ज्यादा बढ़कर $72.87 प्रति बैरल पर पहुंच गईं, क्योंकि इन्वेस्टर्स को होरमुज स्ट्रेट में रुकावट का डर है, जो ग्लोबल ऑयल के लगभग 20 फीसदी के लिए एक ट्रांजिट पॉइंट है. उन्होंने कहा कि अगर होरमुज का रास्ता नहीं खुला और टकराव लंबे युद्ध में बदल जाता है तो क्रूड कीमतें $90–$110 तक बढ़ सकती हैं. यह स्थिति भारत में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में उछाल का कारण बन सकती है.
ईरान से चावल व्यापार पर अनिश्चितता के बादल
भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है. हर साल भारत से 160 से ज्यादा देशों में चावल जाता है. बासमती चावल के लिए ईरान अहम बाजार है. कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के आंकड़ों के अनुसार ईरान भारतीय बासमती चावल का तीसरा सबसे बड़ा इंपोर्टर है, भारत ने ईरान को लगभग 6,374 करोड़ रुपये का बासमती चावल एक्सपोर्ट किया, जो फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में कुल एक्सपोर्ट का लगभग 12.6 परसेंट था. ईरान ज्यादातर भारत से बासमती चावल इंपोर्ट करता है. वहीं, 2025-26 के आंकड़े मार्च के बाद जारी होने वाले हैं और उम्मीद जताई गई है कि अनुमानित बासमती निर्यात कारोबार 4 हजार करोड़ के करीब रहने वाला है. लेकिन, मौजूदा तनाव के हालातों ने अनिश्चितता पैदा कर दी है.
2000 करोड़ के बासमती चावल खेप अटकी!
जनवरी महीने में ईरान की मुद्रा रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई थी. इससे सरकार पर आर्थिक दबाव बढ़ गया. तब ईरानी सरकार ने आयात पर सब्सिडी एक्सचेंज रेट बंद कर दिया. इस फैसले के बाद आयातित खाद्य वस्तुएं महंगी हो गईं. नीति बदलते ही भारतीय निर्यातकों ने नई शिपमेंट रोक दी, लेकिन जो माल पहले ही भेजा जा चुका था, वह बंदरगाहों पर फंस गया. लगभग 2000 करोड़ रुपये मूल्य का बासमती चावल ईरान से क्लियरेंस का इंतजार कर रहा है. नई व्यवस्था में आयातकों को पूरा टैक्स और शुल्क चुकाना होगा, जिससे लागत बहुत बढ़ रही है. ऐसे में ईरानी खरीदार भी पीछे हट रहे हैं और सौदे अटके हुए हैं.
भारतीय चावल निर्यातक संघ (IREF) की शिकायतों के बाद APEDA ने चावल एक्सपोर्टर्स से बैठक कर हल निकालने की बात उस वक्त कही थी. इजराइल-अमेरिकी हमले के बाद बढ़े तनाव से ईरान को एक्सपोर्ट होने वाली वस्तुओं पर इंश्योरेंस मुश्किल हो गया है क्योंकि इंश्योरेंस कंपनियां युद्ध के कारण हुए नुकसान को कवर नहीं करती हैं. ऐसे में APEDA के चेयरमैन अभिषेक देव ने एक्सपोर्टर्स को तनाव पर नजर रखने के साथ भरोसा दिलाया कि इंश्योरेंस से जुड़े मुद्दे को संबंधित एजेंसियों के सामने उठाकर हल निकाला जाएगा.
सूखा मेवा कारोबार पर गहराया संकट
सूखे मेवों के क्षेत्र में हालात उतने सहज नहीं हैं. ईरान से पिस्ता, खजूर, केसर, किशमिश और बादाम जैसे उत्पादों के आयात पर अनिश्चितता गहरा गई है. पहले ही ईरान के अंदर बढ़ती महंगाई, विरोध प्रदर्शन और आर्थिक अस्थिरता के चलते वहां के निर्यातक समय पर भुगतान करने में असमर्थ थे. अब हालात और खराब होते दिख रहे हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि भुगतान में देरी और बैंकिंग चैनलों की रुकावट के चलते नए सौदे करने में हिचकिचाहट बढ़ गई है. लंबी अवधि के अनुबंध फिलहाल जोखिम भरे माने जा रहे हैं.
14 हजार टन इलायची के सौदे खटाई में
जानकारों का कहना है कि ईरान भारत और ग्वाटेमाला समेत कई देशों से इलायची खरीदता है. इलायची उत्पादक और निर्यातक ग्वाटेमाला में इस सीजन मौसम की बेरूखी के चलते फसल कमजोर होने से भारत के निर्यात का रास्ता साफ हुआ है और अनुमान है कि 2026 के सीजन में लगभग 14,000 टन इलायची का निर्यात हो सकता है, जो सामान्य औसत से करीब दोगुना है. इसमें से बड़ी खेप ईरान जाने वाली है. बता दें कि 26 से 30 जनवरी 2026 तक चले गल्फ फूड एक्सपो में भारतीय कंपनियों को इलायची के बड़े ऑर्डर मिले हैं. इसमें ईरान के अलावा सऊदी अरब, कुवैत और यूएई जैसे खाड़ी देशों से ऑर्डर मिले हैं. लेकिन, ईरान के साथ अब ये सभी देश युद्ध की स्थितियों के चलते व्यापारिक गतिविधियां अटक गई हैं. ऐसे में ट्रेडर्स को जनवरी के आखिर में हुए खरीद समझौते खटाई में पड़ने की चिंता सता रही है.