होली से पहले किसानों को बड़ी राहत, MSP पर 12 लाख टन आलू खरीदेगी सरकार.. इतनी होगी कीमत

इस बार राज्य में 110 से 120 लाख टन आलू उत्पादन होने की संभावना है. आलू की खुदाई मार्च की शुरुआत से शुरू हो जाएगी. आम तौर पर जब उत्पादन 90 लाख टन से ज्यादा हो जाता है, तो बाजार में कीमतें बहुत गिर जाती हैं. इस बार भी अंदेशा है कि आलू का दाम 5 रुपये प्रति किलो तक आ सकता है, जबकि किसानों की लागत लगभग 6.50 रुपये प्रति किलो पड़ती है.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 27 Feb, 2026 | 12:01 PM

Potato Procurement: होली से पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने आलू किसानों को बहुत बड़ी राहत दी है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कैबिनेट ने फैसला लिया कि राज्य सरकार किसानों से सीधे 9.50 रुपये प्रति किलो की दर से आलू खरीदेगी. सरकार को उम्मीद है कि उसके इस फैसले से किसानों को अचित रेट मिल पाएगा. ऐसे में किसानों की अच्छी कमाई होगी. ऐस भी इस साल अच्छी सर्दी पड़ने के चलते पश्चिम बंगाल में बंपर पैदावार की संभावना है. इसलिए सरकार ने यह कदम उठाया है ताकि किसानों को नुकसान न हो.

खास बात यह है कि राज्य सरकार किसानों से कुल 12 लाख टन आलू खरीदेगी. हर किसान अधिकतम 35 क्विंटल आलू सरकार को बेच सकेगा. पंचायत मंत्री और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कृषि सलाहकार प्रदीप मजूमदार ने कहा कि सरकार चाहती है कि ज्यादा उत्पादन की वजह से छोटे और सीमांत किसानों को मजबूरी में कम दाम पर आलू न बेचना पड़े. अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला इस बात का संकेत है कि मुख्यमंत्री विधानसभा चुनाव से पहले आलू किसानों की आय  को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहतीं. पहले भी जब आलू की फसल ज्यादा हुई है, तब लाखों छोटे किसानों को मजबूरी में कम दाम पर अपनी उपज बेचनी पड़ी थी.

20 लाख टन आलू उत्पादन होने की संभावना

कृषि विभाग के मुताबिक, इस बार राज्य में 110 से 120 लाख टन आलू उत्पादन होने की संभावना है. आलू की खुदाई  मार्च की शुरुआत से शुरू हो जाएगी. आम तौर पर जब उत्पादन 90 लाख टन से ज्यादा हो जाता है, तो बाजार में कीमतें बहुत गिर जाती हैं. इस बार भी अंदेशा है कि आलू का दाम 5 रुपये प्रति किलो तक आ सकता है, जबकि किसानों की लागत लगभग 6.50 रुपये प्रति किलो पड़ती है.

छोटे किसानों को मिलेगी बड़ी राहत

एक अधिकारी ने कहा कि ज्यादातर किसानों के लिए आलू को कोल्ड स्टोरेज में रखकर बाद में बेच पाना आसान नहीं होता. आलू एक नकदी फसल है. छोटे किसान अक्सर इसकी खेती के लिए स्थानीय साहूकारों से कर्ज लेते हैं. कर्ज चुकाने के लिए उन्हें तुरंत फसल बेचनी पड़ती है. साथ ही, जो पैसा मिलता है, उसे वे बोरों सीजन की खेती में लगा देते हैं. इसलिए जब आलू की पैदावार ज्यादा होती है और दाम गिरने लगते हैं, तब सरकार का दखल जरूरी हो जाता है.

इन दो राजों में भी आलू की बंपर पैदावार हुई है

मंत्री मजूमदार ने कहा कि यह फैसला बंगाल के किसानों के लिए फायदेमंद होगा, क्योंकि जिन राज्यों में जल्दी पकने वाली आलू की फसल कट चुकी है, वहां पहले से ही कीमतें कम हैं. पूरी सर्दी मौसम अनुकूल रहने के कारण पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे दूसरे आलू उत्पादक राज्यों में भी बंपर पैदावार हुई है. ऐसे में बाजार में आपूर्ति  बढ़ने से दाम गिरने की आशंका है, इसलिए राज्य सरकार का यह कदम किसानों को राहत देने वाला माना जा रहा है.

मंत्री प्रदीप मजूमदार ने कहा कि यह छठी बार है जब राज्य सरकार किसानों से सीधे आलू की खरीद करेगी. मंत्री ने कहा कि जब भी किसान मुश्किल में होते हैं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दखल देकर उनकी फसल के लिए समर्थन मूल्य तय करती हैं. उन्होंने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि यह फैसला सिर्फ चुनाव नजदीक होने की वजह से लिया गया है.

क्या कहते हैं अधिकारी

एक अधिकारी ने कहा कि हुगली, पूर्व बर्दवान, बीरभूम और पश्चिम मेदिनीपुर जैसे जिलों में आलू किसान चुनावी जीत में अहम भूमिका निभाते हैं. बंगाल में कोई भी सत्तारूढ़ दल ऐसा नहीं चाहेगा कि चुनाव के समय लाखों आलू किसान नाराज हों. पहले वाम मोर्चा सरकार ने भी चुनाव से पहले किसानों से आलू खरीदा था. तृणमूल कांग्रेस की सरकार भी उसी तरह का कदम उठा रही है. वहीं, प्रशासन के कई लोगों का मानना है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में हुगली और पूर्व बर्दवान जिलों में तृणमूल कांग्रेस को बड़ी जीत इसलिए मिली क्योंकि चुनाव से पहले सरकार ने करीब 14 लाख टन आलू खरीदा था.

 

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Published: 27 Feb, 2026 | 11:53 AM

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