12 साल से केमिकल फ्री खेती कर रहे किसान भारत, खेती खर्च घटा और उपज की क्वालिटी सुधरी

प्रधानमंत्री मोदी ने भावी पीढ़ियों के लिए मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने, जल संरक्षण और संसाधनों के उचित उपयोग की जरूरत पर बल दिया है. पीएम किसानों को प्रोत्साहित करते हैं कि वे प्राकृतिक खेती ओर रुख करें. सरकार ने 2026 के अंत तक देश में ऑर्गेनिक खेती करने वाले किसानों की संख्या 1 करोड़ के पार ले जाने का टारगेट रखा है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 16 Jan, 2026 | 01:18 PM

प्राकृतिक खेती करने से मिट्टी की सेहत में सुधार होता है और खेती में आने वाला खर्च कम हो जाता है. 12 साल से बिना केमिकल फर्टिलाइजर इस्तेमाल किए प्राकृतिक खर रहे हापुड़ के किसान भारत भूषण चौधरी ने कहा कि उपज की क्वालिटी बेहतर हुई है. हालांकि, उत्पादन में कमी देखने की बात उन्होंने कही. वहीं, केंद्र सरकार ने 2026 में ऑर्गेनिक खेती के लिए 1 करोड़ किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है. किसानों का मानना ​​है कि प्राकृतिक और ऑर्गेनिक तरीकों से उगाई गई फसलों से बेहतर नतीजे मिलेंगे.

इस साल एक करोड़ किसानों को ऑर्गेनिक खेती से जोड़ने का टारगेट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भावी पीढ़ियों के लिए मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने, जल संरक्षण और संसाधनों के उचित उपयोग की जरूरत पर बल दिया है. पीएम किसानों को प्रोत्साहित करते हैं कि वे प्राकृतिक खेती ओर रुख करें. सरकार ने 2026 के अंत तक देश में ऑर्गेनिक खेती करने वाले किसानों की संख्या 1 करोड़ के पार ले जाने का टारगेट रखा है. वहीं, किसानों का मानना ​​है कि प्राकृतिक या ऑर्गेनिक तरीकों से उगाई गई फसलों से बेहतर नतीजे मिलेंगे.

यूपी में 85 हजार हेक्टेयर जमीन पर हो रही प्राकृतिक खेती

प्राकृतिक खेती करने से तो जो हम रासायनिक उर्वरकों से हम अपनी मिट्टी का क्षरण किए हैं वह सशक्त तो हो जाएगी और हमारी मिट्टी धीरे-धीरे फिर से उपजाऊ होगी. उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक खेती कर रहे किसान भी इससे लाभान्वित हो रहे हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग (NMNF) के तहत लगभग 85,710 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि को प्राकृतिक खेती के तहत विकसित किया है. इस रकबे में केमिकल फ्री खेती की जा रही है. यह योजना 49 जिलों में लागू की गई है और इन जिलों के किसान बड़े स्तर पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं.

टिकाऊ खेती से किसानों का खर्च घट रहा आमदनी बढ़ रही

लखनऊ के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश दुबे ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि विकसित भारत के लिए प्राकृतिक और टिकाऊ खेती जरूरी है. उन्होंने कहा कि इससे किसान ना केवल समृद्ध बनेंगे बल्कि मिट्टी की पोषकता भी बढ़ेगी. प्राकृतिक खेती और टिकाऊ खेती से है कि किसानों की लागत जो है घटेगी और आमदनी बढ़ेगी. साथ ही जो उपभोक्ता हैं उनको पोषक तत्व जो मिलेंगे वह बगैर रसायन के विषमुक्त खाद्यान्न मिलेंगे तो जिससे लोगों के स्वास्थ्य में सुधार भी होगा और साथ ही धीरे-धीरे जब हमारे जमीन में जीवांश पदार्थ की मात्रा बढ़ेगी.

12 साल से प्राकृतिक खेती कर रहे हापुड़ के भारत भूषण

हापुड़ जिले के किसान भारत भूषण गर्ग ने प्रसार भारती से कहा कि वे पिछले 12 वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और लोगों को इससे होने वाले फायदे के बारे में जागरूक भी कर रहे हैं. किसान ने कहा कि मेरी एक एकड़ से खेती प्रारंभ हुई और मैं अपनी स्वयं की खेती करने के साथ ही साथ आस-पास के किसानों को भी प्रेरित करते हुए इस खेती को अपनाने की उनको सलाह देता हूं. आज लगभग मेरे क्षेत्र में 20 हेक्टेयर के आसपास प्राकृतिक खेती हो रही है. सभी प्राकृतिक खेती करने वाले किसान बहुत खुश हैं.

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