Maize Crop: इन दिनों कई इलाकों में मक्के की फसल तैयार होने लगी है. खेतों में भुट्टे निकल आए हैं, लेकिन इसी समय कीटों का हमला भी तेजी से बढ़ रहा है. ये कीट भुट्टों के अंदर घुसकर दानों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं. कई किसान फसल बचाने के लिए तुरंत तेज कीटनाशकों का छिड़काव कर देते हैं, लेकिन यह तरीका नुकसानदायक साबित हो सकता है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद ने किसानों को सलाह दी है कि पकने वाली फसल पर जहरीले कीटनाशकों का उपयोग करने से बचें. उन्होंने कहा कि गलत दवा और गलत समय पर छिड़काव करने से दवा का असर दानों में रह जाता है, जो बाद में लोगों की सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है. किसानों को सुरक्षित और संतुलित तरीके से कीट नियंत्रण करना चाहिए.
गर्मी बढ़ने से मक्के में बढ़ रहा कीटों का खतरा
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय भीषण गर्मी और खेतों में दूसरी फसलों की कमी के कारण कीटों का प्रकोप बढ़ रहा है. कीटों के लार्वा भोजन की तलाश में मक्के के कोमल भुट्टों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं. ये लार्वा भुट्टे के अंदर जाकर दानों को खाना शुरू कर देते हैं. इससे दानों की गुणवत्ता खराब हो जाती है और बाजार में सही कीमत नहीं मिलती. कई बार किसान को भारी आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है. डॉ. प्रमोद ने कहा कि किसानों को समय-समय पर खेत की निगरानी करनी चाहिए. शुरुआती अवस्था में कीट दिखने पर तुरंत सुरक्षित उपाय अपनाने से नुकसान कम किया जा सकता है. अगर शुरुआत में ध्यान नहीं दिया गया, तो कीट तेजी से पूरी फसल में फैल सकते हैं.
पकने वाली फसल पर जहरीली दवा से बचें
विशेषज्ञों ने किसानों को सबसे ज्यादा सावधानी कीटनाशकों के इस्तेमाल को लेकर बरतने की सलाह दी है. अगर मक्के का भुट्टा अगले 15 से 20 दिनों में तैयार होने वाला है, तो किसी भी तेज रासायनिक दवा का छिड़काव नहीं करना चाहिए. डॉ. प्रमोद के अनुसार कीटनाशकों का अवशेष दानों में रह सकता है. बाद में यही दाने लोगों और पशुओं के खाने में इस्तेमाल होते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि किसान फसल की स्थिति देखकर ही फैसला लें. अगर दाने पूरी तरह बनने वाले हैं और तुड़ाई का समय नजदीक है, तो केवल सुरक्षित और हल्के उपाय ही अपनाने चाहिए. स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है.
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हल्के कीटनाशक और नीम तेल का करें उपयोग
अगर फसल अभी कच्ची है और दाना बनने में समय बाकी है, तभी हल्के कीटनाशकों का उपयोग करना बेहतर माना गया है. कृषि वैज्ञानिकों ने ज्यादा जहरीले कीटनाशकों से बचने की सलाह दी है. डॉ. प्रमोद ने बताया कि इमिडाक्लोप्रिड जैसे हल्के कीटनाशक का उपयोग किया जा सकता है. इसकी 1 मिली मात्रा को 1 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए. छिड़काव शाम के समय करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि उस समय तापमान कम होता है और दवा का असर बेहतर होता है. इसके अलावा किसान जैविक उपाय भी अपना सकते हैं. नीम तेल का छिड़काव कीट नियंत्रण का सुरक्षित तरीका माना जाता है. इससे फसल पर जहरीले अवशेष का खतरा कम रहता है और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचता.
दवा छिड़काव के बाद रखें जरूरी इंतजार
कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि कीटनाशक के तुरंत बाद भुट्टों की तुड़ाई नहीं करनी चाहिए. दवा के असर को कम होने में समय लगता है. इसलिए छिड़काव के बाद कम से कम 15 से 20 दिनों का इंतजार जरूरी माना जाता है. अगर किसान बिना इंतजार किए भुट्टों की तुड़ाई कर लेते हैं, तो दवा का असर दानों में बना रह सकता है. इससे खाने वाले लोगों की सेहत पर खराब असर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षित खेती के लिए किसानों को जल्दबाजी से बचना चाहिए. सही दवा, सही मात्रा और सही समय का ध्यान रखकर किसान अपनी मक्के की फसल को कीटों से बचा सकते हैं और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.