CM के बयान से बढ़ा आक्रोश, किसान नेता बोले- कई फसलों का रेट MSP से कम, ये सच्चाई छुपाने की है कोशिश

किसा नेता रामपाल जाट ने कहा कि किसान का परिवार पूरे साल 365 दिन मेहनत करता है. खेती में जुताई, बुवाई, निराई-गुड़ाई, कटाई, परिवहन और प्रबंधन जैसे कई काम करने पड़ते हैं. इसके बावजूद किसानों को उचित दाम नहीं मिलते. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बाजरे का बीज 500 रुपये प्रति किलो तक खरीदना पड़ा, लेकिन वही बाजरा बाजार में 20 रुपये प्रति किलो से भी कम कीमत पर बेचना पड़ा.

वेंकटेश कुमार
नोएडा | Published: 13 Apr, 2026 | 01:49 PM

Rajasthan News: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के किसानों के साल में 20 से 25 दिन काम करने वाले बयान से अन्नदाताओं में काफी नाराजगी है. किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने ‘किसान इंडिया’ से कहा है कि मुख्यमंत्री का यह बयान अन्नदाताओं की मेहनत और काम को कम आंकता है, जिससे उनमें आक्रोश बढ़ गया है. उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर नाराजगी जताते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों को उनका उचित मेहनताना देने में विफल रही है और इस सच्चाई को छिपाने के लिए किसानों का अपमान किया जा रहा है. साथ ही उन्होंने कहा कि मंडी में कई फसलों का रेट MSP से काफी कम है. ऐसे में किसानों को नुकसान हो रहा है.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और उनके प्रवक्ता लगातार यह दावा करते हैं कि वे खेती से जुड़े हैं और किसानों का दर्द समझते हैं, लेकिन हाल के उनके बयान से सच्चाई सामने आ गई है. रामपाल जाट ने यह भी कहा कि सिर्फ बातों से हकीकत नहीं बदलती. उन्होंने कहा कि नौकरी करने वाले लोग साल के 365 दिन का वेतन लेते हैं, लेकिन काम केवल 150- 200 दिन ही करते हैं. अगर यही नियम उन पर लागू किया जाए, तो स्थिति समझ में आ जाएगी.

बाजरे का भी मार्केट में नहीं मिल रहा रेट

रामपाल जाट ने कहा कि किसान का परिवार पूरे साल 365 दिन मेहनत करता है. खेती में जुताई, बुवाई, निराई-गुड़ाई, कटाई, परिवहन और प्रबंधन जैसे कई काम करने पड़ते हैं. इसके बावजूद किसानों को उचित दाम नहीं मिलते. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बाजरे का बीज 500 रुपये प्रति किलो तक खरीदना पड़ा, लेकिन वही बाजरा बाजार में 20 रुपये प्रति किलो से भी कम कीमत पर बेचना पड़ा. किसान नेता रामपाल जाट ने आरोप लगाया कि सरकार ने बाजरे के लिए 2775 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया, लेकिन एक दाना भी उस कीमत पर नहीं खरीदा गया. उन्होंने कहा कि किसानों को मूंग की फसल भी करीब 3000 रुपये प्रति क्विंटल के नुकसान में बेचनी पड़ी.

इन फसलों का रेट MSP से काफी कम

उन्होंने आगे कहा कि चने का MSP 5875 रुपये प्रति क्विंटल होने के बावजूद खरीद नहीं हो रही, जिससे किसानों को लगभग 775 रुपये प्रति क्विंटल का घाटा उठाना पड़ रहा है. इसी तरह, गेहूं का MSP 2735 रुपये प्रति क्विंटल होने के बावजूद किसान अपनी फसल करीब 2100 रुपये प्रति क्विंटल पर बेचने को मजबूर हैं. वहीं, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की फसलें लगातार खराब हो रही हैं. किसानों को 2023, 2024, 2025 और 2026 के दौरान आपदा राहत कोष से मिलने वाला मुआवजा भी समय पर नहीं मिल रहा है.

साथ ही जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना  के तहत प्रीमियम दिया है, उन्हें भी फसल नुकसान का उचित मुआवजा नहीं मिल पा रहा है. किसान नेता ने आरोप लगाते हुए कहा कि इन मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए बिना आधार वाले बयान दिए जा रहे हैं, जो उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि राजस्थान की जिम्मेदारी अब सरकार के पास है और ऐसे संवेदनहीन बयानों से जनता की भावनाएं आहत होती हैं. किसान नेता ने मुख्यमंत्री से आत्ममंथन करके जनता से क्षमा मांगने की मांग की है.

क्या बोले थे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

दरअसल, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा था कि किसान साल में सिर्फ 20-25 दिन या एक महीने काम करके पूरे साल की आर्थिक स्थिति मजबूत करना चाहता है, जो संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि ज्यादातर किसान 25- 30 दिन से ज्यादा काम नहीं करते, वे सिर्फ बुवाई और कटाई के समय खेत में जाते हैं और बीच में 2-5 दिन सिंचाई करते हैं. उनका मानना है कि अगर किसान रोजाना कम से कम 4 घंटे नियमित रूप से खेती में काम करें, तो वे फिर से आगे आ सकते हैं.

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