अब MSP पर होगी मछली की खरीद, सरकार ने तय किया रेट.. हजारों मछुआरों को होगा सीधा फायदा

विभाग ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश में मछली उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जलाशयों में मछली उत्पादन 2022-23 में 549.35 मीट्रिक टन था, जो बढ़कर 2025-26 में 818.02 मीट्रिक टन हो गया है. इसी तरह, राज्य में कुल मछली उत्पादन भी बढ़ा है, जो 2024-25 में 19,019 मीट्रिक टन था और 2025-26 में बढ़कर 20,005 मीट्रिक टन हो गया है.

Kisan India
नोएडा | Published: 14 Apr, 2026 | 06:55 AM

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में पहली बार राज्य सरकार ने जलाशयों से पकड़ी जाने वाली मछली के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय किया है. यह कदम मछुआरों की आय को स्थिर करने के लिए लिया गया है. सरकार ने मछली का MSP 100 रुपये प्रति किलो तय किया है, ताकि बाजार में कीमतें घटने पर भी मछुआरों को एक निश्चित न्यूनतम दाम मिल सके. अगर नीलामी में कीमत MSP से कम रहती है, तो सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए प्रति किलो 20 रुपये तक की सब्सिडी देगी, जिससे मछुआरों को नुकसान न हो.

सरकार ने मछुआरों को आर्थिक राहत देने के लिए रॉयल्टी दरों में भी बड़ी कटौती की है. पहले जलाशयों की मछली  पर रॉयल्टी 15 फीसदी से घटाकर 7.5 फीसदी की गई थी, जिसे अब चालू वित्त वर्ष के लिए और कम करके सिर्फ 1 फीसदी कर दिया गया है. इस फैसले से 6,000 से ज्यादा जलाशय मछुआरों को सीधा फायदा मिलेगा और उनकी शुद्ध कमाई बढ़ेगी. हिमाचल सरकार को उम्मीद है कि उसके इस फैसले से राज्य में मछली पालकों की संख्या में भी इजाफा होगा.

मछुआरा परिवारों की आजीविका और मजबूत होगी

मत्स्य विभाग के अनुसार, यह योजना मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा बजट 2026-27 में की गई घोषणा से जुड़ी है और इसे जमीन पर लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. अधिकारियों ने कहा कि इस समर्थन मूल्य का उद्देश्य बाजार में कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के असर को कम करना है. साथ ही जब नीलामी में दाम गिरते हैं, तब मछुआरों को नुकसान से बचाना भी इसका मुख्य लक्ष्य है. इससे राज्य में मछुआरा परिवारों की आजीविका और मजबूत होगी.

इस ऐलान से 6,000 से ज्यादा मछुआरों को फायदा मिलेगा

अधिकारियों के अनुसार, इस व्यवस्था से मछुआरों को समय पर और सीधे मदद मिलेगी और बिक्री में बिचौलियों की भूमिका  भी कम होगी. इसका उद्देश्य जलाशयों से पकड़ी जाने वाली मछली के लिए स्थिर और भरोसेमंद कीमत सुनिश्चित करना है. योजना को जमीनी स्तर पर लागू करने की तैयारी चल रही है. अधिकारियों ने कहा कि रॉयल्टी में किए गए बदलाव से जलाशयों में काम करने वाले हजारों मछुआरों को फायदा मिलेगा.

हिमाचल में बढ़ा मछली का उत्पादन

विभाग ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश में मछली उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जलाशयों में मछली उत्पादन 2022-23 में 549.35 मीट्रिक टन था, जो बढ़कर 2025-26 में 818.02 मीट्रिक टन हो गया है. इसी तरह, राज्य में कुल मछली उत्पादन भी बढ़ा है, जो 2024-25 में 19,019 मीट्रिक टन था और 2025-26 में बढ़कर 20,005 मीट्रिक टन हो गया है.

जलाशयों में काम करने वाले मछुआरों की आमदनी बढ़ेगी

सरकार को उम्मीद है कि इससे जलाशयों में काम करने वाले मछुआरों की आमदनी बढ़ेगी. अधिकारियों ने कहा कि MSP, सब्सिडी और रॉयल्टी में कटौती जैसे सभी कदम मिलकर काम करेंगे. इनका उद्देश्य मछुआरों को उचित दाम दिलाना, आर्थिक दबाव कम करना और उनकी आमदनी बढ़ाना है. विभाग ने कहा कि बढ़ता उत्पादन भी इस क्षेत्र के विकास को मजबूत कर रहा है.

 

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Published: 14 Apr, 2026 | 06:55 AM
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