पशुपालकों के लिए जरूरी खबर, मार्च में करें हरे चारे की बुआई, पशुओं को मिलेगा भरपूर पोषण

पशुओं की अच्छी सेहत और दूध उत्पादन के लिए हरा चारा बहुत जरूरी होता है. विशेषज्ञों के अनुसार मार्च महीने में ज्वार, मक्का, बाजरा, लोबिया और सूडान जैसे हरे चारे की बुआई करनी चाहिए. पहले से लगी बरसीम और जई की फसल में 10-15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करना भी जरूरी होता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 14 Mar, 2026 | 06:00 AM

Green Fodder: पशुपालन में सबसे बड़ी जरूरत होती है पशुओं के लिए अच्छा और पोषक चारा. अगर पशुओं को समय पर हरा चारा मिल जाए तो उनकी सेहत अच्छी रहती है और दूध उत्पादन भी बढ़ता है. इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने पशुपालकों को मार्च महीने के लिए कुछ जरूरी सलाह दी है. विभाग का कहना है कि इस महीने अगर किसान हरे चारे की सही तरीके से बुआई कर दें, तो आने वाले महीनों में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध रहेगा और पशुपालकों को भी काफी फायदा होगा.

मार्च में करें हरे चारे की बुआई

बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार मार्च का महीना हरे चारे की खेती शुरू करने के लिए बहुत अच्छा समय माना जाता है. इस समय अगर किसान खेत में सही तरीके से बुआई कर दें तो आने वाले महीनों में पशुओं के लिए भरपूर चारा तैयार हो सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस महीने ज्वार, मक्का, लोबिया, सौरघम, बाजरा और सूडान जैसे हरे चारे की बुआई करनी चाहिए. ये सभी चारे जल्दी बढ़ते हैं और पशुओं के लिए पौष्टिक भी होते हैं. इनकी खेती करने से पशुपालकों को बाजार से महंगा चारा खरीदने की जरूरत भी कम पड़ती है.

हरा चारा पशुओं के लिए क्यों जरूरी

पशु विशेषज्ञों के अनुसार हरा चारा पशुओं  के लिए बहुत जरूरी होता है. इसमें विटामिन, खनिज और जरूरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं, जिससे पशुओं की सेहत अच्छी रहती है. दुधारू पशुओं को अगर नियमित रूप से हरा चारा दिया जाए तो दूध उत्पादन में भी काफी बढ़ोतरी हो सकती है. इसके अलावा हरा चारा पचने में भी आसान होता है, जिससे पशुओं की पाचन क्रिया बेहतर रहती है. इसलिए पशुपालकों को कोशिश करनी चाहिए कि वे सालभर अपने पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था रखें.

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पशुओं के लिए मार्च में हरे चारे की खेती जरूरी सलाह.

पहले से लगे चारे की समय पर करें सिंचाई

अगर खेत में पहले से बरसीम, जई या अन्य हरे चारे की फसल लगी हुई है तो उसकी समय-समय पर सिंचाई करना भी जरूरी है. विभाग के अनुसार इन फसलों में 10 से 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करना  फायदेमंद होता है. समय पर पानी मिलने से चारे की बढ़वार अच्छी होती है और उसकी गुणवत्ता भी बेहतर रहती है. अगर सिंचाई में लापरवाही की जाए तो चारे की पैदावार कम हो सकती है. इसलिए पशुपालकों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि खेत की नमी बनी रहे.

सही तरीके से खेती करने से होगा ज्यादा फायदा

हरे चारे की खेती करते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए. खेत की अच्छी तरह जुताई करने के बाद ही बुआई करनी चाहिए, ताकि बीज अच्छी तरह अंकुरित हो सके. इसके अलावा समय-समय पर खेत की निगरानी करना भी जरूरी है. अगर खेत में खरपतवार ज्यादा हो जाए तो उसे हटाना चाहिए. इससे चारे की फसल को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह और पोषण मिलता है. सही तरीके से खेती करने से चारे की पैदावार ज्यादा होती है और पशुपालकों को बेहतर लाभ मिलता है.

हरे चारे से बढ़ेगा दूध उत्पादन और मुनाफा

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पशुपालक अपने पशुओं को पर्याप्त हरा चारा  दें तो इससे दूध उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है. स्वस्थ पशु ज्यादा दूध देते हैं और उनकी देखभाल पर खर्च भी कम आता है. बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि वे मार्च महीने में हरे चारे की बुआई जरूर करें और पहले से लगी फसलों की सही देखभाल करें. इससे पशुओं को सालभर पौष्टिक चारा मिलेगा और पशुपालकों की आय भी बढ़ेगी.

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Published: 14 Mar, 2026 | 06:00 AM
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