स्ट्रॉबेरी की खेती में अपनाएं देसी जुगाड़, लागत होगी कम और उत्पादन बढ़ाकर किसान बनेंगे मालामाल

स्ट्रॉबेरी की खेती में सड़न और लागत बड़ी समस्या होती है, लेकिन एक आसान देसी उपाय से समाधान संभव है. ऑर्गेनिक मल्च अपनाकर किसान खर्च घटा सकते हैं और उत्पादन बढ़ा सकते हैं. यह तरीका फसल की गुणवत्ता सुधारता है और बाजार में बेहतर दाम दिलाने में मदद करता है.

नोएडा | Published: 1 Jan, 2026 | 02:15 PM

Strawberry Farming : अगर आप स्ट्रॉबेरी की खेती करते हैं या इसकी शुरुआत करने की सोच रहे हैं, तो यह देसी तरीका आपकी कमाई बढ़ा सकता है. अक्सर किसान स्ट्रॉबेरी की सड़न और खराब गुणवत्ता से परेशान रहते हैं, लेकिन एक छोटा सा जुगाड़ इस बड़ी समस्या का हल बन सकता है. खास बात यह है कि इस देसी उपाय से न सिर्फ लागत घटती है, बल्कि उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ते हैं.

स्ट्रॉबेरी की खेती में सड़न सबसे बड़ी परेशानी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, स्ट्रॉबेरी ऐसा फल है, जो मिट्टी के सीधे संपर्क में आते ही खराब होने लगता है. अगर फल जमीन को छू ले तो उसमें सड़न, फंगल संक्रमण  और दाग-धब्बों की समस्या बढ़ जाती है. इससे बाजार में कीमत कम मिलती है और किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. इसी वजह से स्ट्रॉबेरी की खेती  में यह जरूरी होता है कि फल मिट्टी से अलग रहे और साफ-सुथरा बना रहे.

क्या है मल्चिंग और क्यों है जरूरी

आसान भाषा में समझें तो मल्चिंग का मतलब है पौधों के चारों  ओर जमीन को किसी सामग्री से ढक देना. इससे फल सीधे मिट्टी के संपर्क में नहीं आते. स्ट्रॉबेरी की खेती में आमतौर पर प्लास्टिक मल्च का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन यह काफी महंगा होता है. छोटे और मध्यम किसानों के लिए यह खर्च बढ़ा देता है. ऐसे में मल्चिंग को छोड़ना समाधान नहीं है, बल्कि इसका सस्ता विकल्प अपनाना ज्यादा फायदेमंद है.

देसी जुगाड़: ऑर्गेनिक मल्च से होगा कम खर्च

प्लास्टिक मल्च की जगह किसान धान का पुआल, गेहूं का भूसा या सूखी घास जैसे ऑर्गेनिक मल्च का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह सामग्री आसानी से उपलब्ध होती है और लागत भी बहुत कम आती है. ऑर्गेनिक मल्च से जमीन की नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे सिंचाई की जरूरत कम हो जाती है. साथ ही खरपतवार यानी बेकार घास-फूस भी कम उगती है, जिससे पौधों को पूरा पोषण मिलता है.

बढ़ेगा उत्पादन, सुधरेगी मिट्टी की सेहत

ऑर्गेनिक मल्च का एक बड़ा फायदा यह भी है कि यह समय के साथ सड़कर मिट्टी में मिल जाता है. इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ता है और उर्वरता सुधरती है. मिट्टी का तापमान संतुलित रहता है, जड़ें मजबूत होती हैं और पौधों की बढ़वार बेहतर होती है. इसका सीधा असर स्ट्रॉबेरी के आकार, रंग और मिठास पर पड़ता है. अच्छी गुणवत्ता होने से बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं. स्ट्रॉबेरी की खेती  में ऑर्गेनिक मल्चिंग एक सस्ता, आसान और टिकाऊ देसी जुगाड़ है. इससे खेती का खर्च घटता है, उत्पादन बढ़ता है और किसान कम मेहनत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं. यही वजह है कि अब किसान इस देसी तरीके को तेजी से अपना रहे हैं.

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