हरियाणा में कपास की खेती घाटे का सौदा, किसानों को 15143 रुपये एकड़ नुकसान.. जानें वजह

हरियाणा में कपास की खेती किसानों के लिए लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है. चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) हिसार की रिपोर्ट के अनुसार खरीफ 2025 में किसानों को औसतन 15,143 रुपये प्रति एकड़ का नुकसान हुआ. उत्पादन में गिरावट और बाजार में कपास के कम दामों ने किसानों की आय पर बड़ा असर डाला है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 28 Jun, 2026 | 10:51 AM

Cotton Farming: हरियाणा में कपास की खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है. चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU), हिसार की एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार खरीफ 2025 सीजन में किसानों को कपास की खेती पर औसतन 15,143 रुपये प्रति एकड़ का नुकसान हुआ. रिपोर्ट में बताया गया है कि जहां किसानों की औसत आय 24,882 रुपये प्रति एकड़ रही, वहीं खेती की कुल लागत बढ़कर 40,024 रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच गई.

हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कपास का रकबा  पिछले सात वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. वर्ष 2019-20 में जहां 8 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में कपास की खेती होती थी, वहीं खरीफ 2025-26 में यह घटकर केवल 2.82 लाख हेक्टेयर रह गई. यानी करीब 65 प्रतिशत या 5.17 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रहे नुकसान के कारण किसान कपास की खेती से दूरी बना रहे हैं.

औसत भाव घटकर 6,020 रुपये प्रति क्विंटल रह गया

रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में कपास खरीफ सीजन की प्रमुख नकदी फसल है और इसकी खेती मुख्य रूप से हिसार, भिवानी, फतेहाबाद, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, चरखी दादरी और सिरसा जिलों में की जाती है. लेकिन इस बार कपास की औसत उत्पादकता  घटकर 4 क्विंटल प्रति एकड़ रह गई, जबकि पिछले वर्ष यह 5.70 क्विंटल प्रति एकड़ थी. वहीं बाजार में कपास का औसत भाव भी घटकर 6,020 रुपये प्रति क्विंटल रह गया, जो पिछले साल 7,071 रुपये प्रति क्विंटल था.

किसान दूसरी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, HAU के विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन में गिरावट और बाजार कीमतों में कमी के कारण कपास की खेती की लाभप्रदता तेजी से घटी है. यही वजह है कि राज्य में कपास का रकबा लगातार कम हो रहा है और किसान दूसरी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि केवल खेती के सीधे खर्चों को देखा जाए तो किसानों को प्रति एकड़ करीब 2,060 रुपये का लाभ मिला. लेकिन यह वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाता. जब प्रबंधन खर्च, जोखिम लागत, परिवहन खर्च और जमीन के किराये के मूल्य को भी शामिल किया गया, तो कपास की खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हुई.

खेती की औसत कुल लागत 40,024 रुपये प्रति एकड़

अध्ययन के अनुसार, राज्य स्तर पर कपास की खेती की औसत कुल लागत 40,024 रुपये प्रति एकड़ रही, जबकि किसानों को औसतन 24,882 रुपये प्रति एकड़ की आय हुई. इस तरह किसानों को प्रति एकड़ 15,143 रुपये का शुद्ध नुकसान उठाना पड़ा. रिपोर्ट में इस नुकसान की मुख्य वजह कम उत्पादन और बाजार में कपास के घटते दाम बताए गए हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ी. एक ओर कपास की पैदावार कम हुई, वहीं दूसरी ओर बाजार में फसल का उचित भाव भी नहीं मिला. इससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ा और खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया.

कपास की खेती में निवेश काफी अधिक होता है

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कपास की खेती में निवेश काफी अधिक होता है. किसानों ने प्रति एकड़ औसतन 22,821 रुपये केवल परिवर्तनीय लागत (वैरिएबल कॉस्ट) पर खर्च किए. इसमें खेत की तैयारी, बुवाई, बीज, उर्वरक, सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण, कीट एवं रोग प्रबंधन, कपास की तुड़ाई और गहाई जैसे कार्यों पर होने वाला खर्च शामिल है. रिपोर्ट के अनुसार, इस बार कपास किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ी. एक तरफ उत्पादन घट गया, तो दूसरी ओर बाजार में कपास के दाम भी कम मिले. इससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ा और खेती घाटे का सौदा बन गई.

 

 

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 28 Jun, 2026 | 10:49 AM

लेटेस्ट न्यूज़