डेयरी फार्मिंग का सीक्रेट फॉर्मूला, 5 पशुओं से हो सकती है महीने में 50000 रुपये की कमाई

डेयरी फार्मिंग अब सिर्फ मेहनत का काम नहीं, बल्कि मोटी कमाई का सीक्रेट फॉर्मूला बन चुका है. सही नस्ल के चयन और स्मार्ट प्रबंधन से मात्र 5 पशुओं के जरिए किसान महीने का 50,000 से ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं. सरकारी सब्सिडी और बेहतर मार्केटिंग के तालमेल से यह छोटा बिजनेस घर बैठे शानदार आय का जरिया बन रहा है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 12 Jan, 2026 | 12:29 PM

Dairy Farming : क्या आप जानते हैं कि आपके घर के आंगन में बंधी 5 गाय या भैंस आपको किसी बड़े शहर की आलीशान नौकरी से ज्यादा कमा कर दे सकती हैं? अक्सर लोग सोचते हैं कि डेयरी के काम में सिर्फ मेहनत है और कमाई कम, लेकिन अगर सही गणित और सूझबूझ से काम लिया जाए, तो यह ‘सफेद सोना’ आपकी तकदीर बदल सकता है. आज के दौर में जब शुद्ध दूध की मांग आसमान छू रही है, तब 5 पशुओं का एक छोटा सा फार्म भी आपको हर महीने 50,000 रुपये तक का शुद्ध मुनाफा दे सकता है. आइए समझते हैं इस मुनाफे का वो सीक्रेट फॉर्मूला जिसे अपनाकर कई किसान मालामाल हो रहे हैं.

कमाई की असली चाबी

डेयरी फार्मिंग  में सबसे पहली शर्त है-पशु ऐसा हो जो दूध की बाल्टी भर दे. अगर आप साधारण नस्ल के पशु पालेंगे, तो मेहनत ज्यादा होगी और कमाई कम. जानकारों का कहना है कि गिर, साहिवाल जैसी देसी नस्लें या जर्सी जैसी विदेशी नस्ल  की गायें पालना ज्यादा फायदेमंद है. अगर एक गाय दिन का 15 से 20 लीटर दूध देती है, तो आपका आधा काम यहीं हो गया. अच्छी नस्ल का पशु कम बीमार पड़ता है और लंबे समय तक दूध देता है, जिससे आपकी आय का स्रोत बना रहता है.

समझिए पैसों का हिसाब

चलिए अब सीधे पैसों की बात करते हैं. मान लीजिए आपके पास 5 पशु हैं और हर पशु औसतन 20 लीटर दूध देता है. इस तरह रोज का 100 लीटर दूध हुआ. महीने भर में यह 3000 लीटर हो जाता है. अगर आप शुद्ध दूध को 60 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से भी बेचते हैं, तो महीने की कुल आमदनी 1,80,000 रुपये होती है. इसमें से पशुओं के दाने, चारे, दवा और रखरखाव पर अगर 80,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक का भी खर्च निकाल दें, तो भी 50,000 रुपये से 80,000 रुपये की शुद्ध बचत आपके हाथ में बचती है.

लागत घटाएं, बचत बढ़ाएं

डेयरी बिजनेस  में मुनाफा बढ़ाने का सबसे बड़ा तरीका है-खर्चों में कटौती. अगर आप पशुओं के लिए हरा चारा खुद अपने खेत में उगाते हैं, तो चारे पर होने वाला भारी खर्च बच जाता है. इसके अलावा, शुरुआत में बाहर से मजदूर रखने के बजाय अगर परिवार के सदस्य खुद देखभाल करें, तो लेबर का खर्च भी मुनाफे में जुड़ जाता है. संतुलित आहार (Mineral Mixture) और समय पर टीकाकरण पशुओं को बीमारी से बचाता है, जिससे डॉक्टर और दवाओं का फालतू खर्च कम हो जाता है.

मार्केटिंग का हुनर और सरकारी मदद

दूध तो पैदा हो गया, लेकिन उसे सही जगह बेचना भी एक कला है. आप अपना दूध सीधे घरों में, होटलों में या अपनी खुद की छोटी डेयरी खोलकर ऊंचे दाम पर बेच सकते हैं. वहीं दूसरी तरफ, केंद्र और राज्य सरकारें नाबार्ड (NABARD) के जरिए डेयरी खोलने के लिए भारी सब्सिडी भी देती हैं. कई योजनाओं में तो 33 फीसदी तक की छूट मिल जाती है. यानी सरकार आपको बिजनेस शुरू करने के लिए पैसे भी दे रही है और रास्ता भी दिखा रही है.

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