देश में फूलों की खेती (फ्लोरीकल्चर) का रकबा तेजी से बढ़ रहा है. इससे किसानों को बंपर कमाई हो रही है. वर्ष 2025-26 में फूलों की खेती का रकबा बढ़कर रिकॉर्ड 4 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है. यह 2021-22 के 2.82 लाख हेक्टेयर के मुकाबले बड़ी बढ़ोतरी है. वहीं, इस क्षेत्र से होने वाला सकल मूल्य संवर्धन (GVA) भी 2019-20 के 39,287 करोड़ रुपये से बढ़कर 2023-24 में 51,643 करोड़ रुपये हो गया है. आंकड़े बताते हैं कि देश का फ्लोरीकल्चर उद्योग लगातार मजबूत हो रहा है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, सिक्किम, जो ऑर्किड उत्पादन के लिए जाना जाता है, वहां फूलों की खेती का रकबा और उत्पादन पिछले एक दशक से लगभग स्थिर बना हुआ है. वर्ष 2025-26 में राज्य में 242 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती हुई और 16,509 टन उत्पादन दर्ज किया गया. यह आंकड़ा 2015-16 के स्तर के बराबर है. वहीं, मिजोरम में फूलों की खेती का रकबा लगातार घटा है. वर्ष 2017-18 में जहां 240 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती होती थी, वहीं 2025-26 में यह घटकर सिर्फ 50 हेक्टेयर रह गया है. हालांकि, नागालैंड ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में फ्लोरीकल्चर का रकबा 2015-16 के 70 हेक्टेयर से बढ़कर 2023-24 में 1,190 हेक्टेयर तक पहुंच गया. इससे नागालैंड पूर्वोत्तर के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है, जहां फूलों की खेती तेजी से विस्तार कर रही है.
पूर्वोत्तर राज्यों में फूलों की खेती की स्थिति
| राज्य | वर्ष | रकबा (हेक्टेयर) | उत्पादन (टन) | स्थिति |
|---|---|---|---|---|
| सिक्किम | 2015-16 | 242 | 16,509 | स्थिर |
| सिक्किम | 2025-26 | 242 | 16,509 | कोई खास बदलाव नहीं |
| मिजोरम | 2017-18 | 240 | उपलब्ध नहीं | रकबा अधिक |
| मिजोरम | 2025-26 | 50 | उपलब्ध नहीं | रकबा में भारी गिरावट |
| नागालैंड | 2015-16 | 70 | उपलब्ध नहीं | शुरुआती स्तर |
| नागालैंड | 2023-24 | 1,190 | उपलब्ध नहीं | तेज विस्तार |
बागवानी उत्पादन रिकॉर्ड 3777.8 लाख टन
भारत में फूलों की खेती से जुड़े क्षेत्र और उत्पादन का आधिकारिक रिकॉर्ड वर्ष 1993-94 से रखा जाना शुरू हुआ था. शुरुआत में आंकड़ों में केवल ढीले फूलों (Loose Flowers) का उत्पादन शामिल किया जाता था. बाद में वर्ष 2012-13 से कट फ्लावर (Cut Flowers) के उत्पादन को भी इसमें जोड़ा गया. देश में बागवानी (हॉर्टिकल्चर) उत्पादन लगातार बढ़ रहा है. वर्ष 2025-26 में कुल बागवानी उत्पादन रिकॉर्ड 3777.8 लाख टन तक पहुंच गया, जो खाद्यान्न उत्पादन से भी अधिक है. इसी दौरान बागवानी क्षेत्र में फ्लोरीकल्चर की हिस्सेदारी भी बढ़ी है. वर्ष 2014-15 में जहां इसका योगदान 0.76 फीसदी था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 1.2 फीसदी हो गया है.
फूल की खेती में तमिलनाडु आगे
वर्ष 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार, फूलों के उत्पादन में तमिलनाडु देश में पहले स्थान पर रहा, जिसकी राष्ट्रीय उत्पादन में हिस्सेदारी 19 फीसदी रही. इसके बाद मध्य प्रदेश का 14 फीसदी, कर्नाटक का 12 फीसदी, आंध्र प्रदेश का 11 फीसदी और पश्चिम बंगाल का 10 फीसदी योगदान दर्ज किया गया. ये पांच राज्य देश के कुल फूल उत्पादन में सबसे बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.
अरुणाचल प्रदेश की स्थिति खराब
हालांकि, अरुणाचल प्रदेश की तस्वीर कुछ अलग नजर आती है. एक समय फूलों की खेती के लिए पहचान बनाने वाला यह राज्य अब चुनौतियों का सामना कर रहा है. वर्ष 2009-10 में अरुणाचल प्रदेश में 1,200 हेक्टेयर क्षेत्र में कट फ्लावर की खेती होती थी और सालाना 2,860 टन उत्पादन होता था. इसी उत्पादन के दम पर राज्य देश में एंथूरियम फूल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन गया था. उस समय केवल मिजोरम ही उससे आगे था. यह उपलब्धि इसलिए भी खास थी क्योंकि कुछ साल पहले तक राज्य में व्यावसायिक स्तर पर फूलों की खेती लगभग नहीं के बराबर थी. लेकिन आज, जब देश का फ्लोरीकल्चर क्षेत्र नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है, अरुणाचल प्रदेश की इस सफलता की कहानी धीरे-धीरे फीकी पड़ती दिखाई दे रही है.