तमिलनाडु में कम बारिश से जलाशयों में घटा जलस्तर, कुरुवई धान पर मंडराया खतरा.. खेती प्रभावित

तमिलनाडु में कम बारिश के बावजूद चावल की कमी या कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की आशंका नहीं है. राइस मिलर्स का कहना है कि राज्य में करीब 5 लाख टन धान का अतिरिक्त भंडार मौजूद है. अगस्त से दूसरे राज्यों से भी धान की आवक शुरू होगी, जिससे बाजार में आपूर्ति बनी रहेगी.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 8 Jul, 2026 | 01:06 PM

Tamil Nadu News: तमिलनाडु में कम बारिश और जलाशयों में घटते जलस्तर के कारण कुरुवई धान की खेती प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है. हालांकि, तमिलनाडु राइस मिल ओनर्स एंड पैडी राइस डीलर्स एसोसिएशन ने कहा है कि राज्य में न तो चावल की कमी होगी और न ही इसकी कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी होगी. एसोसिएशन के सचिव डॉ. ए.सी. मोहन ने कहा है कि राज्य की राइस मिलों में फिलहाल बड़ी मात्रा में धान का भंडार मौजूद है. इसके अलावा अगस्त से आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल से भी धान की आवक शुरू हो जाएगी, जिससे यदि कोई कमी होती है तो वह पूरी हो जाएगी.

उन्होंने कहा कि राइस मिलें धान खरीदने के तुरंत बाद उसकी मिलिंग नहीं करतीं. आमतौर पर धान को करीब आठ महीने तक भंडारित किया जाता है, क्योंकि पुराना चावल बाजार में बेहतर कीमत पर बिकता है. वर्तमान में तमिलनाडु में करीब 5 लाख टन अतिरिक्त धान का स्टॉक उपलब्ध है. डॉ. मोहन ने कहा कि राज्य में सांबा धान सबसे बड़े सीजन की फसल है, इसलिए फिलहाल चावल की उपलब्धता  को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है. हालांकि, कम बारिश के कारण मुल्लापेरियार, वैगई और मेट्टूर जैसे प्रमुख बांधों में जलस्तर कम होने से कुरुवई फसल को लेकर चिंता बनी हुई है.

30 लाख टन धान कर्नाटक से आता है

एसोसिएशन के सचिव डॉ. ए.सी. मोहन ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि तमिलनाडु बारीक और सुपर फाइन धान  की किस्मों के लिए काफी हद तक कर्नाटक पर निर्भर है. हर साल वहां से करीब 30 लाख टन धान राज्य में आता है. हालांकि, कर्नाटक में मांग बढ़ने के कारण बीपीटी (BPT) और सोना पोन्नी (Sona Ponni) जैसी किस्मों के चावल की कीमत में 5 से 6 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है. इसके बावजूद कुल मिलाकर चावल की कीमतें अभी स्थिर बनी हुई हैं.

तमिलनाडु अपनी जरूरत का बारीक चावल दूसरे राज्यों से मंगाता है

वहीं, मैडीट्सिया की फूड पैनल के चेयरपर्सन ए. अंबरासन ने भी कहा कि अगर कुरुवई धान की खेती प्रभावित होती है, तब भी बाजार पर इसका बड़ा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि तमिलनाडु अपनी जरूरत का बारीक चावल दूसरे राज्यों से मंगाता है. उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को सांबा सीजन में किसानों को बाजार में ज्यादा मांग वाली धान की किस्मों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए. साथ ही, अतिरिक्त भंडारण सुविधाएं विकसित करनी चाहिए, ताकि भविष्य में दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम हो सके.

भारी बारिश से कुरुवई धान की फसल को नुकसान

वहीं, बीते जून महीने में खबर सामने आई थी कि तमिलनाडु के सिवगंगा जिले में पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश से किसानों को बड़ा नुकसान पहुंचा है. तेज बारिश के कारण तैयार हो चुकी कुरुवई धान और गन्ने की फसलें खेतों में गिर गईं और कई जगह पानी भर गया. सबसे ज्यादा असर थिरुमलाई कोन्नेरीपट्टी और कल्लारथिनिपट्टी जैसे कृषि क्षेत्रों में देखने को मिला है, जहां खेत पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं. ऐसे में फसल नुकसान की मार झेर रहे किसानों ने सरकार से आर्थिक मदद की मांग की थी.

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Published: 8 Jul, 2026 | 01:01 PM

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