मॉनसून में बकरियों की जान को खतरा..पेट के कीड़े बढ़े, एक्सपर्ट ने बताए बचाव के आसान तरीके

मॉनसून के दौरान बकरियों में पेट के कीड़ों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है. गीली घास और जलजमाव से संक्रमण फैलने की आशंका रहती है. इससे पशुओं की सेहत गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है. समय पर देखभाल, साफ-सफाई और सही दवा देने से इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 5 Jul, 2026 | 08:30 PM

Goat Health: मॉनसून के मौसम में बकरियों में पेट के कीड़ों (आंतों के परजीवी) का खतरा काफी बढ़ जाता है. इस दौरान गीली घास, नमी और जलजमाव के कारण परजीवी तेजी से फैलते हैं, जो बकरियों की सेहत पर गंभीर असर डाल सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार अगर समय पर सावधानी न बरती जाए तो यह समस्या जानलेवा भी बन सकती है. केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञ डॉ वाई के सोनी के अनुसार मॉनसून में पशुपालकों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होती है.

बरसात में क्यों बढ़ते हैं पेट के कीड़े

मॉनसून के दौरान वातावरण में नमी  काफी बढ़ जाती है, जिससे परजीवी और उनके लार्वा तेजी से विकसित होने लगते हैं. ये लार्वा गीली घास और चरागाहों पर आसानी से चिपक जाते हैं. जब बकरियां या अन्य पशु इस घास को चरते हैं, तो ये लार्वा उनके शरीर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं. इसके बाद ये आंतों तक पहुंचकर संक्रमण फैलाना शुरू कर देते हैं. धीरे-धीरे यह संक्रमण बढ़ता जाता है और पशु की पाचन प्रणाली को प्रभावित करता है. समय पर ध्यान न देने पर यह स्थिति गंभीर रूप ले सकती है और पशुओं के स्वास्थ्य पर बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है.

गंभीर बीमारियों का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार पेट के कीड़ों का संक्रमण बकरियों  में एनीमिया, डायरिया और बॉटल जॉ जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है. इस स्थिति में पशु के शरीर में खून और प्रोटीन की कमी हो जाती है, जिससे कमजोरी बढ़ती है. बॉटल जॉ में निचले जबड़े और गले में सूजन आ जाती है, जिससे पशु को खाने-पीने में परेशानी होती है और उसकी हालत गंभीर हो सकती है.

साफ-सफाई और चारे पर ध्यान जरूरी

मॉनसून में बकरियों  को हमेशा सूखी और साफ जगह पर रखना बेहद जरूरी है. बाड़े में जलजमाव नहीं होना चाहिए और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. पशुओं को हमेशा साफ और ताजा पानी देना चाहिए. साथ ही हरे चारे के साथ संतुलित मात्रा में सूखा चारा भी देना जरूरी है, जिससे पाचन तंत्र मजबूत बना रहे और संक्रमण का खतरा कम हो.

डी-वॉर्मिंग और नियमित देखभाल है जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार समय-समय पर बकरियों की डी-वॉर्मिंग (पेट के कीड़ों की दवा) करना बेहद जरूरी है. इससे आंतों के परजीवियों को नियंत्रित  किया जा सकता है. बाहरी परजीवियों से बचाव के लिए परजीवीनाशक दवाओं का उपयोग भी लाभकारी होता है. नियमित स्वास्थ्य जांच और उचित आहार प्रबंधन से बकरियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है. सही देखभाल अपनाकर मानसून में होने वाले बड़े नुकसान से बचा जा सकता है और पशुपालन को सुरक्षित बनाया जा सकता है.

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Published: 5 Jul, 2026 | 08:30 PM

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