Goat farming: आज के समय में खेती के साथ-साथ पशुपालन किसानों के लिए आमदनी का मजबूत सहारा बनता जा रहा है. बढ़ती महंगाई और खेती में बढ़ते जोखिम को देखते हुए अब किसान ऐसे काम की तलाश में हैं, जिसमें कम लागत हो और मुनाफा लगातार मिलता रहे. ऐसे में बकरी पालन एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है. खासकर काली बंगाल नस्ल की बकरी को आज देश की सबसे फायदेमंद बकरी नस्लों में गिना जाता है.
क्यों खास है काली बंगाल बकरी
काली बंगाल बकरी आकार में भले ही छोटी होती है, लेकिन कमाई के मामले में यह बड़ी-बड़ी नस्लों को पीछे छोड़ देती है. इस बकरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हर तरह के मौसम में आसानी से ढल जाती है. चाहे गर्मी हो या हल्की ठंड, यह बकरी बिना ज्यादा देखभाल के भी स्वस्थ रहती है. यही वजह है कि गरीब और छोटे किसान भी इसे आसानी से पाल सकते हैं.
इस नस्ल की बकरियां आमतौर पर काले रंग की होती हैं, लेकिन कई जगह भूरे, सफेद और स्लेटी रंग की बकरियां भी देखने को मिलती हैं. इनकी त्वचा बेहद मुलायम होती है, जिसकी वजह से चमड़ा उद्योग में इसकी काफी मांग रहती है. यही कारण है कि बाजार में काली बंगाल बकरी की कीमत हमेशा अच्छी मिलती है.
पालन करना क्यों है आसान
काली बंगाल बकरी का पालन करना ज्यादा मुश्किल नहीं है. इन्हें ज्यादा बड़े बाड़े या महंगे शेड की जरूरत नहीं होती. साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए और रहने की जगह सूखी हो, तो ये बकरियां जल्दी बीमार नहीं पड़तीं. गांवों में मिलने वाला हरा चारा, पेड़ों की पत्तियां और खेतों का बचा-खुचा चारा इनके लिए काफी होता है.
बरसीम, ज्वार, बाजरा, मक्का, चना और गेहूं जैसे अनाज इन्हें पोषण देने के लिए काफी माने जाते हैं. इसके अलावा बरगद, पीपल, नीम और आम की पत्तियां भी ये शौक से खा लेती हैं. कम खर्च में इनका पेट भर जाता है, जिससे किसान की लागत अपने-आप कम हो जाती है.
दूध और मांस दोनों से कमाई
काली बंगाल बकरी सिर्फ मांस के लिए ही नहीं, बल्कि दूध के लिए भी जानी जाती है. यह बकरी भले ही बहुत ज्यादा दूध न दे, लेकिन 3 से 4 महीने तक नियमित दूध देती है, जो घरेलू जरूरतों के साथ-साथ बाजार में बेचने के लिए भी पर्याप्त होता है. वहीं, मांस की बात करें तो एक वयस्क बकरी से 18 से 20 किलो तक अच्छा मांस मिल जाता है, जिसकी बाजार में कीमत काफी अच्छी रहती है.
बकरी पालन से कितनी हो सकती है कमाई
अगर किसान 20 से 25 काली बंगाल बकरियों से शुरुआत करता है, तो कुछ ही महीनों में इसका झुंड बढ़ने लगता है. यह नस्ल जल्दी बच्चे देती है, जिससे संख्या तेजी से बढ़ती है. सही देखभाल और थोड़ी समझदारी से साल भर में 5 से 7 लाख रुपये तक की कमाई संभव मानी जाती है. यही वजह है कि काली बंगाल बकरी को आज “गरीब किसान की अमीर नस्ल” भी कहा जाने लगा है.
छोटे किसानों के लिए सुनहरा मौका
काली बंगाल बकरी पालन उन किसानों के लिए खास है, जिनके पास ज्यादा जमीन नहीं है या जो कम पूंजी में व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं. कम खर्च, कम जोखिम और अच्छी बाजार मांग के कारण यह नस्ल किसानों की आमदनी बढ़ाने का मजबूत जरिया बन सकती है. सही जानकारी और मेहनत के साथ यह बकरी सच में आपका खजाना भर सकती है.