चुटकियों में खत्म हो जाएंगे पशुओं के पेट के कीड़े, जानिए लक्षण और उपचार

पशुओं के पेट में कीड़े पड़ना एक आम लेकिन खतरनाक बीमारी है. समय पर लक्षण पहचानकर इलाज करें, वरना दूध उत्पादन घटता है और पशु कमजोर हो जाते हैं. साफ-सफाई और दवा से बचाव संभव है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 12 Sep, 2025 | 09:40 PM

Cattle Disease Care: गाय पालन किसानों के लिए सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि कमाई और कृषि का अहम हिस्सा है. इससे उन्हें दूध, गोबर और जैविक खाद जैसी जरूरी चीजें मिलती हैं. लेकिन जब पशु बीमार हो जाएं, तो न सिर्फ उनका उत्पादन घटता है बल्कि किसान को आर्थिक नुकसान भी होता है.

पशुओं के पेट में कीड़े पड़ना एक आम लेकिन खतरनाक बीमारी है, जो अगर समय पर पकड़ी न जाए तो गंभीर नुकसान दे सकती है. आज हम आपको बताएंगे कि कीड़े कैसे पहचानें, क्या लक्षण होते हैं और कैसे इससे बचा जा सकता है.

क्यों होते हैं पेट में कीड़े?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गंदगी, अस्वच्छ चारा और दूषित पानी पीने से पशुओं के पेट में कीड़े पड़ सकते हैं. ये कीड़े अंदर जाकर भोजन को चाट जाते हैं और पशु को कमजोरी, खून की कमी और दूध उत्पादन में गिरावट जैसी समस्याएं होती हैं. कई बार किसान सोचते हैं कि पशु ठीक से खा तो रहा है, लेकिन वजन क्यों नहीं बढ़ रहा- इसका एक कारण पेट के कीड़े भी हो सकते हैं.

पेट में कीड़े होने के लक्षण क्या हैं?

अगर आप अपने पशु में नीचे दिए गए लक्षण देखें, तो सतर्क हो जाएं:-

  • पशु बार-बार मिट्टी या गंदगी खाने लगे
  • कमजोरी साफ दिखे, खड़े होने में भी दिक्कत हो
  • बदबूदार और मटमैले रंग का दस्त आने लगे
  • गोबर में काले रंग का खून या कीड़े दिखें
  • दूध का उत्पादन अचानक कम हो जाए
  • शरीर में खून की कमी हो जाए (आंखें पीली, थकान)
  • इन लक्षणों को नजरअंदाज करना भारी नुकसान की वजह बन सकता है.

समय रहते करें इलाज, वरना बढ़ेगा नुकसान

पेट में कीड़े अगर समय रहते पकड़ लिए जाएं, तो इलाज आसान होता है. देरी करने पर पशु की हालत बिगड़ सकती है. जानकारों के मुताबिक, अगर सही समय पर इलाज किया जाए, तो 30 से 40 फीसदी तक नुकसान बचाया जा सकता है. हर 3 महीने में एक बार कीड़ों की दवा (जैसे डीवेरमैक्स) देना चाहिए. लेकिन उससे पहले पशु के गोबर की जांच जरूर करवानी चाहिए ताकि सही दवा और खुराक तय हो सके.

टीकाकरण से पहले दें पेट के कीड़ों की दवा

कई किसान गलती से पहले वैक्सीनेशन करवा लेते हैं और बाद में कीड़ों की दवा देते हैं. ये गलत तरीका है. सबसे पहले पेट के कीड़ों की दवा दें, उसके बाद ही वैक्सीनेशन कराएं. क्योंकि टीकाकरण के बाद कुछ समय तक कोई भी दवा देना उचित नहीं होता. याद रखें, स्वस्थ शरीर में ही टीका असरदार होता है- अगर अंदर कीड़े होंगे, तो वैक्सीन का पूरा असर नहीं होगा.

साफ-सफाई और पोषण से करें बचाव

पेट के कीड़ों से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है साफ-सुथरा खानपान और अच्छा रखरखाव. नीचे दिए गए टिप्स जरूर अपनाएं:-

  • पशुओं को शुद्ध, ताजा और साफ पानी पिलाएं
  • गंदा या सड़ा हुआ चारा बिल्कुल न खिलाएं
  • खुले में पड़े गोबर को समय-समय पर साफ करें
  • बाड़े की नियमित सफाई करें
  • पशु के रहने की जगह सूखी और साफ रखें
  • हर 3 महीने में दवा देना न भूलें

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Published: 12 Sep, 2025 | 09:40 PM

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