Animal Nutrition: अगर आप पशुपालन करते हैं और कम खर्च में पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन बढ़ाना चाहते हैं, तो यह खबर आपके बहुत काम की है. बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने पशु आहार को लेकर एक जरूरी सलाह जारी की है. इसमें बताया गया है कि यूरिया का सही इस्तेमाल कैसे किया जाए, ताकि पशुओं को फायदा हो और किसी तरह का नुकसान न हो.
यूरिया का सही इस्तेमाल क्यों जरूरी
बिहार पशुपालन विभाग के अनुसार, यूरिया पशुओं (Urea Treatment) के लिए सीधे चारा नहीं है, बल्कि इसका उपयोग सूखे चारे (Fodder Management) यानी पुआल के उपचार के लिए किया जाता है. सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह पुआल की गुणवत्ता को काफी बेहतर बना देता है. जब किसान सूखे पुआल को सीधे पशुओं को खिलाते हैं, तो उसमें पोषण की कमी रहती है. लेकिन अगर उसी पुआल को यूरिया से ट्रीट किया जाए, तो उसकी पाचकता बढ़ जाती है और पशु उसे आसानी से पचा पाते हैं. इससे उनके शरीर को ज्यादा पोषण मिलता है और वे स्वस्थ रहते हैं.
पुआल को बनाएं पोषण से भरपूर
विभाग ने बताया कि यूरिया का इस्तेमाल करने से सूखे चारे में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, जिससे वह प्रोटीन युक्त बन जाता है. इसका सीधा असर पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन पर पड़ता है. अगर किसान सही तरीके से 4 फीसदी यूरिया घोल बनाकर पुआल का उपचार करते हैं, तो यह चारा पशुओं के लिए काफी फायदेमंद हो जाता है. इससे पशु मजबूत बनते हैं और उनकी उत्पादन क्षमता भी बढ़ती है. खासकर दूध देने वाले पशुओं के लिए यह तरीका बहुत कारगर माना जाता है.
सीधे यूरिया खिलाना हो सकता है खतरनाक
पशुपालन विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि यूरिया को कभी भी सीधे पशुओं को नहीं खिलाना चाहिए. ऐसा करना पशुओं के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है और उनकी जान भी जा सकती है. कई बार जानकारी के अभाव में किसान सीधे यूरिया खिलाने की गलती कर देते हैं, जिससे पशु बीमार पड़ जाते हैं. इसलिए यह बहुत जरूरी है कि किसान केवल यूरिया उपचारित पुआल ही पशुओं को खिलाएं. सही मात्रा और सही तरीके का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.
विभाग की सलाह, किसानों के लिए फायदेमंद
बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन करें और सही जानकारी के आधार पर ही पशुओं को आहार दें. यूरिया का सही उपयोग न सिर्फ पशुओं की सेहत सुधारता है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद करता है. कम खर्च में बेहतर चारा तैयार कर किसान अपने पशुपालन को और ज्यादा लाभदायक बना सकते हैं.