लाइमलाइट में नहीं दिखे पर बदल दी गांवों की तकदीर! पशुपालन-डेयरी के साइलेंट हीरो को मरणोपरांत मिला पद्म श्री सम्मान
कुछ लोग नाम के लिए नहीं, काम के लिए जीते हैं. पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में ऐसे ही एक मूक नायक ने सहकारिता के जरिए किसानों और महिलाओं को मजबूत बनाया. उनके बनाए मॉडल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी. अब उनके निस्वार्थ योगदान को देश ने पद्म श्री देकर सम्मानित किया है.
Rama Reddy Mamidi Animal Husbandry : कुछ लोग मंच पर दिखते हैं, कुछ लोग पोस्टर पर छाए रहते हैं और कुछ लोग चुपचाप व्यवस्था को बदल देते हैं. पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में ऐसा ही एक नाम था, जिसने बिना शोर किए लाखों किसानों और ग्रामीण परिवारों की जिंदगी बेहतर बनाई. उनका काम बोलता रहा, नाम पीछे रह गया. अब देश ने उनके योगदान को पहचान दी है और उन्हें मरणोपरांत पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया है.
पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को नई दिशा देने वाला सफर
तेलंगाना के रहने वाले दिवंगत रामा रेड्डी मामिडी पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के ऐसे दूरदर्शी नेता थे, जिन्होंने इस सेक्टर को सिर्फ आजीविका नहीं, बल्कि टिकाऊ व्यवसाय के रूप में देखने की सोच दी. उन्होंने माना कि अगर किसान संगठित हों, तो वे खुद अपनी आर्थिक स्थिति बदल सकते हैं. इसी सोच के साथ उन्होंने सहकारी समितियों को मजबूत करने का काम शुरू किया. उनका फोकस सिर्फ दूध उत्पादन तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे ग्रामीण तंत्र को आत्मनिर्भर बनाना था.
सहकारी आंदोलन को मजबूत करने की सोच
रामा रेड्डी का मानना था कि सहकारिता सिर्फ संस्था नहीं, बल्कि एक मूल्य है. उन्होंने सहकारी समितियों को लोकतांत्रिक, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया. उनकी कोशिश थी कि किसान केवल सदस्य न रहें, बल्कि मालिक बनें. इसके लिए उन्होंने सहकारी समितियों के जरिए किसानों को ऋण, बीज, खाद, बाजार और जरूरी सेवाओं से जोड़ा. यही मॉडल आगे चलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना.
महिलाओं और छोटे किसानों को किया सशक्त
उनके काम की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने महिलाओं और छोटे किसानों को केंद्र में रखा. महिलाओं के लिए बचत समूह बनाए गए, जहां वे नियमित रूप से छोटी-छोटी रकम जमा करती थीं. धीरे-धीरे ये समूह आर्थिक रूप से मजबूत बने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का मौका मिला. डेयरी गतिविधियों से जुड़कर महिलाओं ने न सिर्फ घर की आमदनी बढ़ाई, बल्कि समाज में अपनी पहचान भी बनाई. उनकी पहल ने यह साबित किया कि सही मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं.
कानून और नीति में भी निभाई अहम भूमिका
रामा रेड्डी केवल जमीनी कार्यकर्ता नहीं थे, बल्कि नीति और कानून की गहरी समझ रखने वाले व्यक्ति थे. उन्होंने सहकारी कानूनों को बारीकी से पढ़ा और जहां जरूरी लगा, वहां बदलाव के लिए संघर्ष किया. जब सहकारी संस्थाओं की स्वायत्तता पर खतरा आया, तो उन्होंने लोकतंत्र और सहकारिता के सिद्धांतों की रक्षा के लिए आंदोलन और कानूनी लड़ाई का रास्ता चुना. उनके प्रयासों का ही नतीजा रहा कि सहकारी समितियों को सरकारी हस्तक्षेप से मुक्त करने वाले कानून बने, जिन्हें बाद में कई राज्यों ने अपनाया.
डेयरी सेक्टर में टिकाऊ मॉडल की नींव
डेयरी क्षेत्र में उनका नजरिया अलग था. वे मानते थे कि उत्पादन के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन जरूरी है. उन्होंने ऐसे मॉडल को बढ़ावा दिया, जिसमें गांव स्तर पर ही दूध संग्रह, प्रोसेसिंग और बिक्री हो सके. इससे किसानों को बेहतर दाम मिले और बिचौलियों की भूमिका कम हुई. महिलाओं की डेयरी सहकारी समितियां इस सोच का सबसे सफल उदाहरण बनकर उभरीं.
पद्म श्री सम्मान और विरासत
पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष 2026 में मरणोपरांत पद्म श्री सम्मान के लिए चुना गया. यह सम्मान सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस सोच का सम्मान है, जिसने सहकारिता को मजबूत किया. रामा रेड्डी भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके बनाए मॉडल, मजबूत संस्थाएं और सशक्त किसान उनकी जीवित विरासत हैं. उन्होंने यह सिखाया कि बदलाव के लिए शोर जरूरी नहीं, सोच और ईमानदारी काफी होती है.