Bihar Animal Husbandry: बिहार में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार बड़ी तैयारी कर रही है. Bihar सरकार के पशुपालन निदेशालय ने भागलपुर (Bhagalpur) समेत राज्य के 9 प्रमंडलीय मुख्यालय जिलों में 500 क्षमता वाले हीफर स्टेशन और कृत्रिम गर्भाधान केंद्र यानी AI सेंटर खोलने की प्रक्रिया तेज कर दी है. इस योजना के तहत भागलपुर के अलावा पटना, मुजफ्फरपुर, गया, दरभंगा, पूर्णिया,सहरसा,मुंगेर और सारण जिले में भी केंद्र बनाए जाएंगे. सरकार का मानना है कि इससे राज्य में आधुनिक पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी.
20 से 30 एकड़ जमीन की जरूरत
पशुपालन निदेशालय ने जिला प्रशासन से इस परियोजना के लिए 20 से 30 एकड़ तक फ्री जमीन उपलब्ध कराने को कहा है. पशुपालन निदेशालय के संयुक्त निदेशक सुनील कुमार ठाकुर (Sunil Kumar Thakur) ने इस संबंध में जिलों को पत्र भेजा है. जानकारी के अनुसार 23 फरवरी 2025 को भी संबंधित जिलों को पत्र भेजा गया था, लेकिन अभी तक कई जगहों से जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है. भूमि नहीं मिलने के कारण हीफर स्टेशन और AI सेंटर की परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है. अब फिर से जिला प्रशासन से जल्द जमीन चिन्हित कर हस्तांतरण प्रक्रिया पूरी करने का अनुरोध किया गया है. अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही जमीन उपलब्ध होगी, परियोजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया जाएगा.
पशुपालकों को मिलेगा बड़ा फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार हीफर स्टेशन बनने से उन्नत नस्ल की गायों के पालन को बढ़ावा मिलेगा. इससे दूध उत्पादन में काफी बढ़ोतरी हो सकती है. AI सेंटर यानी कृत्रिम गर्भाधान केंद्र शुरू होने से पशुपालकों को आधुनिक तकनीक की सुविधा मिलेगी. इससे अच्छी नस्ल के पशु तैयार किए जा सकेंगे और पशुओं की गुणवत्ता बेहतर होगी. सरकार का मानना है कि इससे छोटे और मध्यम पशुपालकों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा. बेहतर नस्ल और अधिक दूध उत्पादन से उनकी आमदनी बढ़ेगी. इसके अलावा पशुपालकों को कई सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेंगी, जिससे उनका समय और खर्च दोनों बचेंगे.
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ग्रामीण इलाकों में बढ़ेंगे रोजगार के मौके
इस परियोजना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है. पशुपालन से जुड़े छोटे कारोबार, डेयरी और चारा व्यवसाय को भी बढ़ावा मिलेगा. भागलपुर में यह परियोजना शुरू होने के बाद पूरे इलाके में डेयरी सेक्टर को नई दिशा मिल सकती है. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे. सरकार और पशुपालन विभाग को उम्मीद है कि यह योजना आने वाले समय में बिहार के पशुपालन क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है. अब सभी की नजरें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होती है और यह परियोजना कब शुरू होती है.