मछली से जुड़े इस कारोबार में बिहार का बजा डंका, किसानों की बढ़ गई कमाई.. लोगों को मिला रोजगार

Bihar Fisheries: बिहार में मछली उत्पादन और फिश फीड कारोबार तेजी से बढ़ रहा है. राज्य अब अपनी जरूरत का आधे से ज्यादा मछली आहार खुद तैयार कर रहा है. सरकार की मदद से फिश फीड मिलों और मछली निर्यात को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे मछली पालकों की आय और रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 7 May, 2026 | 11:30 PM

Fish Feed Production: बिहार अब सिर्फ खेती ही नहीं, बल्कि मछली उत्पादन और मछली कारोबार में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. राज्य में मछली उत्पादन के साथ-साथ मछली आहार यानी फिश फीड का उत्पादन भी तेजी से बढ़ा है. डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, मत्स्य निदेशालय के अनुसार बिहार अब अपनी जरूरत का आधे से ज्यादा मछली आहार खुद तैयार कर रहा है. इससे मछली पालकों को बड़ी राहत मिल रही है और उत्पादन भी लगातार बढ़ रहा है. सरकार का मानना है कि अगर मछलियों को सही और पौष्टिक आहार मिलेगा तो उत्पादन तेजी से बढ़ेगा. यही वजह है कि राज्य में फिश फीड मिलों को बढ़ावा दिया जा रहा है और उन्हें आर्थिक सहायता भी दी जा रही है.

बिहार में 79 फिश फीड मिल कर रहे उत्पादन

मत्स्य निदेशालय के अनुसार बिहार में अब तक 79 फिश फीड (Fish Feed) मिल लगाए जा चुके हैं. इन मिलों में हर साल करीब 50 हजार टन मछली आहार का उत्पादन  हो रहा है. पहले मछली पालकों को दूसरे राज्यों से महंगा चारा मंगवाना पड़ता था, लेकिन अब बिहार खुद इस दिशा में आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहा है. इससे मछली पालन की लागत कम हो रही है और किसानों को बेहतर गुणवत्ता का आहार भी मिल रहा है. सरकार फिश फीड मिल लगाने वाले उद्यमियों को कई तरह की सहायता दे रही है. खासतौर पर बिजली बिल में वित्तीय सहायता दी जा रही है ताकि उत्पादन लागत कम हो सके. 100 टन प्रतिदिन उत्पादन क्षमता वाले फीड मिलों को तीन रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली सहायता दी जा रही है. इसके तहत अधिकतम दो लाख रुपये प्रति माह और 24 लाख रुपये प्रति वर्ष तक सहायता मिल सकती है.

बिहार से दूसरे राज्यों तक पहुंच रही मछलियां

बिहार अब मछली उत्पादन (Fish Farming) में आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ निर्यात में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. विभाग के अनुसार राज्य से अब तक 39.07 हजार टन मछलियां दूसरे राज्यों और शहरों में भेजी जा चुकी हैं. बिहार की मछलियों की मांग  नेपाल, सिलीगुड़ी, लुधियाना, अमृतसर, बनारस, गोरखपुर, देवरिया, कप्तानगंज, रांची और गोड्डा जैसे शहरों में लगातार बढ़ रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में उत्पादित मछलियों की गुणवत्ता बेहतर होने के कारण बाहर के बाजारों में इसकी मांग बढ़ रही है. आने वाले समय में राज्य से मछली निर्यात और तेजी से बढ़ सकता है. इससे मछली पालकों की आय में भी अच्छा सुधार देखने को मिल रहा है. कई किसान अब पारंपरिक खेती के साथ मछली पालन को भी कमाई का मजबूत जरिया बना रहे हैं.

देश का चौथा सबसे बड़ा मछली उत्पादक बना बिहार

बिहार ने पिछले कुछ वर्षों में मछली उत्पादन  के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. 2013-14 में मछली उत्पादन के मामले में बिहार देश में नौवें स्थान पर था, लेकिन अब राज्य चौथे स्थान पर पहुंच गया है. विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2014-15 से 2024-25 के बीच मछली उत्पादन में लगभग 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. साल 2023-24 में बिहार में 8.73 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन दर्ज किया गया. यह राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की योजनाओं, बेहतर तकनीक और मछली पालकों की बढ़ती रुचि के कारण यह संभव हो पाया है.

मछली पालन से बढ़ रही किसानों की आय

सरकार लगातार मछली पालन को बढ़ावा देने पर काम कर रही है. विभाग का मानना है कि मछली पालन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और कमाई बढ़ाने का बड़ा जरिया बन सकता है. मछली आहार उत्पादन, आधुनिक तालाब, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता जैसी योजनाओं से मछली पालकों को काफी फायदा मिल रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसानों को सही प्रशिक्षण और बाजार मिलता रहा, तो बिहार आने वाले वर्षों में मछली उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल हो सकता है. सरकार का फोकस अब मछली उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और निर्यात को मजबूत करने पर भी है. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था  को मजबूती मिलेगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी.

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Published: 7 May, 2026 | 11:30 PM

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