किसान अकसर कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि वैज्ञानिकों से कम लागत में ज्यादा कमाई कराने वाली फसलों की जानकारी लेते देखे जाते हैं. हम यहां ऐसी एक घास के बारे में बता रहे हैं जिसे नींबू घास या लेमनग्रास कहा जाता है. यह घास नाम मात्र पानी और बिना खाद के उगाई जाती है और इसके निकाले जाने वाले तेल से लाखों रुपये की कमाई की जा सकती है. झारखंड, छत्तीसगढ़ समेत देश के कई हिस्सों में किसान लेमन ग्रास की खेती करके प्रति एकड़ 2 लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं. इस घास में औषधीय गुणों के चलते इसका इस्तेमाल कई तरह की बीमारियों को ठीक करने वाली दवाइयों में किया जाता है.
लेमनग्रास की खेती के बारे में बहुत किसानों को पता ही नहीं
सदियों से उपचार के लिए आयुर्वेद में औषधीय पौधों का इस्तेमाल होता आया है, लेकिन आज के समय में वैज्ञानिक नाम देकर पुराने औषधीय पौधों और घास को बाजार में बेचा जा रहा है. हम बात कर रहे हैं लेमन ग्रास की, जिसका उपयोग सेलिब्रिटीज से लेकर फिटनेस से जुड़े लोग भी कर रहे हैं. कुछ सालों में लेमन ग्रास का क्रेज लोगों के बीच बहुत बड़ा है, लेकिन सदियों पहले से हमारे आयुर्वेद में लेमन ग्रास का उपयोग होता आ रहा है. वर्तमान में लेमन ग्रास की खेती पढ़े लिखे किसान ही कर रहे हैं और सामान्य किसान अभी भी इसकी खेती से दूर हैं और पारंपरिक फसलों पर टिके हुए हैं. जबकि, कुछ किसानों को लेमनग्रास की खेती के बारे में जानकारी तक नहीं है.
कई तरह की बीमारियों को दूर करने में मददगार
छत्तीसगढ़ स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के सीईओ और रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी जेएसीएस राव (JACS Rao) ने कहा कि लेमन ग्रास एक औषधीय गुणों से भरपूर घास है, जिसका इस्तेमाल कई तरह की बीमारियों में किया जाता है. आयुर्वेद में लेमन ग्रास को ‘भूस्तृण’ कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल वात, पित्त और कफ दोषों को संतुलित करने में मदद करता है और जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द से भी राहत दिलाता है. लेमन ग्रास का स्वाद थोड़ा कड़वा और तीखा होता है, लेकिन इसकी तासीर ठंडी होती है. लेमन ग्रास का सेवन नसों को शांत करता है और तंत्रिका तंत्र को मजबूत करके मस्तिष्क और शरीर के संकेतों को मजबूत करता है.
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तनाव और अनिद्रा जैसी समस्याओं के लिए रामबाढ़ उपाय
लेमन ग्रास खांसी, बुखार, तपेदिक, कुष्ठ रोग, फाइलेरिया, मलेरिया, आंखों की सूजन, मसूड़ों की सूजन, निमोनिया और रक्त की अशुद्धि से जुड़े विकारों में भी काम आता है. लेमनग्रास का तेल पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है, मतली, मासिक धर्म संबंधी समस्याओं और सिरदर्द से राहत देता है. इसके अलावा लेमनग्रास का लेप अगर त्वचा संबंधी परेशानी में लगाया जाए तो यह दवा की तरह काम करता है. वहीं, तनाव, अनिद्रा या जल्दी भूल जाने जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए भी इसे रामबाण दवा बताया जाता है.
जूस या चाय के रूप में सेव करें
अब जानते हैं कि किन-किन तरीकों से लेमन ग्रास का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए रोजाना लेमन ग्रास का ताजा जूस पिया जा सकता है, जो शरीर को टॉक्सिन से मुक्त करने में मदद करेगा और शरीर को अनगिनत लाभ देगा. दूसरा, जूस की जगह इसकी चाय बनाकर भी पी जा सकती है. अगर आपको काम के बीच कैफीन की जरूरत पड़ती है तो कैफीन की जगह लेमन ग्रास टी का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह स्वाद और सेहत दोनों में बेहतर है. लेमनग्रास तेल का प्रयोग भी कर सकते हैं. नींद की परेशानी और तनाव को दूर करने के लिए लेमनग्रास का तेल सबसे अच्छा विकल्प है. इसे चेहरे पर या माथे पर हल्की मसाज के साथ लगा सकते हैं.

औषधीय पौधों की खेती करने वाली महिलाएं और तेल निकालने वाली मशीन.
लेमनग्रास से प्रति एकड़ मुनाफा ढाई लाख रुपये
छत्तीसगढ़ स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के सीईओ और रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी जेएसीएस राव (JACS Rao) ने किसान इंडिया को बताया कि राज्य में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है और वह आदिवासी समाज की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर लखपति बनाने के मिशन में जुटे हुए हैं. उनका बोर्ड आदिवासी महिलाओं को लेमनग्रास समेत सर्पगंधा, पामारोज समेत अन्य पौधे मुफ्त देकर खेती करा रहे हैं. वर्तमान में 28 गांवों की महिलाएं 100 एकड़ से ज्यादा जमीन पर लेमनग्रास समेत अन्य औषधीय पौधों की खेती कर रही हैं.
लेमनग्रास की खेती करने वाले किसानों ने कहा कि प्रति एकड़ सालाना ढाई लाख रुपये तक का मुनाफा हो रहा है. जबकि, कुल कमाई ज्यादा है. किसानों से लेमनग्रास खरीद के बाद इसका तेल निकाला जाता है और उसका इस्तेमाल दवाइयों आदि बनाने में किया जाता है.