Artificial Insemination: बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अंतर्गत पशुपालन निदेशालय ने पशुपालकों को कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination-AI) की सफलता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है. विभाग का कहना है कि सही समय पर कृत्रिम गर्भाधान कराने से पशुओं में गर्भधारण की संभावना काफी बढ़ जाती है. इसके साथ ही पशुपालकों को कुछ जरूरी बातों का पालन करना चाहिए, ताकि बेहतर प्रजनन परिणाम प्राप्त किए जा सकें.
हीट की सही पहचान है सफलता की कुंजी
पशुपालन निदेशालय के अनुसार, कृत्रिम गर्भाधान की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि पशु के हीट (गर्मी) में आने की सही पहचान की गई है या नहीं. जब पशु बार-बार रंभाने लगे, दूसरे पशुओं पर चढ़ने या चढ़ने देने लगे, बार-बार पेशाब करे और चारा कम खाने लगे, तो यह हीट के प्रमुख संकेत माने जाते हैं. यदि पशुपालक इन संकेतों को समय पर पहचान लेते हैं, तो गर्भाधान की सफलता दर बढ़ाई जा सकती है. विभाग ने पशुपालकों को पशुओं के व्यवहार पर नियमित नजर रखने की सलाह दी है.
AI के लिए सही समय का रखें विशेष ध्यान
विभाग के अनुसार, कृत्रिम गर्भाधान हमेशा हीट के अंतिम चरण में कराया जाना चाहिए. इसके लिए देशी नस्ल की गायों में AM-PM नियम अपनाने की सलाह दी गई है. यानी यदि गाय सुबह 6 बजे हीट में आती है, तो उसका कृत्रिम गर्भाधान शाम 6 बजे कराया जाना चाहिए. इसी प्रकार यदि पशु शाम के समय हीट में दिखाई देता है, तो अगले दिन सुबह गर्भाधान कराना अधिक उपयुक्त माना जाता है. सही समय का चयन गर्भधारण की संभावना को काफी बढ़ा देता है और बार-बार गर्भाधान कराने की आवश्यकता कम हो जाती है.
स्वस्थ पशु और संतुलित आहार भी जरूरी
पशुपालन निदेशालय का कहना है कि केवल सही समय पर गर्भाधान कराना ही पर्याप्त नहीं है. पशु का स्वास्थ्य भी बेहतर होना चाहिए. गर्भाधान से पहले पशु को संतुलित आहार, पर्याप्त हरा चारा, खनिज मिश्रण और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना जरूरी है. यदि पशु कुपोषण, संक्रमण या किसी अन्य बीमारी से प्रभावित है, तो गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है. इसलिए पशुपालकों को नियमित स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण पर भी ध्यान देना चाहिए.
बेहतर प्रबंधन से बढ़ेगी गर्भधारण की संभावना
विभाग के अनुसार, कृत्रिम गर्भाधान के बाद पशु को तनावमुक्त वातावरण देना चाहिए. पशु के रहने की जगह साफ-सुथरी हो और उसे पर्याप्त आराम मिले. साथ ही गर्भाधान के बाद कुछ दिनों तक पशु की गतिविधियों पर नजर रखना भी जरूरी है. पशुपालन निदेशालय का मानना है कि यदि पशुपालक हीट की सही पहचान, सही समय पर गर्भाधान, संतुलित पोषण और बेहतर देखभाल जैसी बातों का पालन करें, तो कृत्रिम गर्भाधान की सफलता दर में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है. इससे दूध उत्पादन बढ़ेगा, पशुओं की उत्पादकता सुधरेगी और पशुपालकों की आय में भी बढ़ोतरी होगी.