Dairy Farming: खेती के साथ पशुपालन आज किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बन चुका है. गांवों से लेकर शहरों के आसपास तक बड़ी संख्या में लोग डेयरी व्यवसाय की ओर बढ़ रहे हैं. कई किसान दूध बेचकर हर महीने अच्छी कमाई कर रहे हैं, इसलिए दुधारू गाय और भैंस की मांग लगातार बढ़ रही है. लेकिन सही जानकारी के अभाव में कई बार लोग गलत पशु खरीद लेते हैं और बाद में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. पशु बाहर से स्वस्थ और ज्यादा दूध देने वाला दिखाई देता है, लेकिन कुछ दिनों बाद दूध कम हो जाता है या पशु बीमार पड़ने लगता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, दुधारू पशु खरीदते समय कुछ जरूरी बातों की सही जांच करना बेहद जरूरी है. यदि किसान समझदारी से गाय या भैंस खरीदें, तो लंबे समय तक अच्छा दूध उत्पादन और बेहतर मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं.
शरीर की बनावट देखकर करें पहचान
दुधारू गाय या भैंस की पहचान उसके शरीर की बनावट से काफी हद तक की जा सकती है. अच्छे दूध देने वाले पशु का पिछला हिस्सा चौड़ा और मजबूत माना जाता है. ऐसा पशु सामान्य रूप से अधिक दूध उत्पादन करने की क्षमता रखता है. इसके अलावा पशु का शरीर चमकदार और स्वस्थ दिखना चाहिए. यदि पशु सुस्त दिखाई दे, आंखों में चमक न हो या बार-बार बैठा रहे, तो यह कमजोरी या बीमारी का संकेत हो सकता है. पशु के बाल चिकने और त्वचा साफ होनी चाहिए. किसान को खरीदारी से पहले पशु को चलते-फिरते भी जरूर देखना चाहिए, ताकि उसकी चाल और स्वास्थ्य का सही अंदाजा लगाया जा सके.
थन और दूध क्षमता की जरूर करें जांच
दुधारू पशु खरीदते समय उसका थन सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, गाय या भैंस का थन लंबा, मुलायम और अच्छी तरह विकसित होना चाहिए. थन की नसें साफ दिखाई देना अच्छे दूध उत्पादन का संकेत माना जाता है. कई बार पशु व्यापारी ज्यादा दूध देने का दावा करते हैं, लेकिन केवल बातों पर भरोसा करना नुकसानदायक हो सकता है. इसलिए पशु खरीदने से पहले खुद दूध निकालकर देखना जरूरी है. इससे पता चल जाता है कि पशु वास्तव में कितना दूध दे रहा है. इसके साथ ही यह भी देखना चाहिए कि पशु आराम से दूध दे रहा है या नहीं. यदि दूध निकालते समय पशु बार-बार पैर मारता है या बेचैन होता है, तो आगे चलकर परेशानी हो सकती है. पशु के थन में सूजन, घाव या किसी प्रकार का संक्रमण नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे दूध उत्पादन प्रभावित हो सकता है.
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ज्यादा उम्र वाले पशु खरीदने से बचें
कई किसान कम कीमत देखकर अधिक उम्र वाली गाय या भैंस खरीद लेते हैं, लेकिन बाद में दूध उत्पादन कम होने की वजह से नुकसान उठाना पड़ता है. पशु चिकित्सकों के अनुसार, एक से दो ब्यान वाले दुधारू पशु सबसे अच्छे माने जाते हैं. ऐसे पशु लंबे समय तक अच्छा दूध देते हैं और उनकी देखभाल भी आसान होती है. ज्यादा बार बच्चा दे चुकी गाय या भैंस धीरे-धीरे कम दूध देने लगती हैं. इसलिए खरीदारी के समय पशु की उम्र की सही जानकारी लेना जरूरी है. पशु के दांत देखकर उसकी उम्र का अंदाजा लगाया जा सकता है. अनुभवी पशुपालक या डॉक्टर की मदद से उम्र की जांच करवाना बेहतर रहता है. इसके अलावा पशु का खाना-पीना सामान्य होना चाहिए. यदि पशु ठीक से चारा नहीं खा रहा या पानी कम पी रहा हो, तो यह बीमारी का संकेत हो सकता है. ऐसे पशु को खरीदने से बचना चाहिए.
जलवायु के अनुसार ही खरीदें पशु
आजकल कई किसान दूसरे राज्यों से महंगी नस्ल की गाय और भैंस खरीद लेते हैं. हालांकि, हर नस्ल हर क्षेत्र के मौसम में आसानी से नहीं रह पाती. कई बार अलग जलवायु के कारण पशु बीमार पड़ने लगता है और उसका दूध उत्पादन भी कम हो जाता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, हमेशा अपने क्षेत्र की जलवायु और वातावरण के अनुसार ही दुधारू पशु खरीदना चाहिए. स्थानीय मौसम में पले-बढ़े पशु जल्दी बीमार नहीं पड़ते और उनका रखरखाव खर्च भी कम आता है. यदि किसान सही नस्ल और स्वस्थ पशु का चयन करें, तो पशुपालन से अच्छी आय कमाई जा सकती है. सही पशु खरीदने से दूध उत्पादन बेहतर होता है, इलाज का खर्च कम आता है और डेयरी व्यवसाय लंबे समय तक फायदे का सौदा साबित होता है.