मछली पकड़ने पर 61 दिन की रोक खत्म, 15000 नावों के साथ एक लाख मछुआरों की कमाई शुरू

तमिलनाडु में 61 दिनों की मछली पकड़ने की रोक समाप्त होने जा रही है, जिससे तटीय इलाकों में उत्साह बढ़ गया है. मछुआरे समुद्र में लौटने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि व्यापारियों और सीफूड उद्योग को भी कारोबार में तेजी की उम्मीद है. यह फैसला समुद्री संसाधनों के संरक्षण से जुड़ा माना जाता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 15 Jun, 2026 | 11:56 AM

Tamil Nadu Fishing Ban: तमिलनाडु के समुद्री तटों पर दो महीने से पसरा सन्नाटा अब खत्म होने जा रहा है. 61 दिनों की वार्षिक मछली पकड़ने की रोक समाप्त होने के साथ ही हजारों मछुआरे फिर से समुद्र का रुख करने की तैयारी में जुट गए हैं. बंदरगाहों पर नावों की मरम्मत, जालों की जांच और ईंधन भरने का काम तेजी से चल रहा है. मछुआरों के साथ-साथ मछली व्यापारियों और सीफूड उद्योग से जुड़े लोगों को भी कारोबार में नई रफ्तार आने की उम्मीद है.

61 दिनों बाद फिर गुलजार होंगे समुद्री तट

केंद्र सरकार की ओर से 15 अप्रैल से 14 जून तक समुद्र में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध  लगाया गया था. यह रोक मछलियों के प्रजनन काल को सुरक्षित रखने और समुद्री जैव विविधता को संरक्षित करने के उद्देश्य से लागू की गई थी. प्रतिबंध के दौरान किसी भी प्रकार की मशीनीकृत नावों को समुद्र में जाने की अनुमति नहीं थी. साथ ही मछुआरों को पड़ोसी राज्यों की सीमा में प्रवेश न करने के निर्देश भी दिए गए थे. अब 14 जून की आधी रात के बाद यह प्रतिबंध समाप्त हो जाएगा, जिसके बाद तमिलनाडु के विभिन्न तटीय क्षेत्रों में फिर से मछली पकड़ने की गतिविधियां शुरू हो जाएंगी.

नावों और जालों की तैयारी में जुटे मछुआरे

दो महीने के इस अंतराल का उपयोग मछुआरों ने अपनी नावों और उपकरणों की मरम्मत में किया. कई स्थानों पर इंजन की सर्विसिंग की गई, जालों को नया बनाया गया और सुरक्षा उपकरणों की जांच की गई. थूथुकुडी, कन्याकुमारी, नागपट्टिनम और चेन्नई सहित कई प्रमुख मछली पकड़ने  वाले केंद्रों में इन दिनों काफी हलचल देखने को मिल रही है. मछुआरों का कहना है कि लंबे इंतजार के बाद वे फिर से समुद्र में उतरने को उत्साहित हैं. अच्छी पकड़ की उम्मीद के साथ कई नाव मालिकों ने पहले से ही आवश्यक सामान और ईंधन का भंडारण कर लिया है.

एक लाख से अधिक मछुआरों के समुद्र में उतरने की उम्मीद

मत्स्य विभाग  के अनुमान के अनुसार प्रतिबंध हटने के बाद 15,000 से अधिक मशीनीकृत नावें समुद्र में उतर सकती हैं. इनके साथ एक लाख से ज्यादा मछुआरे मछली पकड़ने के कार्य में जुटेंगे. चेन्नई के कासिमेडु से लेकर कन्याकुमारी तक लगभग सभी प्रमुख मत्स्य बंदरगाहों पर गतिविधियां तेज हो चुकी हैं. बंदरगाह प्रशासन और मत्स्य अधिकारियों ने भी नावों की आवाजाही, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं की तैयारियां पूरी कर ली हैं ताकि कामकाज सुचारू रूप से शुरू हो सके.

व्यापार और समुद्री संसाधनों को मिलेगा लाभ

मछली पकड़ने पर लगी रोक हटने से केवल मछुआरों को ही नहीं बल्कि मछली व्यापारियों, नीलामी केंद्रों, ट्रांसपोर्ट कंपनियों और सीफूड प्रोसेसिंग उद्योग को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है. विशेषज्ञों का मानना है कि हर वर्ष लागू की जाने वाली यह रोक समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. प्रजनन काल के दौरान मछलियों को सुरक्षित वातावरण मिलने से उनकी संख्या बढ़ती है, जिससे भविष्य में मछुआरों को बेहतर उत्पादन मिलता है. यही वजह है कि यह वार्षिक प्रतिबंध समुद्री संसाधनों के संरक्षण और मत्स्य उद्योग की दीर्घकालिक मजबूती के लिए बेहद अहम माना जाता है.

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