मॉनसून की शुरुआत के साथ ही मिर्च की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ने लगी है. बारिश के बाद बढ़ी नमी और उमस भरे मौसम में मिर्च की फसल पर लीफ कर्ल वायरस (पत्ता मरोड़ रोग) का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह वायरस मिर्च की फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. समय पर रोकथाम नहीं करने पर पूरी फसल खराब होने का खतरा रहता है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
लीफ कर्ल वायरस क्या है और कैसे पहचानें
कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, मिर्च का लीफ कर्ल वायरस एक खतरनाक वायरस जनित बीमारी है, जिसे कई जगहों पर चुरड़ा-मुरड़ा या मुरोड़िया रोग के नाम से भी जाना जाता है. इस बीमारी में मिर्च के पौधों की नई पत्तियां मुड़ने लगती हैं और उनका विकास रुक जाता है. संक्रमित पौधों की पत्तियां छोटी, मोटी और खुरदरी हो जाती हैं. पत्तियों की नसें पीली दिखाई देने लगती हैं और पौधे की बढ़वार रुक जाती है. धीरे-धीरे पौधा कमजोर होकर झाड़ीनुमा आकार लेने लगता है.
सफेद मक्खी से तेजी से फैलता है वायरस
प्रमोद कुमार ने बताया कि यह वायरस हवा, पानी या बीज के जरिए सीधे नहीं फैलता है. इसके फैलाव में सफेद मक्खी (Whitefly) मुख्य भूमिका निभाती है. जब सफेद मक्खी किसी संक्रमित पौधे का रस चूसती है, तो वायरस उसके शरीर में पहुंच जाता है. इसके बाद वही मक्खी जब स्वस्थ पौधे पर बैठकर रस चूसती है, तो वायरस दूसरे पौधे तक पहुंच जाता है. मॉनसून के दौरान गर्म और नमी वाला मौसम सफेद मक्खी के प्रजनन के लिए अनुकूल होता है, जिससे बीमारी तेजी से फैल सकती है.
संक्रमण बढ़ने पर 80 से 100 प्रतिशत तक नुकसान
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अगर मिर्च की फसल में यह बीमारी शुरुआती अवस्था में फैल जाए तो किसानों को 80 से 100 प्रतिशत तक नुकसान झेलना पड़ सकता है. संक्रमित पौधों में फूल आना कम हो जाता है और फल भी छोटे, मुड़े हुए और खराब गुणवत्ता वाले निकलते हैं. ऐसी मिर्च की बाजार में मांग कम हो जाती है, जिससे किसानों की लागत तक निकलना मुश्किल हो सकता है. इसलिए शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही किसानों को तुरंत कदम उठाने की जरूरत है.
रोकथाम के लिए अपनाएं ये आसान उपाय
प्रमोद कुमार के अनुसार, इस बीमारी से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि खेत की नियमित निगरानी की जाए. संक्रमित पौधों को तुरंत उखाड़कर खेत से बाहर नष्ट कर देना चाहिए, ताकि वायरस आगे न फैल सके. सफेद मक्खी पर नियंत्रण के लिए प्रति एकड़ लगभग 10 पीले चिपचिपे जाल (Yellow Sticky Traps) लगाने की सलाह दी जाती है. शुरुआती संक्रमण में नीम तेल का छिड़काव लाभकारी हो सकता है. अधिक प्रकोप होने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से इमिडाक्लोप्रिड 17.8 फीसदी SL या डायफेन्थियूरॉन 50 फीसदी WP जैसे कीटनाशकों का उपयोग किया जा सकता है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि मॉनसून के मौसम में मिर्च की फसल की लगातार निगरानी करें और समय रहते बचाव के उपाय अपनाएं, ताकि उत्पादन और आय दोनों को सुरक्षित रखा जा सके.