57 साल बाद बदलेगा कीटनाशक कानून, पेस्टीसाइड्स बनाने-बेचने पर दोषियों को 5 साल तक की सजा

देश में कीटनाशकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ खतरे भी बढ़े हैं. आंकड़ों के अनुसार, हर साल करीब 7500 किसानों की मौत जहरीले रसायनों के कारण हो रही है. इसके अलावा खाने-पीने की चीजों में भी इन रसायनों का असर देखने को मिल रहा है, जिससे आम लोगों की सेहत प्रभावित हो रही है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 25 Mar, 2026 | 11:01 AM

India pesticide law 2026: देश में खेती को सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है. लंबे समय से लागू 1968 का कीटनाशक कानून अब बदलने वाला है. इसकी जगह एक नया कीटनाशक प्रबंधन विधेयक लाया जाएगा, जिसे कैबिनेट की मंजूरी के बाद संसद में पेश किया जाएगा. इस बदलाव का मकसद खेती में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक रसायनों पर नियंत्रण बढ़ाना और किसानों की जान की रक्षा करना है.

जहरीले कीटनाशकों से बढ़ रहा खतरा

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, देश में कीटनाशकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ खतरे भी बढ़े हैं. आंकड़ों के अनुसार, हर साल करीब 7500 किसानों की मौत जहरीले रसायनों के कारण हो रही है. इसके अलावा खाने-पीने की चीजों में भी इन रसायनों का असर देखने को मिल रहा है, जिससे आम लोगों की सेहत प्रभावित हो रही है. ऐसे में सरकार के लिए यह जरूरी हो गया था कि पुराने कानून में बदलाव कर सख्त नियम लागू किए जाएं.

हर कीटनाशक की होगी डिजिटल निगरानी

नए कानून में तकनीक का खास उपयोग किया जाएगा. इसके तहत सभी तरह के कीटनाशकों को एक डिजिटल सिस्टम में दर्ज करना अनिवार्य होगा. देश में बनने वाले और विदेश से आने वाले हर पेस्टीसाइड को सरकार के डैशबोर्ड पर रजिस्टर करना पड़ेगा. इससे यह जानकारी आसानी से मिल सकेगी कि किस राज्य में कितना कीटनाशक पहुंचा और कहां उसका इस्तेमाल हो रहा है.

किसानों को मिलेगा सुरक्षा प्रशिक्षण

सरकार इस बिल के जरिए किसानों को भी सुरक्षित खेती के लिए तैयार करना चाहती है. इसके तहत किसानों को सही तरीके से दवा छिड़कने की ट्रेनिंग दी जाएगी. साथ ही उन्हें सुरक्षा उपकरण यानी प्रोटेक्शन गियर के इस्तेमाल के लिए भी जागरूक किया जाएगा. रिटेलर्स के लिए भी नियम तय किए जाएंगे, ताकि वे केवल मानक के अनुरूप उत्पाद ही बेचें.

नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई

नए कानून में सजा और जुर्माने के प्रावधान काफी सख्त रखे गए हैं. अगर कोई व्यक्ति खतरनाक या गैर-मानक कीटनाशक बनाता या बेचता है, तो उसे 5 साल तक की जेल और 40 लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है.

यदि किसी कीटनाशक के इस्तेमाल से किसी की मौत होती है और वह तय मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. बार-बार नियम तोड़ने पर जुर्माना बढ़ाया जाएगा और तीसरी बार गलती होने पर कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा. कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी भी इसके लिए उत्तरदायी होंगे.

छोटे नियम उल्लंघन भी नहीं होंगे नजरअंदाज

नियमों के खिलाफ कीटनाशकों का निर्माण, आयात या बिक्री करने पर 2 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं, गैर-रजिस्टर्ड, प्रतिबंधित या एक्सपायर कीटनाशक बेचने पर 50 हजार से 2 लाख रुपये तक का जुर्माना तय किया गया है.

अगर कोई बिना लाइसेंस के उत्पादन या आयात करता है या प्रतिबंधित उत्पाद बनाता है, तो उसे 3 साल तक की सजा और भारी जुर्माना झेलना होगा.

निगरानी और पारदर्शिता पर जोर

इस नए कानून के तहत कीटनाशकों की पैकेजिंग, लेबलिंग और परिवहन पर लगातार निगरानी रखी जाएगी. इससे नकली और खतरनाक उत्पादों को बाजार में आने से रोका जा सकेगा. साथ ही एक राष्ट्रीय स्तर की रजिस्ट्री और दिशा-निर्देश तय करने के लिए बोर्ड भी बनाया जाएगा.

लागू होने के बाद क्या बदलेगा?

अभी देश में प्रति एकड़ करीब आधा किलो कीटनाशक इस्तेमाल की अनुमति है, लेकिन कई किसान गैर-मानक उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं. नया कानून लागू होने के बाद इस पर सख्ती बढ़ेगी और केवल सुरक्षित व प्रमाणित कीटनाशकों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा.

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