गुजरात और राजस्थान के तरबूज किसानों ने सरकार से आयात प्रतिबंधों में ढील नहीं देने की अपील की है. किसानों को डर है कि विदेश से तरबूज की खेप आने पर घरेलू बाजार में फसल की आवक बढ़ने के समय कीमतों में गिरावट आ सकती है. इस साल मॉनसून में देरी के कारण ग्वार, बाजरा और मूंग की खेती करने वाले कई किसानों ने तरबूज को मुख्य फसल के तौर पर अपनाया है. ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान का भय सता रहा है.
दरअसल, राजस्थान और गुजरात समेत कई राज्यों में तरबूज की खेती दूसरी फसलों के साथ इंटरक्रॉप के तौर पर की जाती है. इस साल मॉनसून की देरी के कारण किसानों ने पारंपरिक फसलों ग्वार, बाजरा और मूंग की जगह तरबूज की खेती को मुख्य फसल के तौर पर अपनाने पर भी विचार किया है. गुजरात के भावनगर के एक किसान के मुताबिक, आयात प्रतिबंधों में ढील दिए जाने की खबरों के बीच तरबूज के बीज की कीमत करीब 245 रुपये से घटकर 170 रुपये प्रति किलो रह गई है. किसानों को सबसे ज्यादा चिंता अगस्त के मध्य में आयात खोलने की संभावना को लेकर है. उनका कहना है कि अगर अगस्त के बीच आयात की अनुमति दी जाती है तो विदेश से आने वाली खेप सितंबर से नवंबर के बीच भारतीय बाजार में पहुंच सकती है. इसी अवधि में घरेलू तरबूज की आवक भी शुरू होने की उम्मीद है.
घरेलू उत्पादन एक साथ बाजार में आने से आपूर्ति बढ़ेगी
किसानों का कहना है कि विदेशी तरबूज की खेप और घरेलू उत्पादन एक साथ बाजार में आने से आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है. इसलिए उन्होंने सरकार से व्यापारियों के दबाव में आकर आयात प्रतिबंधों में ढील नहीं देने की अपील की है. राजस्थान में किसान अब बड़े पैमाने पर तरबूज की खेती की तैयारी कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि तरबूज के बीज की कीमत में सुधार होने और मांग बढ़ने से खेती को बढ़ावा मिला है. हालांकि, उन्हें डर है कि घरेलू फसल बाजार में आने के समय अगर सस्ते आयात की अनुमति दी गई तो कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.
तरबूज के बीज की कीमत में बढ़ोतरी
भारतीय किसान संघ, राजस्थान के प्रदेश महासचिव तुलछाराम सिनवर ने बिजनेसलाइन को कहा कि तरबूज के बीज की कीमत पहले करीब 70 रुपये प्रति किलो तक गिर गई थी. अब यह बढ़कर करीब 200 रुपये प्रति किलो हो गई है. उन्होंने कहा कि मांग में सुधार और सस्ते आयात पर सरकार के कदमों से कीमतों को सहारा मिला है. सिनवर के मुताबिक, किसान अब बड़े स्तर पर तरबूज की खेती कर रहे हैं. ऐसे में घरेलू उत्पादन बाजार में आने से ठीक पहले आयात खोलना किसानों के हित में नहीं होगा.
हर साल 70,000 टन तरबूज के बीज की जरूरत
किसान संगठन तरबूज के घरेलू बीज उत्पादन को बढ़ाने और इसकी उपलब्धता बेहतर करने के लिए जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. सिनवर के अनुसार, भारत में हर साल करीब 60,000-70,000 टन तरबूज के बीज की जरूरत होती है. फिलहाल देश में मांग के मुकाबले करीब 10-15 फीसदी बीज की कमी है. किसानों और संगठनों का जोर अब घरेलू स्तर पर बीज उत्पादन बढ़ाने पर है.
सितंबर से बाजार में आएगी फसल
तरबूज की बुवाई आमतौर पर जून से अगस्त के बीच होती है. इसकी फसल सितंबर की शुरुआत से बाजार में पहुंचनी शुरू हो जाती है. राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक के किसानों ने इस साल तरबूज का रकबा बढ़ाया है. किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया था कि देश में पर्याप्त मात्रा में पैदा होने वाली कृषि उपज को विदेशी प्रतिस्पर्धा के सामने नहीं रखा जाएगा. इसी भरोसे के बाद कई किसानों ने तरबूज की खेती बढ़ाई है. हालांकि, सरकार ने अभी तक तरबूज के बीज के आयात में किसी तरह की ढील की आधिकारिक घोषणा नहीं की है. इसके बावजूद आयात प्रतिबंधों में संभावित ढील की खबरों का असर बाजार पर दिखने लगा है.
भारतीय किसान संघ की सरकार से मांग
भारतीय किसान संघ, राजस्थान के प्रदेश महासचिव तुलछाराम सिनवर ने कहा कि इस समय नया आयात कोटा जारी किया गया तो सितंबर से घरेलू फसल की आवक शुरू होने पर किसानों को भारी नुकसान हो सकता है. इससे तरबूज की कीमतों में अचानक गिरावट आने का खतरा है. उन्होंने केंद्र सरकार से घरेलू तरबूज बीज उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लंबी अवधि की नीति बनाने और किसानों को स्थिर कीमत दिलाने की मांग की.