Tip Of The Day: सरसों की कटाई के बाद खाली न छोड़ें खेत! करें इस फसल की खेती, 100 दिनों में होगी ताबड़तोड़ कमाई

Tips For Farmes: आलू और सरसों की कटाई के बाद खेत खाली रखने की बजाय किसान हाइब्रिड मक्का की बुवाई कर कम समय में अच्छी कमाई कर सकते हैं. सही जुताई, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर बेहतर उत्पादन संभव है. यह फसल कम समय में तैयार होकर किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी विकल्प बन रही है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 28 Feb, 2026 | 10:54 AM

Makka Ki Kheti: आलू की खुदाई और सरसों की कटाई के बाद खेत अक्सर खाली रह जाते हैं, लेकिन अब यही खाली खेत किसानों के लिए कमाई का नया जरिया बन सकते हैं. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार बताते हैं कि, इस समय हाइब्रिड मक्का की बुवाई करके किसान कम समय में बेहतर लाभ कमा सकते हैं. यह फसल लगभग 90 से 100 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे अगली फसल के लिए भी समय बचा रहता है और आय के नए रास्ते खुलते हैं.

क्यों फायदेमंद है मक्का की खेती?

कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार आलू और सरसों के बाद खेत को खाली छोड़ना समझदारी नहीं है. इस दौरान हाइब्रिड मक्का लगाकर किसान अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सकते हैं. मक्का की बाजार में लगातार मांग बनी रहती है, चाहे वह पशु चारा हो या खाद्य उद्योग. कम समय में तैयार होने वाली यह फसल जोखिम भी कम करती है और लागत के मुकाबले अच्छा मुनाफा देती है.

उन्नत खेती की तैयारी और जुताई

बेहतर उत्पादन के लिए खेत की सही तैयारी सबसे अहम कदम है. आलू की खुदाई के बाद मिट्टी भुरभुरी हो जाती है, लेकिन एक बार गहरी जुताई करना जरूरी है. इससे मिट्टी के अंदर मौजूद कीटों के अंडे और हानिकारक तत्व खत्म हो जाते हैं.

जुताई के बाद पाटा लगाकर खेत को समतल करना चाहिए. समतल खेत में सिंचाई का पानी समान रूप से फैलता है और बीजों का अंकुरण एकसमान होता है. अच्छी तरह तैयार खेत ही अधिक पैदावार की नींव रखता है.

उर्वरक प्रबंधन और बुवाई की तकनीक

मक्का पोषक तत्वों की अधिक मांग करने वाली फसल है. इसलिए मिट्टी परीक्षण के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की संतुलित मात्रा देना जरूरी है. बुवाई के लिए ‘सीड ड्रिल’ या ‘प्लांटर’ मशीन का उपयोग करना लाभकारी होता है. इससे बीज सही गहराई और उचित दूरी पर गिरता है, जिससे पौधों को पर्याप्त स्थान मिलता है और विकास बेहतर होता है. सही समय पर उर्वरक देने से भुट्टों का आकार बड़ा और दाने चमकदार बनते हैं, जिससे बाजार में अच्छी कीमत मिलती है. बुवाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई हल्की करनी चाहिए. तेज पानी के बहाव से बीज अपनी जगह से हट सकते हैं या मिट्टी की सख्त परत बन सकती है, जिससे अंकुरण प्रभावित होता है.

मक्का की फसल में जलभराव नहीं होना चाहिए, इसलिए खेत में जलनिकास की उचित व्यवस्था रखें. समय-समय पर खरपतवार नियंत्रण और कीट प्रबंधन करना भी जरूरी है. शुरुआती 30-40 दिनों में निराई-गुड़ाई करने से पौधों की बढ़वार अच्छी होती है.

100 दिनों में बंपर पैदावार

अगर किसान सही किस्म का चुनाव, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाते हैं, तो मात्र 100 दिनों में मक्का की बंपर पैदावार प्राप्त की जा सकती है. इससे न केवल खेत का सदुपयोग होता है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है. आलू और सरसों के बाद मक्का की खेती अपनाकर किसान एक ही सीजन में अतिरिक्त लाभ कमा सकते हैं और अपनी आय को नई ऊंचाई दे सकते हैं.

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