Frozen Embryo: पशुपालन और डेयरी सेक्टर में भारत ने एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल की है. बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एनिमल हसबेंड्री (CEAH) में वैज्ञानिकों ने ETT-IVF तकनीक के जरिए 10 साल से ज्यादा समय तक सुरक्षित रखे गए फ्रोजन भ्रूण से एक स्वस्थ बछिया का सफल जन्म कराया है. 10 अप्रैल 2026 को जन्मी इस मादा बछिया का नाम दुर्गा रखा गया है. यह उपलब्धि सिर्फ एक जन्म नहीं, बल्कि पशुओं की नस्ल सुधार और दूध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है. CEAH पहले से ही आधुनिक ET लैब, सेक्स-सॉर्टेड सीमेन और ब्रीडिंग टेक्नोलॉजी के लिए जाना जाता है.
10 साल पुराने फ्रोजन भ्रूण से जन्मी दुर्गा
इस उपलब्धि की सबसे खास बात यह है कि जिस भ्रूण से बछिया का जन्म हुआ, उसे एक दशक से ज्यादा समय तक फ्रोजन अवस्था में सुरक्षित रखा गया था. वैज्ञानिकों ने ETT-IVF तकनीक से इस भ्रूण को रिसिपिएंट पशु में ट्रांसफर किया, जिसके बाद सफल गर्भधारण हुआ और स्वस्थ मादा बछिया का जन्म हुआ. ऐसे में ये तकनीक भविष्य के लिए बेहतर नस्ल के पशुओं का जेनेटिक बैंक तैयार करने जैसा है. इससे बेहतरीन गुणों वाली नस्ल को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है.

नई तकनीक से डेयरी नस्ल सुधार और दूध उत्पादन बढ़ेगा.
दूध उत्पादन और नस्ल सुधार को मिलेगा बड़ा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफलता से बेहतर दूध देने वाली नस्लों को तेजी से बढ़ाने में मदद मिलेगी. जिन पशुओं में दूध उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता या बेहतर शरीर संरचना जैसे गुण हैं, उनके भ्रूण को सुरक्षित रखकर भविष्य में उपयोग किया जा सकेगा. इससे किसानों को ज्यादा दूध देने वाले और स्वस्थ पशु मिलेंगे. आसान शब्दों में कहें तो कम समय में अच्छी नस्ल के ज्यादा पशु तैयार करना अब आसान होगा. यह उपलब्धि देश में डेयरी सेक्टर की उत्पादकता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा सकती है.
आधुनिक तकनीक से बदलेगा पशुपालन का भविष्य
बेंगलुरु का CEAH पहले से ही आधुनिक पशुपालन तकनीकों का बड़ा केंद्र है. यहां फ्रोजन सीमेन, एम्ब्रियो ट्रांसफर, IVF लैब और सेक्स-सॉर्टेड सीमेन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं. अब इस नई सफलता ने दिखा दिया है कि भारत पशु प्रजनन तकनीक में तेजी से आगे बढ़ रहा है. आने वाले समय में यह तकनीक गाय-भैंस की नस्ल सुधार, दूध उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने में गेमचेंजर बन सकती है. खासकर छोटे डेयरी किसानों के लिए यह बड़ी राहत होगी, क्योंकि उन्हें बेहतर नस्ल के पशु आसानी से मिल पाएंगे.
किसानों और डेयरी सेक्टर के लिए उम्मीद की नई किरण
इस उपलब्धि का सीधा फायदा डेयरी किसानों को मिलेगा. अच्छी नस्ल के पशु ज्यादा दूध देते हैं, जल्दी बीमार नहीं पड़ते और लंबे समय तक उत्पादक रहते हैं. अगर इस तकनीक को बड़े स्तर पर राज्यों तक पहुंचाया गया, तो देश के डेयरी सेक्टर में दूध उत्पादन बढ़ाने की रफ्तार कई गुना तेज हो सकती है.