छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में दिखी ‘मालाबार जायंट स्क्विरल’, 3 फीट लंबी दुर्लभ गिलहरी ने खींचा वैज्ञानिकों का ध्यान

छत्तीसगढ़ के एक जंगल क्षेत्र में दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी दिखाई दी है, जिससे वन विभाग और प्रकृति प्रेमियों में खुशी है. यह घटना एक समर कैंप के दौरान सामने आई. विशेषज्ञों के अनुसार यह जंगल की अच्छी सेहत और जैव विविधता का संकेत है. बच्चों में भी प्रकृति के प्रति जागरूकता बढ़ी है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 27 May, 2026 | 07:00 PM

Wildlife: छत्तीसगढ़ के बारनवापारा क्षेत्र के देवपुर जंगल में दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी (Giant Malabar Squirrel) के दिखाई देने से वन विभाग, प्रकृति प्रेमियों और स्थानीय लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है. यह खास वन्यजीव देवपुर समर कैंप 2026 के दौरान देखा गया, जिसके बाद पूरे इलाके में उत्साह का माहौल बन गया. वन मंत्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर वन विभाग की टीम को बधाई दी है और इसे राज्य के वन संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता बताया है.

समर कैंप में पहली बार दिखी दुर्लभ प्रजाति

देवपुर जंगल में आयोजित समर कैंप के दौरान बर्ड वॉचिंग ट्रेल में विशाल गिलहरी देखी गई. इसे प्रकृति प्रेमी हेमंत वर्मा (Hemant Verma) ने सबसे पहले पहचाना. इसके बाद वहां मौजूद बच्चों, युवाओं और वन विभाग की टीम में उत्साह बढ़ गया. अधिकारियों के अनुसार किसी दुर्लभ प्रजाति का इस तरह दिखना यह संकेत देता है कि जंगल का वातावरण स्वस्थ और सुरक्षित है.

विशाल भारतीय गिलहरी की खास पहचान

विशाल भारतीय गिलहरी को जायंट मालाबार स्क्विरल (Giant Malabar Squirrel) भी कहा जाता है और इसका वैज्ञानिक नाम रतुफा इंडिका (Ratufa indica) है. ये भारत की सबसे बड़ी पेड़ों पर रहने वाली गिलहरी मानी जाती है. इसकी लंबाई पूंछ सहित लगभग तीन फीट तक हो सकती है. इसके शरीर पर लाल, काला, भूरा और क्रीम रंगों का मिश्रण इसे बेहद आकर्षक बनाता है. ये गिलहरी ज्यादातर समय पेड़ों पर रहती है और एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर लंबी छलांग लगाने में माहिर होती है.

Giant Malabar Squirrel

जंगल में दुर्लभ गिलहरी मिलने से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला.

संरक्षित प्रजाति और जंगल की जैव विविधता

वन विभाग के अनुसार ये प्रजाति वन्यजीव संरक्षण  अधिनियम 1972 की अनुसूची-2 के तहत संरक्षित है. इसका शिकार या व्यापार करना कानूनन अपराध है. बारनवापारा क्षेत्र जैव विविधता से भरपूर माना जाता है, जहां कई दुर्लभ पक्षी और जानवर पाए जाते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिलहरी का दिखाई देना इस बात का प्रमाण है कि जंगल का पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित और सुरक्षित है.

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मालाबार जायंट स्क्विरल

बच्चों में बढ़ी पर्यावरण के प्रति जागरूकता

समर कैंप में शामिल बच्चों और युवाओं के लिए ये अनुभव बेहद खास रहा. वन विभाग का कहना है कि ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को प्रकृति के करीब लाने में मदद करते हैं. वनमंडलाधिकारी धम्मशील गनवीर ने बताया कि इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों में पर्यावरण और वन्यजीव  संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है. विभाग का मानना है कि अगर लोग प्रकृति को समझेंगे, तो जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा और मजबूत होगी.

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Published: 27 May, 2026 | 07:00 PM

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