Bihar Farming Plan: बिहार में खरीफ 2026-27 सीजन के लिए कृषि विभाग ने खेती का नया रोडमैप तैयार किया है. इस बार राज्य में सिर्फ धान और गेहूं पर ही फोकस नहीं रहेगा, बल्कि किसानों को कुल्थी दाल, सोयाबीन, मक्का और मोटे अनाजों की खेती के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा. कृषि विभाग ने राज्य में 300 हेक्टेयर में कुल्थी दाल और 700 हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती का लक्ष्य तय किया है. सरकार का मानना है कि इन फसलों से किसानों की लागत कम होगी और कम पानी में बेहतर उत्पादन मिलने से आमदनी भी बढ़ेगी.
कुल्थी दाल और सोयाबीन पर बढ़ा जोर
कृषि विभाग के अनुसार कुल्थी दाल और सोयाबीन की खेती को इस बार विशेष प्राथमिकता दी जा रही है. कुल्थी दाल को आयुर्वेद में बेहद लाभकारी माना जाता है. ये प्रोटीन, आयरन और फाइबर का अच्छा स्रोत है. साथ ही इसे किडनी की पथरी और वजन नियंत्रण में भी उपयोगी माना जाता है. वहीं सोयाबीन की बाजार में लगातार मांग बनी हुई है. इसमें लगभग 40 प्रतिशत प्रोटीन और 20 प्रतिशत तेल पाया जाता है. यही कारण है कि किसानों के लिए इसकी खेती मुनाफे का सौदा मानी जा रही है. कृषि विभाग का कहना है कि इन फसलों से किसानों को कम लागत में बेहतर लाभ मिल सकता है.
मक्के और मिलेट्स की खेती पर भी फोकस
राज्य सरकार इस बार मक्के और मोटे अनाजों यानी मिलेट्स की खेती को भी बढ़ावा देने जा रही है. कई जिलों में मक्के का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य तय किया गया है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार लगातार धान और गेहूं की खेती करने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो रही है. साथ ही भूजल स्तर पर भी असर पड़ रहा है. ऐसे में कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की तरफ किसानों को प्रेरित किया जा रहा है. सरकार का मानना है कि खेती के इस बदलाव से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी और किसानों को नई फसलों से अतिरिक्त आय भी मिलेगी.
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किसानों को दी गई जरूरी सलाह
कृषि विभाग ने किसानों को खेती शुरू करने से पहले कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है. विशेषज्ञों के मुताबिक बीजों की बुआई से पहले बीजोपचार जरूर करना चाहिए ताकि फसल बीमारियों और कीटों से सुरक्षित रह सके. इसके अलावा किसानों को जलवायु के अनुसार उन्नत बीजों का चयन करने की सलाह दी गई है. खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या हल्की चिकनी मिट्टी को बेहतर माना गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि सही तकनीक अपनाने से उत्पादन में बड़ा सुधार हो सकता है.
किसानों की आय बढ़ाने की तैयारी
कृषि विभाग का कहना है कि खेती के बदलते पैटर्न का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और खेती की लागत कम करना है. कम पानी में तैयार होने वाली फसलें किसानों के लिए भविष्य में ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती हैं. सरकार को उम्मीद है कि कुल्थी दाल, सोयाबीन, मक्का और मिलेट्स जैसी फसलों की खेती बढ़ने से राज्य में कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी. साथ ही किसानों को बाजार में बेहतर कीमत मिलने से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.