सब्सिडी वाले मक्के के बीज ने बढ़ाई किसानों की चिंता, 15 बोरी प्रति एकड़ पैदावार.. दूसरी किस्म की मांग तेज

तमिलनाडु के सलेम में सब्सिडी वाले मक्के के बीज से कम पैदावार मिलने पर किसान नाराज हैं. किसानों का दावा है कि Advanta 762 से करीब 15 बोरी प्रति एकड़ उत्पादन मिला, जबकि दूसरी किस्मों से 40 बोरी तक पैदावार हुई. किसानों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल दूसरी किस्म देने की मांग की है. कृषि विभाग ने कम पैदावार के लिए बारिश की कमी को जिम्मेदार बताया है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 7 Sep, 2026 | 10:45 AM

तमिलनाडु के सलेम जिले में सरकारी सब्सिडी योजना के तहत दी गई मक्के की एक किस्म से किसानों को कम पैदावार मिली है. अत्तूर, पेथानाइकनपालयम और वाजापाडी समेत कई इलाकों के किसानों का कहना है कि यह किस्म जिले की मिट्टी और मौसम के अनुकूल नहीं रही. सलेम जिला किसान कल्याण संघ के अध्यक्ष वी.एस. गोविंदराज के मुताबिक, पिछले साल इस किस्म की खेती करने वाले किसानों को करीब 15 बोरी प्रति एकड़ ही उत्पादन मिला. वहीं, अच्छी पैदावार वाली किस्म से करीब 40 बोरी प्रति एकड़ तक उत्पादन मिलता है. उन्होंने कहा कि अच्छी फसल होने पर किसान करीब 2 लाख रुपये तक मुनाफा कमा सकते हैं, लेकिन सब्सिडी वाली इस किस्म से कई किसान अपनी खेती की लागत भी नहीं निकाल पाए.

इन बीजों की कीमत करीब 420 रुपये प्रति किलो है, लेकिन सरकारी योजना के तहत किसानों को यह 320 रुपये प्रति किलो में दिए जा रहे हैं. हालांकि, कम पैदावार को देखते हुए किसान इस साल फिर से यही बीज खरीदने से बच रहे हैं. किसानों ने सलेम के मौसम और मिट्टी के अनुकूल दूसरी किस्म देने या पुरानी सब्सिडी व्यवस्था बहाल करने की मांग की है. किसान नेता वी.एस. गोविंदराज ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि कुछ जगहों पर किसानों से कहा जा रहा है कि अगर वे ये बीज नहीं खरीदेंगे तो उन्हें दूसरी सरकारी सब्सिडी का लाभ  नहीं मिलेगा.

बीज एक्सपायर होने का डर, सलेम में 58 टन की मंजूरी

उन्होंने यह भी कहा कि इन बीजों की भंडारण अवधि सीमित है. अगर किसान इन्हें नहीं खरीदते हैं तो बीज खराब या एक्सपायर हो सकते हैं. इस सीजन सलेम जिले के लिए करीब 58 टन सब्सिडी वाले मक्के के बीज मंजूर किए गए हैं. इसमें पेथानाइकनपालयम ब्लॉक के लिए 18.5 टन बीज शामिल हैं. बीजों का वितरण अत्तूर, गंगावल्ली, पेथानाइकनपालयम, कोलाथुर और थलाइवसल समेत प्रमुख मक्का उत्पादक इलाकों में किया जाएगा.

मक्के की किस्म को लेकर किसानों और कृषि विभाग की अलग-अलग राय

किसानों का कहना है कि किसी एक इलाके में अच्छी पैदावार देने वाली मक्के की किस्म  जरूरी नहीं कि सलेम की मिट्टी और मौसम के लिए भी सही हो. किसानों के मुताबिक, निजी कंपनियों से दूसरी किस्म के बीज खरीदने वाले किसानों को बेहतर पैदावार मिली है. एक कृषि अधिकारी ने बताया कि पहले किसान निजी विक्रेताओं से अपनी पसंद के बीज खरीद सकते थे. खेत में जांच और खरीद बिल जमा करने के बाद उन्हें सब्सिडी दी जाती थी. करीब 2022 में यह व्यवस्था बदल दी गई. इसके बाद सब्सिडी के लिए कुछ खास बीज किस्मों का परीक्षण कर उन्हें वितरण के लिए मंजूरी दी जाने लगी.

कृषि विभाग ने Advanta 762 को बताया मान्य किस्म

वहीं, कृषि विभाग ने मौजूदा बीज किस्म Advanta 762 का बचाव किया है. अधिकारियों के मुताबिक, भारत सरकार ने कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में इसकी खेती के लिए इसे अधिसूचित किया है. ये बीज नेशनल सीड्स कॉरपोरेशन के जरिए कृषि विभाग के समन्वय से किसानों को दिए जा रहे हैं.  अधिकारियों के मुताबिक, तमिलनाडु के 20 जिलों में इस मक्के की किस्म की आपूर्ति  की जा रही है. सलेम में करीब 1,866 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 58 टन बीज मंजूर किए गए हैं. वितरण से पहले बीज निरीक्षक इनकी जांच करते हैं और 90 फीसदी अंकुरण मानक पूरा होने पर ही किसानों को बीज दिए जाते हैं.

 

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Published: 7 Sep, 2026 | 10:39 AM

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