पशुपालकों को बड़ा तोहफा, वन हेल्थ प्लेटफॉर्म के जरिए 24×7 मिलेगी पशु चिकित्सा सेवा

बिहार बजट 2026-27 में डेयरी, मत्स्य और पशु संसाधन विभाग के लिए कई अहम घोषणाएं की गई हैं. बकरी प्रजनन केंद्र, वन हेल्थ प्लेटफॉर्म, 24 घंटे पशु चिकित्सा सेवा और दुग्ध समितियों के गठन से गांवों में रोजगार बढ़ेगा. सरकार का लक्ष्य है पशुपालकों की आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना.

नोएडा | Published: 3 Mar, 2026 | 01:50 PM

Dairy Development: बिहार में इस बार का बजट सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं करता, बल्कि गांव की रोजी-रोटी से जुड़ी उम्मीदों को मजबूत करता दिख रहा है. डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग बिहार सरकार के अनुसार वर्ष 2026-27 के बजट में पशुपालकों, दूध उत्पादकों, मछली पालकों और युवाओं के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं. सरकार का साफ मकसद है-गांव में रोजगार बढ़े, पशु स्वस्थ रहें और किसानों की आय में इजाफा हो. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस बार क्या खास है.

बकरी प्रजनन केंद्र और प्रजनन सुधार की बड़ी पहल

बजट में बकरी प्रजनन केंद्र  की स्थापना को मंजूरी दी गई है. इसका सीधा फायदा बकरी पालने वाले किसानों को मिलेगा. इससे बेहतर नस्ल की बकरियां तैयार होंगी, जो ज्यादा वजन और बेहतर उत्पादन देंगी. साथ ही बकरी प्रजनन, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना भी की जाएगी. यहां किसानों को आधुनिक तरीके सिखाए जाएंगे. इससे गांव के युवा भी बकरी पालन को रोजगार के रूप में अपना सकेंगे. सरकार का मानना है कि बकरी पालन  छोटे किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला काम है.

वन हेल्थ प्लेटफॉर्म और 24×7 पशु चिकित्सा सेवा

पशुओं की सेहत पर भी इस बार खास ध्यान दिया गया है. पशु रोगों की लगातार निगरानी के लिए वन हेल्थ प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा. इससे बीमारियों का जल्दी पता चलेगा और समय पर इलाज हो सकेगा. इसके अलावा डिजिटल एक्स-रे मशीन और 24 घंटे पशु चिकित्सा सेवा शुरू करने की भी मंजूरी दी गई है. यानी अब गंभीर स्थिति में भी पशुपालकों को तुरंत मदद मिलेगी. गांवों में पशु अस्पतालों को और मजबूत बनाया जाएगा ताकि इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़े.

बिहार पशु प्रजनन विनियमन अधिनियम, 2025 लागू

सरकार ने बिहार पशु प्रजनन विनियमन अधिनियम, 2025 लागू करने का फैसला किया है. इसका मकसद है कि पशुओं की नस्ल सुधार की प्रक्रिया सही और सुरक्षित तरीके से हो. अक्सर बिना जानकारी के गलत तरीके अपनाने से पशुओं की सेहत  पर असर पड़ता है. इस कानून से प्रजनन सेवाओं में पारदर्शिता आएगी और पशुपालकों को भरोसेमंद सुविधा मिलेगी. विभाग का कहना है कि इससे आने वाले वर्षों में पशुधन की गुणवत्ता बेहतर होगी.

समग्र गव्य विकास योजना से डेयरी को बढ़ावा

डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए समग्र गव्य विकास योजना  के तहत ऋण और अनुदान दिया जाएगा. यानी अगर कोई किसान डेयरी खोलना चाहता है तो उसे बैंक से लोन के साथ सरकारी सहायता भी मिलेगी. हर गांव में दुग्ध उत्पादन समिति बनाने की योजना है. साथ ही मशहूर डेयरी ब्रांड सुधा के बिक्री केंद्र भी खोले जाएंगे. इससे दूध की खरीद और बिक्री आसान होगी. किसानों को अपने दूध का सही दाम मिलेगा और बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी. सरकार का लक्ष्य है कि गांव-गांव में डेयरी को संगठित रूप दिया जाए ताकि छोटे उत्पादक भी सीधे बाजार से जुड़ सकें.

पोल्ट्री और मत्स्य क्षेत्र में नए अवसर

बजट में पोल्ट्री रिसर्च  एवं ट्रेनिंग सेंटर खोलने की मंजूरी दी गई है. यहां मुर्गी पालन से जुड़ी नई तकनीक और ट्रेनिंग दी जाएगी. इससे युवाओं को रोजगार का नया रास्ता मिलेगा. मत्स्य क्षेत्र को भी मजबूत करने के लिए योजनाएं जारी रहेंगी, ताकि तालाबों और जलाशयों का सही उपयोग हो सके. विभाग का कहना है कि अगर गांव के युवा पोल्ट्री, डेयरी और मत्स्य पालन को अपनाएं तो शहरों की ओर पलायन कम होगा.

गांव की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार

कुल मिलाकर बिहार बजट 2026-27 में डेयरी, मत्स्य और पशु संसाधन विभाग को लेकर कई ठोस कदम उठाए गए हैं. बेहतर नस्ल, बेहतर इलाज, आसान ऋण और संगठित बाजार-ये चारों चीजें मिलकर गांव की तस्वीर बदल सकती हैं. विभाग का साफ कहना है कि पशुपालक अगर इन योजनाओं का फायदा उठाएं तो उनकी आय बढ़ेगी और राज्य की अर्थव्यवस्था  भी मजबूत होगी. यह बजट गांव के मेहनती किसानों और युवाओं के लिए नई उम्मीद लेकर आया है.

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